बांग्लादेश में उर्दू भाषी मुसलमान, हमदर्दी की आस में दर्द और गहराता गया

इंसान दो सूरतों में पलायन करता है. एक मजबूरी में और दूसरा अपनी खुशी से. भारत विभाजन के समय बंगाल,

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केरल की रक्तरंजित राजनीति

भारत में सियासी रंजिशों को लेकर हत्याएं होना, वैसे तो कोई नई बात नहीं है, लेकिन देश के सर्वाधिक शिक्षित

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छिटमहल में राहत और पुनर्वास : भारत से कहीं बेहतर बांग्लादेश

पड़ोसी मुल्क़ बांग्लादेश न स़िर्फ एक छोटा देश है, बल्कि कई मामलों में भारत से पीछे है. पिछले साल हुए

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जैतापुर न्यूक्लियर पावर प्लांट : मछुआरों और किसानों की मुसीबत

यूंतो रत्नागिरी अपनी अप्रतिम प्राकृतिक सुंदरता, जैव-विविधता, अल्फांसो आम के लिए मशहूर है, लेकिन बीते कुछ वर्षों से कोंकण का

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बांग्लादेश में बदलाव की बयार

बांग्लादेश की राजधानी ढाका कमोबेश कोलकाता जैसी ही है. पुरानी बसावट के लिहाज से थोड़ा बहुत बनारस, भोपाल और हैदराबाद

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भारत और बांग्लादेश की साझी विरासत

ढाका समेत कई शहरों की यात्राएं पूरी करने के बाद हमें नौगांव जाना था. साल 1984 से पहले यह राजशाही

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शत्रु संपदा क़ानून में पिस रहे बांग्लादेशी हिंदू

बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसं‘यक समुदाय, खासकर हिंदुओं की जान-माल की सुरक्षा से संबंधित खबरें भारतीय मीडिया की सुर्खियों में

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मराठवाड़ा : सहकारी चीनी मिलों को दफनाने की साज़िश

महाराष्ट्र में सहकारिता क्षेत्र के उद्योगों की हालत अच्छी नहीं है. मराठवाड़ा समेत सूबे की कई चीनी मिलें बंद हैं

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मराठवाड़ा के गिरमिटिया : मजदूर पलायन की अंतहीन दास्तां

बीड सहित पूरा मराठवाड़ा लगातार तीन वर्षों से भयंकर सूखे की चपेट में है. सिंचाई के अभाव में फसलें चौपट

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मराठवाड़ा : किसानों का मरघट

महाराष्ट्र का मराठवाड़ा क्षेत्र पिछले तीन वर्षों से भयंकर सूखे की मार झेल रहा है, जिसे स्थानीय लोग दुष्काल की

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डीएनडी : महाघोटाले का सेतु

दिल्ली और नोएडा की लाइफ लाइन कहे जाने वाले डीएनडी के टोल टैक्स की वसूली का किस्सा उस अंतहीन क़र्ज़

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फ़सल मुआवज़े को लेकर भेदभाव : बटाईदार किसानों की पुकार कब सुनेगी सरकार

चैत्र और बैसाख के महीने में अमूमन तेज़ पछुआ हवाएं चलती हैं. इन हवाओं की रफ्तार से किसानों की खुशी

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फ़िलहाल सिंगुर में सन्नाटा है

सिंगुर में टाटा मोटर्स को क़रीब एक हज़ार एकड़ ज़मीन देना पश्‍चिम बंगाल में दशकों पुरानी वाममोर्चा सरकार के पतन

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श्रम क़ानूनों में संशोधन मज़दूरों के ख़िलाफ़ है

श्रम क़ानूनों में किए जा रहे संशोधन से केंद्रीय ट्रेड यूनियनें मोदी सरकार से ख़ासी नाराज़ हैं. श्रमिक संगठनों का

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दिसंबर में तय होगा दिल्ली का राजनीतिक भविष्य

दिल्ली की राजनीति को अन्य राज्यों के मुक़ाबले अधिक सरल और स्थानीय मुद्दों पर आधारित माना जाता रहा है. पिछले

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दिल्ली बजट 2014 : यह चुनावी तीर है

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद में गत दिनों दिल्ली का बजट पेश किया. भाजपा नेताओं की दलील है कि

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यह किसानों के साथ धोख़ा है

देश में खेती-किसानी से जुड़े लोगों की संख्या क़रीब सत्तर फ़ीसद है. इनमें काफ़ी बड़ा हिस्सा खेतिहर मज़दूरों का है.

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ऐसे एनजीओ जनांदोलनों के लिए ख़तरा हैं

इस देश में ग़ैर सरकारी संगठनों के बारे में जितनी चर्चाएं होनी चाहिए, अफ़सोस! उतनी नहीं हो रही हैं. क्या

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लालू और नितीश का मिलाप समाजवाद या अवसरवाद

नीतीश कुमार और लालू प्रसाद बिहार की छात्र राजनीति और जयप्रकाश आंदोलन की उपज हैं. इन दोनों नेताओं ने एक

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नक्सलियों से वार्ता की पहल करें केंद्र सरकार

नक्सलवाद की समस्या केंद्र की पिछली कई सरकारों के लिए परेशानी का सबब रही है. पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह

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मोदी के छोटे मंत्रिमंडल का मतलब

पिछले दिनों नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. क़रीब तीन दशकों के बाद आम चुनाव में किसी राजनीतिक

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जनता को राजग सरकार से बड़ी उम्मीदें : महबूब अली कैसर

चौधरी महबूब अली कैसर खगड़िया से नवनिर्वाचित सांसद हैं. उन्होंने राजग गठबंधन के तहत लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार के

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वाममोर्चा की नैया डूब गई

लोकसभा चुनाव में वामदलों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद राजनीतिक विश्‍लेषकों को भी नहीं थी, लेकिन महज दस सीटों पर

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बेबस प्रधानमंत्री की व्यथा

इसमें कोई शक नहीं कि देश की जनता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विषय में अच्छी राय नहीं रखती. इस दुनिया

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किताबों के ज़रिए खुलासा: मनमोहन सिंह रबड़ स्टैंप प्रधानमंत्री

किताबों को लेकर वैसे तो दुनिया में कई विवाद हुए हैं, लेकिन ज़्यादातर विवाद पुस्तक में प्रकाशित तथ्यों को लेकर

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क्या चुनावों के बाद टूट जाएगी आम आदमी पार्टी?

भारतीय राजनीति में सियासी पार्टियों के बनने और उसके बिखरने का इतिहास कोई नया नहीं है. सोशलिस्ट पार्टी से लेकर

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कितने असरदार रह गए हैं इमाम बुख़ारी?

यह पहली बार नहीं है, जब चुनाव के समय जामा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुख़ारी ने मुसलमानों से

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रोचक मुक़ाबले के आसार

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह गाज़ियाबाद के सांसद हैं, लेकिन इस बार वह यहां से नहीं, बल्कि लखनऊ से

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कम होती बहस और प्रचार की परंपराएं

देश में मौजूदा राजनीति भले ही कई विसंगतियों की शिकार रही हो, लेकिन लोकसभा, विधानसभा, ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों

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केजरीवाल को गांधीवादियों का कोई समर्थन नहीं

जनता को सब्ज़बाग़ दिखाने में माहिर आम आदमी पार्टी अब गांधीवादियों को भी बरगलाने लगी है. हाथ में तिरंगा, सिर

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