बंद मिलें और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी

समस्तीपुर बिहार का प्रमुख ज़िला है. यहां पूर्व मध्य रेलवे का मंडलीय कार्यालय है, उत्तर बिहार का इकलौता राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय है. फिर भी यह जिला औद्योगिक क्षेत्र में पिछड़ा है. प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद यहां उद्योग पनप नहीं पा रहे हैं.

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समस्तीपुर रेलवे कारखाना बंदी की कगार पर

वर्ष 1881 में ब्रिटिश सरकार द्वारा स्थापित समस्तीपुर रेलवे कारखाना सरकारी उदासीनता के चलते बंदी की कगार पर पहुंच गया है. यह उत्तर बिहार का इकलौता रेलवे कारखाना है. यहां 1907 में हुई हड़ताल ट्रेड यूनियन आंदोलन की अमूल्य धरोहर है. इस कारखाने के अधिकांश कार्य गोरखपुर और इज्जत नगर स्थित कारखानों को सौंप दिए गए हैं.

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शारदा सिन्हा: 25 ह़जार का पुरस्कार 27 साल से इंत़जार

मशहूर लोकगीत गायिका पद्मश्री शारदा सिन्हा को बिहार सरकार द्वारा 27 वर्ष पहले घोषित पच्चीस हज़ार रुपये की पुरस्कार राशि का आज तक बेसब्री से इंतज़ार है. सुशासन के नाम पर दूसरी पारी खेलने वाले वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस ओर अब तक ध्यान नहीं दिया है.

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