असमः मंत्रियों की संप‍त्ति की घोषणा पर सवाल

बीती 14 जनवरी को असम सरकार ने अपनी वेबसाइट पर राज्य के सभी मंत्रियों की संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक कर दिया. काफी समय पहले असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने वादा किया था कि वह और उनके मंत्रिमंडल के सभी सहयोगी अपनी-अपनी संपत्ति की घोषणा करेंगे, लेकिन कई बार समय सीमा तय करने के बावजूद ऐसा नहीं हो सका.

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असम: शांति वार्ता के लिए तैयार हो रही जमीन

प्रतिबंधित संगठन उल्फा और केंद्र सरकार के बीच शांति वार्ता के लिए सकारात्मक माहौल तैयार हो रहा है. राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि तमाम अनिश्चितता, असुविधा, मंथर गति, क़ानूनी अड़चनों के बावजूद 2011 में होने वाले असम विधानसभा चुनाव से पहले उल्फा और सरकार की बातचीत शुरू हो सकती है. बांग्लादेश में शेख हसीना की सत्ता में वापसी, केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम की विशेष तत्परता और बांग्लादेश में रह रहे उल्फा नेताओं पर बढ़ते दबाव के चलते उनके असम आगमन के बाद संकेत मिलने लगा था कि उल्फा और सरकार के बीच शांति वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो सकता है. पिछले महीने असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा कि बांग्लादेश में रहने वाले उल्फा के अधिकांश नेता असम लौट चुके हैं और असम सरकार म्यांमार में रहने वाले उल्फा कैडरों एवं नेताओं को सेफ पैसेज देने के लिए तैयार है. गोगोई ने कहा कि अगर उल्फा या एनडीएफबी के 80 फीसदी सदस्य शांति वार्ता में शामिल होने के लिए तैयार हैं तो हमें परेश बरुआ या रंजन दैमारी की सहमति का इंतज़ार करने की कोई ज़रूरत नहीं है. केंद्रीय गृहमंत्री शांति वार्ता के लिए शर्त रख चुके हैं कि उग्रवादियों को हिंसा रोकनी होगी, हथियार डालने होंगे और संप्रभुता की मांग छोड़नी होगी.

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खुद को मसीहा समझते हैं जन प्रतिनिधि

असम में विधायकों के निवास पर ग्रामीणों की भीड़ सहज ही देखी जा सकती है. पार्टी के कैडर प्रत्येक आगंतुक की व़फादारी की जांच करते हैं, फिर उसके आवेदन को आगे बढ़ाने की स़िफारिश करते हैं. यह ग्रामीण असम का चिर परिचित मंजर है.

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भारत-बांग्‍लादेश सीमाः मवेशियों की तस्‍करी और जाली नोटों का धंधा

तस्करों के लिए बांग्लादेश जाकर मवेशियों को बेचना फायदे का सौदा बन गया है. वहां मवेशियों की ऊंची क़ीमत मिलती है. असम की बराक घाटी के रास्ते बांग्लादेश के भीतर बड़े पैमाने पर मवेशियों की तस्करी जारी है. सीमा सुरक्षाबल के सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश में भारत के मवेशियों की काफी मांग है. कालीगंज, काबूगंज, चिरागी और सीलटेक के बाज़ारों में नियमित रूप से मवेशियों की बिक्री की जाती है.

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घोटाले के घेरे में गोगोई सरकार

जब से असम के उत्तर कछार पर्वतीय स्वशासी ज़िला परिषद में एक हज़ार करोड़ रुपये के घोटाले का मामला उजागर हुआ है, तबसे राज्य की तरुण गोगोई सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई है. इस घोटाले से स्पष्ट हो गया है कि असम के शासन तंत्र में भ्रष्टाचार किस हद तक प्रभावी हो चुका है.

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