साई बाबा : जैसा भाव वैसा गुरु

अपने सांसारिक ज्ञान के आधार पर आध्यात्मिक कार्य की विवेचना करना मनुष्य की एक बहुत बड़ी कमी है. आध्यात्मिक ज्ञान

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श्री साईं-सच्चरित्र में कर्म-सिद्धांत

स्व. श्री गांविंद रघुनाथ दाभोलकर (हेमाडपंत) द्वारा रचित ‘श्री साईं सच्चरित्र’ के सैंतालीसवें अध्याय में श्री साईंनाथ महाराज द्वारा अपने

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साईं वंदना : बिना भावत्मकता के संपूर्ण उपलब्धि का कोई अर्थ नहीं

मंदिर-निर्माण का उद्देश्य आज देश-विदेश में बन रहे अनेक मंदिरों का उद्देश्य क्या है? मंदिर का निर्माण एक इमारत का

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कुरीतियों को तोड़ने के लिए लेते हैं अवतार

एक गृहस्थ किस प्रकार अपने व्यवसाय एवं पारिवारिक दायित्वों का निर्वाह करते हुए बाबा से संबद्ध कार्यों में संलग्न हो

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सामान्य समस्याएं : निष्काम सेवा ही गुरु का प्रमुख ध्येय है

सामान्य जीवन और गुरुमार्ग सामान्य जीवन जीना ही एक समस्या है, फिर समय के अभाव में भी श्री गुरु-मार्ग के

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साईं वंदना : प्राणिमात्र का कल्याण ही एकमात्र उद्देश्य

मत्कार : सद्गुरु की सूक्ष्म कार्य-प्रणाली क्या सद्गुरु चमत्कार करते हैं? जैसा हम समझते हैं कि किसी कार्य को कोई

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जन्नत श्री गुरु के चरणों में ही अनुभव होता है

गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण सर्वोत्तम शिष्य बनने के लिए, शिष्य को क्या करना चाहिए? सर्वोत्तम शिष्य बनने के लिए

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साई वंदना : सद्‌गुरु का मूलभूत गुण है ईश्वरीय करुणा

क्या पाप-कर्म करने वालों की मुक्ति सम्भव है? जीवन में किए गए नकारात्मक एवं सकारात्मक कर्मों का स्त्रोत एक ही

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भिन्न धर्म-परंपराएं व भिन्न पूजा पद्धतियां

अपना धर्म नहीं छोड़ना चाहिए यदि ईश्वर एक है, तो उसकी आराधना-पद्धतियों में इतनी विभिन्नता क्यों है?. आराधना या चिंतन

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बाबा की आकर्षण शक्ति

श्री साई सच्चरित्र में बार-बार   आत्म-साक्षात्कार शब्द का उल्लेख हुआ है. आत्म-साक्षात्कार किसे कहते हैं? ईश्‍वर जगत-व्यापी है और जगत से

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