कैमूरांचल में फिर पनपने लगी नक्सलवाद की पौध

चार वर्षों से शांत रोहतास कैमूर का दक्षिणी हिस्सा कैमूराचंल एक बार फिर नक्सली गतिविधियों से आंदोलित होने लगा है.

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शाहाबादः कहीं बंजर न हो जाए जमीन

सन 1857 की क्रांति के दौरान जब शाहाबाद की धरती ने आग उगलना शुरू किया तब यहां के लोगों को सिंचाई के संसाधन देकर कृषि कार्य कीतरफ मोड़ने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने एक बड़ी परियोजना की शुरूआत की थी. डेहरी के ऐनकार्ट में सोन नदी पर एक बांध बना और पूरे शाहाबाद में नहरों का जाल बिछाने की कवायद तेज़ हुई.

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नज़र लागी राजा तोरे बंगले पर

सासाराम के सीवी टेक कंसट्रक्शन निदेशक डीएम सिंह से विधान पार्षद हुलास पांडेय व उनके साथियों द्वारा कथित तौर पर मांगी गई रंगदारी की घटना भले ही नई हो, लेकिन इन दोनों महानुभावों का दोस्ताना वर्षों पुराना है. भले ही दोनों इससे इंकार कर दें, लेकिन लोग तो यही कहते हैं.

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सांसद पुत्रः बाप बड़ा न पार्टी, टिकट दे वही साथी

बिहार विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजते ही कैमूर की राजनीतिक धरती पर बग़ावत की जो पौध अचानक पनप गई, उससे राज्य के सत्ताधारी गठबंधन राजग एवं विरोध की राजनीत कर रहे विपक्षी दल राजद के राजनीतिक समीकरण तार तार होते दिखाई दे रहे हैं. भला ऐसा हो भी क्यों नहीं.

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सासारामः राजनीतिक विरासत के लिए छिड़ी जंग

देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम के निधन के बाद संपत्ति विवाद को लेकर उनके परिवार में उठा तूफान भले ही शांत हो गया हो, लेकिन उनकी राजनीतिक विरासत हथियाने की कवायद अभी थमी नहीं है. लोकसभा अध्यक्ष पद पर काबिज मीरा कुमार को अपने पैतृक संसदीय क्षेत्र सासाराम में आने वाले दिनों में नई चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.

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अति पिछड़ों की नाराजगी भारी पड़ सकती है

चुनावी वर्ष में कोई भी राजनीतिक दल विवादों में नहीं फंसना चाहता है. वैसे भी अगर कोई दल विवाद में फंसा तो समझो उसका बेड़ा गर्क. हमेशा विवादों में रहने वाले रोहतास ज़िला जदयू में एक बार फिर घमासान छिड़ी है. यह तूफान प्रदेश नेतृत्व द्वारा ज़िलाध्यक्ष नागेंद्र चंद्रवंशी को पद से हटाने के बाद सतह पर आया है.

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