पूर्वी चंपारणः अब महफूज नहीं हैं मोर

जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर कल्याणपुर प्रखंड के मनी छपरा पंचायत का माधोपुर गोविंद गांव. क़रीब पांच दशक पहले यहां के किसान स्वर्गीय चंद्रिका सिंह सोनपुर मेले से मोर के दो जो़डे खरीदकर लाए थे. तब से आज तक इस गांव में लगभग 500 मोरों की बोली गूंज रही है.

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मोतिहारीः लॉटरी में लुट गए

लगभग दस माह पूर्व छतौनी में प्रारंभ हुआ लॉटरी का धंधा अब शहर के कई इलाकों में अपना पैर पसार चुका है. बे़खौ़फ व बेरोकटोक चलने वाले इस गोरखधंधें को लेकर पुलिस प्रशासन हरकत में तो आती है लेकिन औपचारिकता पूरी कर चुप हो जाती है.

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चंपारण के ऐतिहासिक स्‍थलः झूठे वादों की मार से बेहाल

वर्ष 2010 बीत गया और चंपारण के मुद्दे जस के तस रहे. विकास यात्राएं हुईं, नई सरकार का गठन भी हुआ, लेकिन सत्याग्रही भूमि पर मुद्दों का समाधान नहीं हुआ. चंपारण को खास पहचान देने वाले स्थलों का जीर्णोद्धाधार तक नहीं हुआ है.

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पूर्वी चंपारणः फसल पर नील गायों का कहर

प्रतिवर्ष बाढ़ और सुखाड़ जैसी आपदा से लहूलुहान किसान वन विभाग की लापरवाही की वजह से भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. नीलगायों की बढ़ती संख्या से फसलों की बर्बादी इस कदर बढ़ गई है कि किसानों के चेहरे मायूस हो गए हैं.

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उम्‍मीदवारों से ज्‍यादा आकाओं की लड़ाई

एक तऱफ जहां अधिकतर सभी पार्टियों में प्रत्याशियों को लेकर कार्यकर्ताओं में रोष है, वहीं दूसरी ओर पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण के दबंग नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. पूर्व सांसद सीताराम सिंह, सांसद रमा देवी एवं पूर्व सांसद अखिलेश सिंह ने अपने-अपने क्षेत्रों में उम्मीदवार खड़े किए हैं, लेकिन पूरे चंपारण में कोई भी प्रत्याशी फिलहाल ऐसा नहीं दिख रहा है, जिसकी जीत को लेकर आश्वस्त हुआ जा सके.

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