अग्नि-5 डरिए मत, पहले हमला करना हमारी संस्‍कृति नहीं

अग्नि-5 ही नहीं, भारत ने जब-जब विभिन्न मिसाइलों का परीक्षण किया, तब-तब दुनिया, खासकर पड़ोसी देशों से नकारात्मक प्रतिक्रियाएं आईं, जिन्हें देखने-सुनने के बाद यही प्रतीत हुआ कि उनमें भारत को लेकर भय व्याप्त है. जबकि भारत कभी भी आक्रामक नहीं रहा.

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बोको हराम, ख़ुन करना काम

नाइजीरिया में कट्टरपंथी संगठन बोको हराम ने सिलसिलेवार बम धमाकों से तबाही मचा दी है. बोको हराम सरकार का तख्ता पलट कर नाइजीरिया को इस्लामिक देश में तब्दील करना चाहता है. वह कहता है कि जो भी अल्लाह द्वारा कही गई बातों पर अमल नहीं करता, वह पापी है.

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इराक के इरादे नेक नहीं

अमेरिका एवं अन्य पश्चिमी देश मानते हैं कि उनके संयुक्त ऑपरेशन से इराक की आंतरिक दशा पहले की अपेक्षा ठीक हो गई है, लेकिन बीते दिनों वहां हुए धमाकों ने यह संदेश दिया कि इराक के इरादे अब भी नेक नहीं हैं.

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बेआबरु होकर बर्लुस्कोनी को जाना

कई मसलों पर उदाहरण स्वरूप एक पुरानी कहावत कही जाती है- रोम जल रहा था और नीरो बंसी बजा रहा था. यह जुमला इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी पर कुछ ज़्यादा ही फिट बैठता है. वरना, शायद इतने बेआबरू होकर उन्हें सत्ता के गलियारे से नहीं जाना पड़ता.

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लीबिया : अभी और बिगड़ेंगे हालात

कर्नल मोअम्मर अली गद्दाफ़ी ने 42 सालों तक लीबिया पर शासन किया. उनके मारे जाने के बाद दुनिया भर से जो प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, उनमें यही कहा जा रहा है कि अब लीबिया के लोगों को शांति मिलेगी यानी कर्नल गद्दा़फी का मारा जाना अच्छी ख़बर है, किंतु आशंका इस बात की है कि वहां हालात अभी और बिगड़ेंगे.

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चीन की सरकार डर गई है

वर्ष 2010-11 दुनिया के विभिन्न देशों में लोकतांत्रिक प्रणाली की समृद्धि के लिए हुई क्रांतियों का गवाह रहा है. इस दरम्यान न सिर्फ आंदोलनकारी चर्चा में रहे, बल्कि कथित तानाशाह शासक भी. चीन में भी लोकतंत्र की बहाली के लिए जमीन तैयार की जा रही है.

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अमेरिका-चीन संबंध

पाकिस्तान में जब अलक़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन मारा गया तो अमेरिका की नज़रें कुछ समय के लिए पाकिस्तान के प्रति टेढ़ी हो गईं. तब चीन ने इशारे-इशारे में कह दिया कि वह पाकिस्तान का बाल बांका नहीं होने देगा.

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इलियास का इफेक्‍ट

पहले अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन, फिर उसके सक्रिय सदस्य इलियास कश्मीरी का मारा जाना और अब पाकिस्तान में धड़ाधड़ हो रहे बम धमाकों ने सबको सकते में डाल दिया है. पता नहीं पाकिस्तान को अब भी इस बात का एहसास है या नहीं कि उसने जो वर्षों पहले भारत विरोधी आतंकवाद की फसलें बोई थीं, अब वही फलफूल रही हैं.

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चीन की छत्रछाया के निहितार्थ

दुनिया जानती है कि हर दृष्टिकोण से सर्वाधिक ताक़तवर स़िर्फ अमेरिका है, लेकिन बीच-बीच में चीन के उछलने से कई सवाल खड़े होते रहते हैं. ख़ासकर तब, जब वह पाकिस्तान जैसे देश के संरक्षण के लिए लाठी लेकर खड़ा दिखता है. हालांकि चीन को यह पता है कि पाकिस्तान यदि अमेरिका या भारत के विरुद्ध कुछ करना तो दूर की बात, कूटनीतिक रूप से ऐसा सोच भी ले तो ये दोनों देश उसकी ईंट से ईंट बजा देने की क्षमता रखते हैं.

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अमेरिकी पहाड़ के निचे पाकिस्तानी ऊंट

सतही कूटनीति के सहारे ख़ुद को दबंग समझने वाले पाकिस्तान को अब उसकी हैसियत का अंदाजा लग जाएगा, क्योंकि कथित रूप से दुनिया के वास्तविक दबंग माने जाने वाले अमेरिका की नज़रें उस पर टेढ़ी हो गई हैं. इसका प्रमाण यह है कि अमेरिका न स़िर्फ धीरे-धीरे पाकिस्तान को दी जाने वाली अपनी मदद घटाने लगा है, बल्कि अ़फग़ानिस्तान से सटे कबायली इलाक़ों के बहाने उसने पाकिस्तान में ड्रोन हमले भी तेज कर दिए हैं.

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आइवरी कोस्ट: सत्ता की लड़ाई में पिसी जनता

आइवरी कोस्ट के निर्वाचित राष्ट्रपति अलासान वाएतरा के समर्थक भारी हथियारों के साथ अबिजान में घूम रहे हैं. साथ ही आइवरी कोस्ट में संयुक्त राष्ट्र के हेलीकॉप्टरों ने भी निवर्तमान राष्ट्रपति लोरांग बैग्बो की सेनाओं पर गोलीबारी शुरू कर दी है. आइवरी कोस्ट में पिछले साल 28 नवंबर को हुए चुनावों में राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों, अलासान वाएतरा और लोरांग बैग्बो ने अपनी-अपनी जीत का ऐलान किया था.

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सेना मुग्ध, जनता क्षुब्ध

पहले ट्यूनीशिया, फिर मिस्र के बाद लीबिया में मोअम्मर गद्दा़फी के तानाशाही शासन के विरुद्ध जन विद्रोह भड़का तो लगा कि अब गद्दा़फी का हश्र भी ट्यूनीशिया और मिस्र के शासकों की तरह होगा, लेकिन यहां की कहानी लगातार बदलती जा रही है.

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भारत ने भी तो बीस कैदी छोडे थे

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आस़िफ अली ज़रदारी ने अपने यहां की जेल में 27 वर्ष से बंद भारतीय नागरिक गोपाल दास को रिहा कर भारत पर कोई एहसान नहीं किया है. इसलिए उनके द्वारा इस रिहाई के एवज में शुरू की गई वाहवाही लूटने की कोशिश का कोई औचित्य नहीं है.

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रेमंड को माफी अवाम को मंजूर नहीं

अमेरिकी दूतावास कर्मी रेमंड डेविस की गोली से जब दो पाकिस्तानी नागरिक मारे गए थे तो कट्टरपंथियों ने यह कहते हुए चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया था कि यदि अमेरिका के दबाव में रेमंड की रिहाई हुई तो मुल्क में हुकूमत के विरुद्ध आग भड़क उठेगी, लेकिन रेमंड इस्लामी शरीयत के मुताबिक़ ब्लड मनी देकर रिहा हो गया.

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महंगाई पर मांग और आपूर्ति की मार

महंगाई ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है. अब जो सबसे बड़ा सवाल है, वह यह है कि एक प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के हाथों में देश की कमान होते हुए भी इस समस्या का निदान क्यों नहीं हो रहा है. हालत यह है कि देश के मध्यम एवं निम्न वर्ग के लोगों की ज़िंदगी की गणित गड़बड़ा गई है.

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नेपालः प्रधानमंत्री खनाल और चुनौतियां

देर आए, पर दुरुस्त नहीं. पड़ोसी देश नेपाल में सोलहवें प्रयास के बाद प्रधानमंत्री का चुनाव हुआ. नए प्रधानमंत्री झालानाथ खनाल के लिए यह ताज कितना सुखद होगा, यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन इतना ज़रूर है कि दुविधाओं का जंजाल दूर तक उनका पीछा करता रहेगा.

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बरेली-शाहजहांपुर हादसाः सावधानी हटी, दुर्घटना घटी

सावधानी शासन की, सावधानी प्रशासन की, सावधानी उस व्यवस्था की, जिसका यह आयोजन था. दुर्घटना अल्हड़ नौजवानों की, दुर्घटना देश के भविष्य की, दुर्घटना परिवार के उस चिराग़ की, जिसके भरोसे अंधेरे से उजाले की ओर जाने का सपना देखा गया था.

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लादेन अब मॉस्‍को की मुसीबत बना

सोवियत संघ के बिखरने के बाद बने चेचेन गणराज्य में विद्रोही आज़ाद होने के लिए न स़िर्फ बेचैन हैं, बल्कि वे कुछ भी कर गुज़रने को तैयार हैं. हालांकि चेचेन विद्रोहियों का सबसे बड़ा नेता आरबी बरायोव रूसी सैनिकों के हाथों मारा जा चुका है, फिर भी वहां शांति की स्थापना असंभव लगती है.

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ट्यूनीशिया की ट्यून समझें

अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में अफ़रातफरी का माहौल है. पूरे देश में आपातकाल लागू है. जनता के दबाव में कुर्सी छोड़ने के बाद राष्ट्रपति ज़ैनुल अबेदीन बेन अली अपने परिवार के साथ देश छोड़कर भाग गए हैं. ट्यूनीशियाई जनता अभी भी संतुष्ट नहीं है

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पाकिस्‍तानः संकट में साख

यूं तो विभिन्न मसलों पर पाकिस्तान को अक्सर विश्व मंच पर किरकिरी झेलनी पड़ती है, लेकिन पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या ने इसकी बची-खुची साख को भी संकट में डाल दिया है.

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पाकिस्‍तान की उम्‍मीदों पर रूस का पानी

भारत और रूस के रिश्तों में पिछले 39 वर्षों के बीच आए तमाम उतार-चढ़ावों को देखते हुए पाकिस्तान को यह उम्मीद थी कि अपनी यात्रा के दौरान रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव भारत के प्रति कोई खास दरियादिली नहीं दिखाएंगे, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर रूस द्वारा ज़ोरदार ढंग से भारत की वकालत करने और आतंकवाद पर पाकिस्तान-अ़फग़ानिस्तान को नसीहत देने से पाक की उम्मीदों पर पानी फिर गया है.

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गलत समय पर सही बहस

भले ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सभा के औचित्य के सवाल पर दिया गया अपना बयान वापस ले लिया है, फिर भी इस पर बहस तो छिड़ ही गई है. जिस तरह भारतीय राजनीति का अपराधीकरण, भ्रष्टाचारीकरण व आर्थिकीकरण हो रहा है, उसे देखकर शिवराज सिंह चौहान के बयान को अप्रासंगिक नहीं ठहराया जा सकता.

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यार का प्यार बेशुमार

भारत यात्रा के दौरान सरकोजी ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भी भारत के प्रवेश का समर्थन किया. उन्होंने दुनिया की अस्थिरता के लिए अ़फग़ानिस्तान-पाकिस्तान में पनप रहे आतंकवाद को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने साफ कहा कि फ्रांस भारत का दोस्त है. वह परमाणु उद्योग और प्रदूषण न फैलाने वाली ऊर्जा के विकास में भारत की मदद करेगा.

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कोरियाई जंग के मायने

उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच प्रत्यक्षत: भले ही जंग जारी हो, लेकिन परोक्षत: इसके कई खास मायने हैं. एक तरफ जहां उत्तर कोरिया की मदद के लिए चीन लाठी लिए खड़ा है तो दक्षिण कोरिया का बाल बांका न होने देने के लिए अमेरिका बेचैन है. इसके अलावा उत्तर कोरिया के पीछे रूस है तो दक्षिण कोरिया के पीछे जापान. इस तरह इन दोनों छोटे देशों के बीच छिड़ी लड़ाई का दुष्प्रभाव अमेरिका और चीन पर पड़ सकता है. यानी परदे के पीछे दोनों देशों के रिश्ते में पहले से अधिक खटास बढ़ सकती है. हाल में अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाओं द्वारा संयुक्त सैन्य अभ्यास किया गया था. इससे चिंतित और परेशान उत्तर कोरिया ने एक संदेश भेजकर दक्षिण कोरिया से जानना चाहा कि क्या यह सैन्य अभ्यास उस पर हमले की तैयारी है? इसका कोई जवाब आता, इसके पहले ही उत्तर कोरिया ने बमबारी शुरू कर दी. तबसे तकरार ज़्यादा बढ़ गई है. समझा जा रहा है कि उत्तर कोरिया द्वारा दक्षिण कोरिया पर की गई बमबारी के बाद दुनिया के अन्य देश भी चिंतित हैं. दरअसल, उत्तर और दक्षिण कोरिया की लड़ाई अब स़िर्फ इन दो देशों तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि अब यह चीन और अमेरिका के बीच वर्चस्व की लड़ाई में बदलने लगी है. यही कारण है कि दक्षिण कोरिया पर हमला होते ही अमेरिका ने अपना विमान वाहक युद्धपोत यूएसएस जार्ज वाशिंगटन रवाना कर दिया.

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नार्वे नहीं, सोमालिया की राह पर

दुनिया का सबसे भ्रष्ट देश सोमालिया और सबसे अमीर देश नार्वे है. पिछले वर्ष भारत अमीरी के मामले में 78वें स्थान पर था, इस वर्ष 88वें पर है. यानी अमीरी के मामले में हम दस पायदान पीछे खिसके हैं.

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सुदर्शन का साइड इफेक्‍ट

विदेशी मूल से लेकर पति-सास की हत्या में संलिप्तता के आरोपों से घिरा सोनिया गांधी का कथित लांछनीय सियासी सफर हर दृष्टिकोण से सफल रहा है. यद्यपि उनके विरोधियों ने उक्त आरोपों के सहारे उनके सियासी क़दम को रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन उसका साइड इफेक्ट सोनिया गांधी के अनुकूल रहा.

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डेविड हेडली : भारत बनाम अमेरिका-पाकिस्तान

पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक डेविड हेडली के बारे में परत दर परत जो खुलासे हो रहे हैं, वह निश्चित रूप से चौंकाने वाले हैं. उक्त खुलासे खासकर भारत को सचेत करते हैं कि जिस तरह वह पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकता, उसी तरह उसे अमेरिका को भी संदिग्ध निगाहों से देखना चाहिए.

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चीन पर चले चाबुक

वर्ष 1962 में दिए गए नारे हिंदी चीनी भाई-भाई के बाद भी चीन का भारत के प्रति धोखेबाज़ी का रवैया कायम है. कश्मीर, दलाई लामा और अरुणाचल प्रदेश के मुद्दे पर वह भारत को जब तब झटका देता रहता है, जबकि भारत ने हमेशा तिबब्त और ताइवान के मुद्दों पर चीन की नीतियों का समर्थन किया है. अब भारत को भी चाहिए कि कूटनीतिक चाबुक से चीन को यह एहसास करा दे कि हम किसी से कम नहीं हैं.

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