दंगा मुक्त भारत की ओर

विभाजन के बाद भारत में पहला सांप्रदायिक दंगा 1961 में जबलपुर में हुआ, तबसे दंगों का सिलसिला अनवरत जारी है. 1980 के दशक में सांप्रदायिक हिंसा में ज़बरदस्त बढ़ोत्तरी हुई. विभिन्न समुदायों के बीच शांति एवं सौहार्द स्थापित करने की राह में सांप्रदायिक दंगे बहुत बड़ा रोड़ा बन गए हैं.

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सत्‍य साईं बाबाः आस्था के ज्वार में डोलती तार्किकता की नाव

सत्य साईं बाबा के अवसान ने उनके लाखों अनुयायियों के जीवन में भावनात्मक भूचाल ला दिया है. पुट्टपर्थी में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित एजेंसियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. बाबा को श्रद्धांजलि देने पहुंचे अति महत्वपूर्ण लोगों के लिए समुचित प्रबंध करना कम चुनौतीपूर्ण कार्य नहीं था.

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असमः धरती पुत्रों को बांटने की साजिश

हाल में असम में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा और ख़ासतौर पर नरेंद्र मोदी जैसे पार्टी नेताओं ने जिस मुद्दे को जमकर उछाला, वह था बांग्लाभाषियों, विशेषकर मुसलमानों की असम में कथित घुसपैठ. सांप्रदायिक पार्टियां और संगठन यह झूठा प्रचार कर रहे हैं कि अधिकांश बांग्लाभाषी मुसलमान बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं.

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बाबा रामदेव और भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम

रामदेव वर्तमान में देश के सफलतम बाबा हैं. कोई दूसरा बाबा उन्हें चुनौती देने की स्थिति में नहीं है. बाबा रामदेव का दावा है कि उनके सौ करोड़ अनुयायी हैं. असंख्य लोगों का दावा है कि बाबा की योग चिकित्सा पद्धति से उनके लाइलाज रोग ठीक हुए और उनके स्वास्थ्य में चमत्कारिक सुधार हुआ. बहुत कम समय में बाबा ने अरबों रुपये का व्यापारिक साम्राज्य स्थापित कर लिया.

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सरकारी भूमि पूजन का औचित्या

पुलिस स्टेशनों, बैंकों एवं अन्य शासकीय-अर्द्ध शासकीय कार्यालयों एवं भवनों में हिंदू देवी-

देवताओं की तस्वीरें-मूर्तियां आदि लगी होना आम बात है. सरकारी बसों एवं अन्य वाहनों में भी देवी-देवताओं की तस्वीरें अथवा हिंदू धार्मिक प्रतीक लगे रहते हैं. सरकारी इमारतों, बांधों एवं अन्य परियोजनाओं के शिलान्यास एवं उद्घाटन के अवसर पर हिंदू कर्मकांड किए जाते हैं.

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सरकारी भूमि पूजन का औचित्‍य

पुलिस स्टेशनों, बैंकों एवं अन्य शासकीय-अर्द्ध शासकीय कार्यालयों एवं भवनों में हिंदू देवी- देवताओं की तस्वीरें-मूर्तियां आदि लगी होना आम बात है. सरकारी बसों एवं अन्य वाहनों में भी देवी-देवताओं की तस्वीरें अथवा हिंदू धार्मिक प्रतीक लगे रहते हैं.

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गोधरा फ़ैसला: छलनी से ज्यादा छेद

बीती 22 फ़रवरी को सत्र न्यायालय ने गोधरा रेल आगज़नी मामले में अपना फैसला सुनाया. अदालत ने गुजरात सरकार के इस आरोप को सही ठहराया कि स्थानीय मुसलमानों ने साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगाने का षड्‌यंत्र रचा था. जिन 94 आरोपियों पर मुक़दमा चल रहा था, उनमें से 63 को बरी कर दिया गया और 31 को साज़िश के तहत कारसेवकों को ज़िंदा जलाने का दोषी ठहराया गया

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वाईब्रेंट गुजरात का मिथक

इन दिनों यह मान्यता बहुत तेजी से फैल रही है (या फैलाई जा रही है) कि गुजरात अत्यंत द्रुत गति से प्रगति कर रहा है, वहां शांति एवं सौहार्द का राज है, अल्पसंख्यक ख़ुशहाल हैं और वह जल्दी ही देश का सबसे उन्नत राज्य बन जाएगा. शाइनिंग इंडिया की तर्ज़ पर एक नया शब्द गढ़ा गया है, वाईब्रेंट गुजरात.

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मीठा-मीठा गप, कड़वा-कड़वा थू

गुजरात दंगों की जांच के लिए नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रपट दिसंबर 2010 में उच्चतम न्यायालय को सौंपी. इसके कुछ ही समय बाद देश के एक जाने-माने अख़बार ने अपने पहले पृष्ठ पर एक ख़बर छापी, जिसका शीर्षक था एसआईटी ने मोदी को क्लीन चिट दी.

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अंधश्रद्धा को बढ़ावा देती सरकार

कहते हैं कि आस्था में पर्वतों को डिगाने की क्षमता होती है, परंतु अभी हाल में एक पर्वत आस्था का भार नहीं झेल सका. बीती 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला तीर्थस्थान में हज़ारों श्रद्धालु मकर ज्योति की एक झलक पाने के लिए इकट्ठा थे.

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बिन लादेन और असीमानंद एक ही थैली के चट्टे-बट्टे

साधारण अपराधों की तुलना में आतंकी अपराधों की जांच कहीं अधिक कठिन होती है. इनमें बम फेंकने या गोली चलाने वालों के असली नियंत्रक रहस्य के आवरण में लिपटे रहते हैं और उन तक पहुंचना आसान नहीं होता.

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तर्कसंगत प्रश्न उठाना देशद्रोह नहीं

मुंबई पर 26/11 का आतंकी हमला, एक से अधिक अर्थों में भारत पर हुआ सबसे भयावह आतंकी हमला था. इस हमले में हेमंत करकरे, जो मालेगांव बम विस्फोट की तह तक पहुंच गए थे, भी मारे गए थे. करकरे की हत्या इस हमले का एक रहस्यपूर्ण पहलू थी.

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सांप्रदायिकता विरोधी गर्जनाः केवल बातों से काम नहीं चलेगा

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित विशेष कांग्रेस अधिवेशन को संबोधित करते हुए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सांप्रदायिक ताक़तों पर कटु हमला किया. उन्होंने कहा कि वे सभी संगठन, विचारधाराएं एवं व्यक्ति, जो हमारे इतिहास को तोड़ते-मरोड़ते हैं, धार्मिक पूर्वाग्रहों को हवा देते हैं और धर्म के नाम पर आमजनों को हिंसा करने के लिए उकसाते हैं, देश के लिए विनाशकारी हैं.

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संघ, अयोध्या निर्णय व भारतीय राष्ट्रवाद

अयोध्या निर्णय की जिन आधारों पर आलोचना की जा रही है, उनमें से कुछ हैं, ज़मीन के मालिकाना हक़ संबंधी मूल मुद्दे की उपेक्षा व 23 दिसंबर, 1949 की आधी रात को मस्जिद के अंदर रामलला की मूर्तियों की स्थापना और 6 दिसंबर 1992 को संघ परिवार द्वारा मस्जिद को ढहाए जाने के घोर अवैधानिक व अनैतिक कृत्यों को नज़रअंदाज़ किया जाना.

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कश्मीरियों की व्यथा कब तक अनसुनी की जाएगी

अरुंधति राय के इस वक्तव्य कि कश्मीर भारत का अविभाज्य हिस्सा नहीं है, पर काफी बवाल मचा. भाजपा ने मांग की कि अरुंधति के ख़िला़फ देशद्रोह का मुक़दमा क़ायम किया जाना चाहिए. भाजपा महिला मोर्चा के सदस्यों ने उनके दिल्ली स्थित निवास में तोड़फोड़ की और बजरंग दल ने उन्हें कई तरह की धमकियां दीं.

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हमारा गणतंत्र कहां जा रहा है?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद प्रकरण में सुनाया गया हालिया निर्णय भारत के न्यायिक इतिहास में एक मील का पत्थर है. एक अर्थ में यह बाबरी मस्जिद को ढहाए जाने की घटना का समापन पर्व है, क्योंकि अदालत ने इस ग़ैर क़ानूनी कृत्य को विधिक स्वीकृति प्रदान कर दी है.

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अमेरिका: शांति स्थापना की कोशिशों की दरकार

संयुक्त राज्य अमेरिका ने सभ्य समाज के काफी रूप-गुण विकसित कर लिए हैं. अमेरिकी समाज विकास और बदलाव के एक लंबे दौर से गुजरा है. उसने अंतर्धार्मिक एवं अंतर्सांस्कृतिक रिश्तों का रंगोली मॉडल अपनाया है.

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अयोध्या निर्णय: गुनाह करो, ईनाम पाओ

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने अयोध्या मामले में 30 सितंबर 2010 को फैसला सुनाया. आशंकाओं के विपरीत उस दिन और उसके बाद देश में कहीं हिंसा नहीं हुई. इसका श्रेय आमजनों की परिपक्व सोच को जाता है. जहां तक इस निर्णय का सवाल है, यह तीनों पक्षकारों यानी रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा एवं सुन्नी व़क्फ बोर्ड के बीच संतुलन क़ायम करने की कवायद के अलावा कुछ नहीं है.

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आतंकवादः भगवा, हरा या काला?

क्‍या आतंकवाद पर कोई लेबिल चस्पा किया जा सकता है? क्या आतंकवाद को किसी रंग से जोड़ा जा सकता है, विशेषकर किसी ऐसे रंग से, जो समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हो? इस बहस की शुरुआत हुई केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम के एक वक्तव्य से.

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हिंदू आतंकवाद शब्द अनुचित

जब से प्रज्ञा सिंह ठाकुर एवं दयानंद पांडे आदि द्वारा आतंकी हमलों की साजिश रचने और उन्हें अंजाम देने की ख़बरें सामने आई हैं, तबसे हिंदू आतंकवाद शब्द आम प्रचलन में आ गया है. विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई जांच से यह पता लगा है कि हिंदू राष्ट्र एवं हिंदुत्व की विचारधारा से प्रेरित उक्त संगठन मालेगांव, मक्का मस्जिद, अजमेर, गोवा एवं समझौता एक्सप्रेस धमाकों के पीछे हो सकते हैं.

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अयोध्या राम और रहीम दोनों का घर

वर्ष 1992 का 6 दिसंबर भारत के लिए एक अत्यंत त्रासद दिन था. उस दिन 450 साल पुरानी ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद को संघ परिवार (आरएसएस, भाजपा, विहिप, बजरंग दल आदि) ने ढहा दिया. मस्जिद के स्थान पर तुरत-फुरत एक कामचलाऊ मंदिर खड़ा कर दिया गया.

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