बुंदेलखंडः बसपा में कलह

उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड सु़र्खियों में है. वोटों की महाभारत में सबकी नज़र बुंदेली भूमि पर है. वर्ष 1987 के राठ विधानसभा उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी सूबे में पहली बार दूसरे नंबर पर आई थी. यहीं से बुंदेलखंड में बसपा के पैर जमने शुरू हुए और आज वह सत्ता में है. लेकिन अब बसपा में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं है.

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बुंदेलखंडः फटती धरती, कांपते लोग

बुंदेलखंड में बेतरतीब ढंग से खनन और भूजल दोहन के चलते ख़तरे की घंटी बज चुकी है. हमीरपुर में सबसे अधिक 41 हज़ार 779 हेक्टेयर मीटर प्रतिवर्ष भूजल दोहन हो रहा है. महोबा, ललितपुर एवं चित्रकूट में खनन मा़फ़िया नियम-क़ायदों को तिलांजलि देकर पहाड़ के पहाड़ समतल भूमि में बदल रहे हैं.

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इंदिरा आवास योजनाः जहां देखो वहां घपला

विकास का पहिया राजनीति के मकड़ जाल में उलझ कर आम आदमी के लिए कैसे परेशानियां पैदा करता है, इसे उत्तर प्रदेश में रहने वाले ग़रीबों से ज़्यादा कौन समझ सकता है. 1980 में ग्रामीण आवास कार्यक्रम के तहत शुरू की गई इंदिरा आवास योजना अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नज़र आ रही है. केंद्र द्वारा मिलने वाले बजट से चल रही यह योजना राजनीतिक नामकरण के चलते प्रशासनिक उपेक्षा का दंश सहने को मजबूर है.

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बुंदेलखंड : पैकेज के बावजूद बदहाली बरकरार

देश के बीमारू राज्यों में शुमार उत्तर प्रदेश के सात ज़िलों में फैला बुंदेलखंड आज भी जल, ज़मीन और जीने के लिए तड़पते लोगों का केंद्र बना हुआ है. रोज़ी-रोटी और पानी की विकट समस्या से त्रस्त लोग पलायन के लिए मजबूर हैं. प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का आठवां हिस्सा खुद में समेटे यह समूचा अंचल भूमि के उपयोग-वितरण, सिंचाई, उत्पादन, सूखा, बाढ़ और आजीविका जैसे तमाम मामलों में बहुत पीछे है.

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मरती नदियां, उजड़ता बुंदेलखंड

चंबल, नर्मदा, यमुना और टोंस आदि नदियों की सीमाओं में बसने वाला क्षेत्र बुंदेलखंड तेज़ी से रेगिस्तान बनने की दिशा में अग्रसर है. केन और बेतवा को जोड़कर इस क्षेत्र में पानी लाने की योजना मुश्किलों में फंस गई है. जो चंदेलकालीन हज़ारों तालाब बुंदेलखंड के भूगर्भ जल स्रोतों को मज़बूती प्रदान करते थे, वे पिछले दो दशकों के दौरान भू-मा़फिया की भेंट चढ़ गए हैं.

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वादों का मारा बुंदेलखंड

बुंदेलखंड में चित्रकूट के घाट पर न तो संतों की भीड़ है और न चंदन घिसने के लिए तुलसीदास जी हैं. हां, बुंदेलखंड की व्यथा सुनने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ज़रूर बांदा आए. उन्होंने पानी की सुविधा के लिए दो सौ करोड़ रुपये देने का वादा करके आंसू पोंछने की कोशिश की है, लेकिन यहां की जनता के दु:ख-दर्द दूर होते नज़र नहीं आ रहे हैं.

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उत्तर प्रदेश: माओवादियों की दस्तक

सोनभद्र एवं चंदौसी के बाद अब माओवादी कौशांबी, फतेहपुर, चित्रकूट एवं महोबा आदि जनपदों में भी दस्तक देने लगे हैं. चित्रकूट में जल, जंगल और ज़मीन पर दबंगों के क़ब्ज़े के कारण हालात गंभीर हो गए हैं. सरकार की भूमिका बड़े जमीदारों जैसी हो गई है. सरकार ने सीलन एक्ट को शहरी क्षेत्र में अप्रभावी बनाकर उद्योगपतियों को भूमि लूटने की खुली छूट दे रखी है.

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घटता पानी, बढ़ती प्यास

बेतवा, शहजाद, केन, धसान, मंदाकिनी, यमुना, जामनी, एवं सजनाम जैसी सदा नीरा नदियां होने के बावजूद पानी के लिए तरस रहे लोगों के दर्द को समझना बड़ा कठिन है. बुंदेलखंड में जल युद्ध होने से कोई रोक नहीं सकता.

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अंबेडकर गाँव : कहीं धूप कहीं छांव

बहुजन समाज पार्टी की मुखिया एवं उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने 2012 का चुनावी रण जीतने के लिए एक बार फिर कांशीराम आवास योजना का तड़का लगाया है और वह अब तक 72 ज़िलों का दौरा कर चुकी हैं. अनुसूचित जाति और जनजाति बहुल गांवों के अंबेडकर ग्राम के रूप में समग्र विकास की परिकल्पना कितनी हक़ीक़त है, कितना फसाना, यह सामने आने लगा है.

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पतंगबाजी पर आधुनिकता की मार

उड़ी-उड़ी रे पतंग, उड़ी-उड़ी रे…जैसे गीत भले ही सदाबहार हों, लेकिन अब नवाबों की नगरी लखनऊ में पतंगबाज़ी की परंपरा लगभग ख़त्म होती जा रही है. पिछले दिनों यहां पतंग के मांझे से एक व्यक्ति की आंख चोटिल होने से पतंगबाज़ी के प्रति लोगों में भय व्याप्त हो गया है.

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योजना और स्‍वास्‍थ्‍य दोनों से खिलवाड़

उत्तर प्रदेश में पांच वर्ष पूर्व लागू राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना में कार्ड बनवाने से लेकर इलाज कराने तक की राह में रोड़े ही रोड़े नज़र आ रहे हैं. ग्राम्य विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावे धराशाई होते नज़र आ रहे हैं, क्योंकि इस योजना का उद्देश्य था अनौपाचारिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाली प्रणाली को सुनिश्चित करना लेकिन इतने वर्षों के बाद भी यह योजना जनमानस को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में नाक़ाम रही है.

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संडीला गैस कांडः गैस नहीं थी, वर्ना भोपाल बन जाता

संडीला के औद्योगिक क्षेत्र में ब्रिक फील्ड में हुई गैस के रिसाव के कारण कई लोगों की जान चली गई तो कई घायल हो गए. यह घटना भी दिसंबर 1984 में घटित भोपाल गैस त्रासदी के बराबर ही थी, जिसमें हज़ारों लोगों की जान चली गई थी.

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उत्तर प्रदेश बना मूर्ति तस्‍करों का स्‍वर्ग

राजधानी लखनऊ में 22 जनवरी 2011 को अलीगंज पुलिस ने महात्मा बुद्ध की दुर्लभ मूर्ति की तस्करी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को पकड़ कर ढाई किलो वजनी मूर्ति बरामद करने में स़फलता पाई.

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उत्तर प्रदेशः तस्‍करों के निशाने पर कछुए

भगवान विष्णु ने भले ही कच्छप अवतार लेकर पृथ्वी की रक्षा की हो, लेकिन पृथ्वी पर निवास करने वाले लोग अपने स्वार्थों के चलते कछुओं को बड़ी तेज़ी से खत्म करते जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश में कछुओं पर संकट के बादल मड़रा रहे हैं.

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राहुल की सक्रियता से बसपा परेशान

उत्तर प्रदेश का लक्ष्य भेदने के लिए 125 वर्ष पुरानी कांग्रेस पार्टी ने अपने युवराज राहुल गांधी को जंग के मैदान में सेनापति के रूप में उभारने का मन बना लिया है. कांग्रेस बड़ी ही सोची समझी रणनीति के तहत शतरंज की विसात सोच समझ कर बिछा रही है.

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भूमि अधिग्रहण के खिलाफः बुंदेलखंउ के किसान लामबंद

यह स़िर्फ संयोग नहीं है कि पूरे उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण के खिला़फ उठती आवाज़ें आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो रही हैं. अधिग्रहण क्षेत्र से किसानों का हालचाल लेकर लौटे लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघु ठाकुर कहते हैं कि कॉरपोरेट पूंजीवाद ने ज़मीन हड़पने और इसे अधिक से अधिक पैसा कमाने का एक शॉर्टकट रास्ता खोज लिया है.

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एलडीएः लूटो, डाका डालो अथॉरिटी

लखनऊ डेवलपमेंट अथॉरटी को राजधानी के नागरिक लूटो डाका डालो अथॉरटी के नाम से पुकारते हैं. इस नाम पर ऐतराज हो सकता है, पर सच से रूबरू होते ही हर कोई मानने को तैयार हो जाता है कि यह नाम सटीक है

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पारीछा थर्मल पावर प्रोजेक्‍ट राख ने नर्क बना दी जिंदगी

बुंदेलखंड के वाशिंदों को विकास के नाम पर विनाश के भंवर जाल में उलझाने का खेल खेला जा रहा है. झांसी मुख्यालय से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पारीछा थर्मल पावर स्टेशन की गगनचुंबी चिमनियों से निकलने वाली राख ने आसपास के गांवों में रहने वाले हज़ारों लोगों की ज़िंदगी नर्क कर दी है.

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हाहाकार करता किसान

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाक़ों में खाद-बीज को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. गोरखपुर-देवरिया मार्ग पर चौरीचौरा स्थित कृषक भारती सेवा केंद्र पर खाद-बीज न बांटे जाने से आक्रोशित किसानों ने रास्ता जाम कर दिया. पुलिस ने किसानों पर लाठियां भांजी, जिससे कई किसानों को चोटें आईं. किसानों का आरोप है कि खाद-बीज की कालाबाज़ारी की जा रही है. यही हाल सिकरीगंज बेलघाट ब्लॉक के साधन सहकारी समिति कोटियां बिशुनी का है. किसान राधेश्याम, संतोष, रमाशंकर, अमरजीत, बलवंत, जयप्रकाश, संगम, रविंद्र प्रताप सिंह आदि का कहना है कि डेहरा टीकर न्याय पंचायत में कम से कम चार ट्रक खाद और चाहिए. पिपराइच क्षेत्र के गोदामों में पर्याप्त खाद होने के बाद भी ताले लटक रहे हैं.

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विलुप्‍त हो गई जड़ी-बूटियां

सैकड़ों वर्ष पूर्व पृथ्वी से विलुप्त हो चुका सोमवल्ली का पौधा एक बार फिर मध्य प्रदेश के रीवा के जंगलों में खोज निकाला गया है. यह पौधा प्राचीन ग्रंथों और वेद पुराणों में चिरायु बनाने के लिए वर्णित है. यद्यपि यह एक उपलब्धि है, लेकिन सरकारी लापरवाही के चलते अनेक दुर्लभ पौधे और जड़ी बूटियां विलुप्त होने की कगार पर हैं.

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बंदरों का आतंक

उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद में थाना बेनीगंज अंतर्गत ग्राम सिकंदरपुर के निकट एक खेत में एक साथ नौ बंदर मृत पाए गए. बंदरों की मौत की ख़बर लगते ही सैकड़ों लोगों की भीड़ एकत्र हो गई. अयोध्या फैसले को लेकर चौकन्नी पुलिस ने किसी अनहोनी से पहले मामला रफा-दफा कर दिया, लेकिन बंदरों की लगातार बढ़ती संख्या शहर के लोगों के लिए सिरदर्द बन गई है.

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चंदेरी साड़ी उद्योगः कब दूर होगी बुनकरों की बदहाली

मध्य प्रदेश के चंदेरी की हथकरघा कला जो देखता है, वही कायल हो जाता है, लेकिन इससे जुड़ा दूसरा सच यह है कि चंदेरी साड़ी उद्योग जैसे-जैसे व्यवसायिक गति पकड़ता जा रहा है, परंपरागत साड़ियां लुप्त होती जा रही हैं. चंदेरी के बुनकर कम समय में कम लागत की अधिक बिकने वाली साड़ियां बनाने में अधिक रुचि ले रहे हैं.

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उत्तर प्रदेशः माफिया के हवाले स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर माफियाओं का एकछत्र राज कायम है. स्वास्थ्य सेवाओं से संबद्ध सरकारी संस्थाओं और निजी कंपनियों का गठजोड़ इतना सघन हो गया है कि राजधानी लखनऊ में डेंगू से ताबड़तोड़ हुईं कई मौतों के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ को बीमारी की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को अदालत में तलब करना पड़ा.

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उत्तर प्रदेशः प्राथमिक शिक्षा की तस्‍वीर नहीं बदली

सिर्फ 5200 रुपये में बेच डाला स्कूल पढ़कर आपको आश्चर्य होगा, लेकिन जनपद सुल्तानपुर के गौरीगंज इलाक़े के भटगवां प्राइमरी स्कूल भवन को ग्रामप्रधान ने बेसिक शिक्षा विभाग को सूचना दिए बिना 5200 रुपये में बेचकर जता दिया है कि प्रदेश में शिक्षा का क्या हाल है. वर्ष 2008 की यह घटना जब प्रकाश में आई तो बेसिक शिक्षा विभाग को सांप सूंघ गया.

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जिधर देखो उधर मिलावट

बनारस की शान और लबों पर सुर्ख़ी लाने वाले पान में अब कत्थे के स्थान पर गैम्बियर का इस्तेमाल खुलेआम हो रहा है. उत्तर प्रदेश में जनवरी से मई 2010 तक 51 स्थानों पर छापे मारकर सैकड़ों नमूने लिए गए. जिनमें से 19 नमूनों में गैम्बियर पाए जाने पर सरकार ने संबंधित लोगों के ख़िला़फ कार्यवाही के आदेश दिए हैं.

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एड्स की चपेट में मऊ

पूर्वांचल का मऊ जनपद एड्‌स का गढ़ बनता जा रहा है. यहां एचआईवी पॉज़ीटिव लोगों की संख्या 523 हो गई है. इनमें 28 मरीज ऐसे हैं, जो लम्हा-लम्हा मौत की ओर बढ़ रहे हैं. जांच कराने वालों में पुरुषों और महिलाओं का अनुपात बराबर है. बताया यह जा रहा है कि बहुत से पीड़ित तो दीगर जनपदों में अपना इलाज करा रहे हैं.

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मुस्लिम वोटों पर सबकी नजर

उत्तर प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए राजनीतिक दलों में मुस्लिम कार्ड खेलने की होड़ मच गई है. कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह आजमगढ़ के संजरपुर पहुंच कर बाटला हाउस एनकाउंटर पर सवाल खड़ा करके मुस्लिम समाज को लामबंद करने की कोशिश कर चुके हैं.

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कराहती नदियां

कभी जीवनदायिनी रहीं हमारी पवित्र नदियां आज कूड़ा घर बन जाने से कराह रही हैं, दम तोड़ रही हैं. गंगा, यमुना, घाघरा, बेतवा, सरयू, गोमती, काली, आमी, राप्ती, केन एवं मंदाकिनी आदि नदियों के सामने ख़ुद का अस्तित्व बरकरार रखने की चिंता उत्पन्न हो गई है.

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उत्तर प्रदेशः बेहाल है जननी सुरक्षा योजना

उत्तर प्रदेश में जननी सुरक्षा योजना का हाल-बेहाल है. प्रसव केंद्र के बाहर सड़क पर महिलाएं बच्चा जनने को मजबूर हैं. यह हाल तब है जबकि यहां की मुख्यमंत्री महिला है. प्रदेश के 3424 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर केवल 32 महिला डॉक्टर तैनात हैं, जबकि पांच हज़ार से अधिक पुरुष डॉक्टर हैं.

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गायब होती वरक कला चांदी का फ्राड वर्क

मिठाई पर चांदी के वरक के नाम पर जहर चढ़ाया जा रहा है. मिठाई खाने वाले को जब बीमारी पूरी तरह जकड़ लेती है, तब उसे पता चलता है कि मिठाई की सौगात रोग लेकर आई है. लखनऊ की नजाकत-नफासत के बीच परंपरा की थाती की याद दिलाते हथौड़ों की धुन चौक की एक तंग गली में गूंजती रहती है.

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