चौंकाने वाले होंगे चुनाव परिणाम

सोलहवीं लोकसभा के लिए पूर्वोत्तर के राज्यों में चुनाव बेहद नज़दीक हैं. सभी राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम का

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बदल सकता है पूर्वोत्तर का सियासी समीकरण

पश्‍चिम बंगाल, जिसे वामदलों का अभेद्य दुर्ग समझा जाता था, लेकिन वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख

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संघर्ष की एक ईमानदार कथा

32वर्षीय एम सी मैरी कॉम की आत्मकथा-अनब्रिकेबल:एन ऑटोबायोग्राफी पढ़ने के बाद मुझे बहुत खुशी हुई. आश्‍चर्य भी महसूस हुआ, क्योंकि

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क्षेत्रीय राजनीति का नया प्रयोग

पूर्वोत्तर की लगभग सभी प्रादेशिक पार्टियों ने मिलकर नॉर्थ ईस्ट रीजनल पॉलिटिकल फ्रंट का गठन किया है. 20 अक्टूबर को

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अफसपा का हो रहा है गलत इस्तेमाल

मणिपुर में आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट (अफसपा) वर्षों से लागू है, जिसकी आ़ड में सुरक्षा बल फर्जी मुठभे़डों को

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विशेषांक?: पूर्वोतर छात्र मिलन समारोह : हिंदी विद्यापीठ पत्रिका

हिंदी विद्यापीठ पत्रिका झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी वैद्यनाथ देवघर से निकलने वाली एक स्तरीय त्रैमासिक शोध पत्रिका है. इस पत्रिका

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ज़िंदगी से प्यार करती हूँ-जीना चाहती हूँ

अगर आप आयरन लेडी इरोम शर्मिला को देखकर नहीं पिघलते और आपको शर्म नहीं आती, तो फिर आपको आत्म-निरीक्षण की

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क्या इस समर्पण से शांति आएगी

यूं तो पूर्वोत्तर में कार्यरत अधिकतर अलगाववादी संगठन धीरे-धीरे शांति के रास्ते पर आने के लिए तैयार हो रहे हैं

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मैरी कॉम पर आधारित फिल्‍म जोड़ पाएगी दिलों की?

मणिपुर में पीपुल लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की राजनीतिक शाखा रिबोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ) ने हिंदी फिल्मों के प्रदर्शन और हिंदी चैनल पर हिंदी फिल्मों के प्रसारण पर सितंबर 2000 से प्रतिबंध लगाया हुआ है. उनका मानना है कि हिंदी फिल्में मणिपुरी कल्चर को बिगाड़ती हैं. इससे यहां के लोगों की मानसिकता दूषित होती है. इसी प्रतिबंध के कारण 15-18 अप्रैल, 2012 को इंफाल में आयोजित इंटरनेशनल सोर्ट फिल्म फेस्टिवल में 18 हिंदी फिल्मों को नहीं दिखाया गया था.

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मणिपुर जमीन की एक लड़ाई यहां भी

क्या पूर्वोत्तर को तभी याद किया जाएगा, जब कोई सांप्रदायिक हिंसा होगी, जब लोगों का खून पानी बनकर बहेगा? या तब भी उनके संघर्ष को वह जगह मिलेगी, उनकी आवाज़ सुनी-सुनाई जाएगी, जब वे अपने जल, जंगल एवं ज़मीन की लड़ाई के लिए शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध करेंगे? मणिपुर में तेल उत्खनन के मसले पर जारी जनसंघर्ष की धमक आखिर तथाकथित भारतीय मीडिया में क्यों नहीं सुनाई दे रही है? एस बिजेन सिंह की खास रिपोर्ट :-

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असम : क्‍यों भड़की नफरत की आग

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का संसदीय क्षेत्र असम एक के बाद एक, कई घटनाओं के चलते इन दिनों लगातार सुर्खियों में है. महिला विधायक की सरेआम पिटाई, एक लड़की के साथ छेड़खानी और अब दो समुदायों के बीच हिंसा. कई दिनों तक लोग मरते रहे, घर जलते रहे. राज्य के मुख्यमंत्री केंद्र सरकार का मुंह ताकते रहे और हिंसा की चपेट में आए लोग उनकी तऱफ, लेकिन सेना के हाथ बंधे थे.

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प्रधानमंत्री की म्यांमार यात्रा पूर्वोत्तर के लिए बेहद अहम

करीब 25 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने म्यांमार की यात्रा की. इस यात्रा से उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लोगों को काफी अपेक्षाएं थीं, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र होने की वजह से इसे जो फायदा इस यात्रा से होने की उम्मीद थी, वह नहीं हुआ.करीब 25 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने म्यांमार की यात्रा की. इस यात्रा से उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लोगों को काफी अपेक्षाएं थीं, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र होने की वजह से इसे जो फायदा इस यात्रा से होने की उम्मीद थी, वह नहीं हुआ.करीब 25 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने म्यांमार की यात्रा की. इस यात्रा से उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लोगों को काफी अपेक्षाएं थीं, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र होने की वजह से इसे जो फायदा इस यात्रा से होने की उम्मीद थी, वह नहीं हुआ.

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प्रधानमंत्री का मणिपुर दौरा : जनता के ज़ख़्मों पर विकास का मरहम

बीते एक अगस्त से मणिपुर के दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-39 एवं 53) पर यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) ने आर्थिक नाकेबंदी कर रखी थी. इस 100 दिनों की बंदी ने यहां के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया. हर वस्तु के दाम आसमान छूने लगे.

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श्रध्दांजलिः भूपेन दा हमेशा याद रहेंगे

भारत के लाखों दिलों की धड़कन एवं असम की मधुर आवाज़, डॉ. भूपेन हजारिका का बीते पांच नवंबर को निधन हो गया. भूपेन दा असम के जन सांस्कृतिक राजा का नाम है, जो हमारे दिल पर राज करता रहा, जिसकी आवाज़ हमें मंत्रमुग्ध करती रही.

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क्रांति को प्रेम से क्या ख़तरा है

क्रांति और प्रेम एक सिक्के के दो पहलू हैं. क्रांति प्रेम से ही पनपती है. दुनिया की बड़ी-बड़ी क्रांतियां प्रेम की वजह से ही हुई हैं. चाहे देश प्रेम हो या फिर किसी के प्रति प्रेम. ऐसे में एक क्रांतिकारी को प्रेम हो जाए तो इसमें ग़लत क्या है?

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मणिपुर जातीय तनाव की चपेट में

सदर हिल्स डिस्ट्रिक की मांग धीरे-धीरे तूल पकड़ रही है. लोग सड़क पर उतर रहे हैं. महिलाएं और बच्चे भी इसमें शामिल हो रहे हैं. शांति व्यवस्था प्रभावित हो रही है. कई गाड़ियां जलाई गईं, एनएच 53 के बीचोंबीच खुदाई कर रखी है. पेसेंजर बस सेनापति ज़िले में फंसी रही. सामान लाने वाली गाड़ियां सिक्युरिटी द्वारा कोहिमा से उख्रूल ज़िले के जेसामी होते हुए इंफाल लाई जा रही हैं.

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हिंदी की उपेक्षा क्यों और कब तक

हिंदी, हिंद और हम, एक हिंदुस्तानी की पहचान इससे ज़्यादा और क्या हो सकती है, लेकिन जिस पहचान को दुनिया मानती है, जानती है, उसे हमारी अपनी सरकार मानने को तैयार नहीं है. शायद तभी केंद्र सरकार ने खुलकर और आधिकारिक तौर पर कह दिया है कि हिंदी इस देश की राष्ट्रभाषा नहीं है.

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गोगोई की जीत ने कांग्रेस की लाज रख ली

एक्जिट पोल से पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि असम में कांग्रेस को अपनी सरकार बचाने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और तरुण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार तीसरी बार सत्ता में वापस आ गई. असम को लेकर एक सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि तरुण गोगोई तीसरी बार कांग्रेस को जिता ले गए.

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खांडू की मौत से उपजे सवाल

बीते 30 अप्रैल को हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू की असामयिक मृत्यु हो गई. इससे भी ज़्यादा दु:ख की बात यह है कि इस तरह की दुर्घटनाएं बार-बार हो रही हैं.

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मणिपुर की दर्दभरी कहानी

अगर आप पूर्वोत्तर भारत को क़रीब से जानना-समझना चाहते हैं तो डॉ. लाल बहादुर वर्मा द्वारा लिखित उपन्यास उत्तर पूर्व आपके लिए एक बेहतर मददगार साबित हो सकता है. यह डॉ. वर्मा की वह जीवंत कृति है, जिसमें मणिपुर का इतिहास, संस्कृति, समाज एवं राजनीति सब कुछ है. उत्तर पूर्व का मुख्य आधार ही मणिपुर है. मणिपुर यूनिवर्सिटी के इर्द-गिर्द बुने इस उपन्यास की शुरुआत में थांगजम मनोरमा को समर्पित एक कविता भी है. जुलाई, 2004 में बलात्कार के बाद मनोरमा की हत्या कर दी गई थी और इसका आरोप भारतीय सेना के जवानों पर लगा था.

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मणिपुरः इंडिया का स्‍पोर्ट्सवेल्‍थ

राष्ट्रमंडल खेलों में मणिपुर का जलवा सबने देखा. जिस अंदाज़ में इस राज्य के खिलाड़ियों ने पदक पर पदक जीते, उसे देखते हुए इस राज्य को स्पोर्ट्‌स का पावर हाउस कहना ग़लत नहीं होगा. भले ही मणिपुर आतंकवाद और अभावों से ग्रस्त हो, फिर भी देश की शान बढ़ाने में यहां के खिलाड़ियों ने कोई कोर-कसर बाक़ी नहीं रखी.

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