महाकवि आर सी प्रसाद सिंह: अपनी ही धरती पर गुमनाम

हिन्दी साहित्य के छायावाद काल के द्वितीय चरण में गोपाल सिंह नेपाली, हरिवंश राय बच्चन, जानकी बल्लभ शास्त्री के समकालीन थे महाकवि आर सी प्रसाद सिंह, लेकिन साहित्य जगत में अपनी अमिट छाप छोड़ चुके कविवर आरसी के साथ किसी ने न्याय नहीं किया.

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अतिक्रमण से क्‍लब का अस्तित्‍व खतरे में

समस्तीपुर ज़िला मुख्यालय में आज़ादी के पहले से चले आ रहे समस्तीपुर क्लब की क़ीमती ज़मीन पर किए गए क़ब्ज़े से इसकी हालत का़फी बदतर हो गई है. अंग्रेजी शासनकाल से ही शहर में यूरोपियन क्लब चलता था, बाद में जिसका नाम समस्तीपुर क्लब कर दिया गया.

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मिथिलांचलः सामा चकेबा की धूम

मिथिलांचल में छठ पर्व की समाप्ति के बाद भाई-बहन के अटूट प्रेम के प्रतीक लोकपर्व सामा चकेबा मनाने की पुरानी परंपरा आज भी कायम है. कार्तिक पूर्णिमा तक सामा चकेबा के सुमधुर गीतों से मिथिलांचल का चप्पा-चप्पा गूंजने लगता है.

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समस्‍तीपुरः इतिहास खुद को दोहराएगा

15वें विधानसभा चुनाव में ज़िले के सभी दस विधानसभा क्षेत्रों में खड़े दिग्गज, दबंग, बाहुबली और 127 निर्दलीय प्रत्याशियों की क़िस्मत अगले 24 नवंबर को खुलने वाली है.

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समस्‍तीपुरः आर-पार की लड़ाई में फंसे महारथी

समस्तीपुर के 10 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले मतदान के लिए सत्तारूढ़ जदयू-भाजपा गठबंधन जहां प्रमुख विपक्षी राजद-लोजपा गठबंधन से आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गया है, वहीं कांग्रेस भी लालू-रामविलास से अलग होकर इस बार सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार कर चुनावी संग्राम को त्रिकोणीय बनाने के लिए प्रयासरत है.

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समस्‍तीपुरः अनुकंपा की राजनीति हावी

उत्तर बिहार का प्रमुख ज़िला समस्तीपुर पिछड़ा एवं दलित बाहुल्य क्षेत्र होने के साथ ही समाजवादियों के गढ़ के रूप में चर्चित रहा है. लोकसभा और विधानसभा चुनावों में यहां से समाजवादी विचारक ही बाज़ी मारते आए हैं. वे चाहे जिस जाति-समुदाय के हों, मतदाताओं ने कई दिग्गज प्रत्याशियों को परास्त कर साधारण प्रत्याशियों को जिताने का काम किया.

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समस्‍तीपुरः राजद के सामने किला बचाने की चुनौती

उत्तर बिहार के प्रमुख राजनीतिक केंद्र समस्तीपुर में विधानसभा चुनाव के लिए उतर रहे दिग्गजों ने आर-पार की लड़ाई का शंखनाद कर दिया है. समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे पूर्व शिक्षा मंत्री अशोक सिंह द्वारा नीतीश कुमार का तीर छोड़ लालू प्रसाद की लालटेन थाम लेने और राजद विधायक रामलखन महतो द्वारा लालटेन छोड़ तीर थाम लेने से ज़िले की राजनीति में हलचल मच गई है.

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जागरण में गिन्‍नी का जलवा

हर ताला खुले, हर खुशियां मिले, एक जयमाता की चाभी से… बेबी गिन्नी के सुरीले गले से ये बोल फुटते ही जहां दर्शक एवं श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते हैं, वहीं इस बाल कलाकार के पिता व जागरण सम्राट के नाम से मशहूर सरदार धर्मेंद्र सिंह के अरमान भी पूरे होते दिखाई पड़ते हैं. मां गुरमीत कौर भी काफी खुश हैं.

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समाजवादियों के गढ़ में होगी कांटे की टक्कर

सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र इन दिनों चुनावी बुखार में तपने लगा है. पुराने चेहरों के साथ कई नए चेहरों की फौज जनता की अदालत में गुहार लगाते घूम रही है. सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र शुरू से ही समाजवादियों के गढ़ के रूप में जाना जाता है, जहां से समाजवादी नेता स्व. रामविलास मिश्र, रामाश्रय साहनी एवं रामचंद्र सिंह निशाद चुनाव जीतते रहे हैं.

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ज़िला बनाने वाले ही विधानसभा जाएंगे

रोसड़ा विधानसभा (सु.) क्षेत्र में चुनावी हवा इन दिनों तेज़ हो गई है. नए परिसीमन के अंतर्गत रोसड़ा विधानसभा क्षेत्र को सामान्य से सुरक्षित कर दिए जाने के बाद से मौजूदा राजद विधायक गजेंद्र प्रसाद सिंह नए क्षेत्र की तालाश में जुट गए हैं. गजेंद्र की जगह लेने के लिए यहां दिग्गज नेताओं ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है.

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कसौटी पर वामपंथियों की ताक़त

समस्तीपुर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वास यात्रा पर आने के बाद से ज़िले की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज़ हो गई है. मुख्यमंत्री की विश्वास यात्रा का सबसे ज़्यादा असर ज़िले के लेनिनग्राद कहे जाने वाले विभूतिपुर विधानसभा में पड़ा है. यहीं से मौजूदा सीपीएम के विधायक रामदेव वर्मा छह बार विधानसभा चुनाव जीते हैं.

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हसनपुर विधानसभा में चुनावी तपिश बढ़ी

समस्तीपुर क्षेत्र के बाद हसनपुर क्षेत्र की गिनती प्रतिष्ठित क्षेत्रों में होती है. इसका कारण है समस्तीपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले जननायक कर्पूरी ठाकुर ने बिहार के मुख्यमंत्री पद को सुशोभित किया, वहीं हसनपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक गजेंद्र प्रसाद हिमांशु बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष पद को सुशोभित कर चुके हैं.

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कर्पूरी स्‍मृति भवन को कर्पूरी की प्रतिमा का इंतजार

समाजवादी चिंतक, ग़रीबों के मसीहा, गुदड़ी के लाल एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की जन्मस्थली कर्पूरी ग्राम में आज भी लोग पेयजल की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. इंदिरा आवास, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, कन्या विवाह योजना समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का सही से क्रियान्वयन नहीं हुआ है.

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ममता दीदी, जरा नज़र इधर भी डालें

देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाने वाली भारतीय रेल में कल्याणकारी योजना के तहत कई अर्द्धसरकारी संस्थाएं चलाई जाती है जिनमें रेलवे मनोरंजन संस्थान, कैंटीन, को-ऑपरेटिव, सिलाई सेंटर, आर्युवेदिक एवं होम्योपैथिक स्वास्थ्य केंद्र आदि हैं. इन संस्थानों में हज़ारों श्रमिक कार्यरत हैं लेकिन विडंबना है कि रेलवे के इन उपक्रमों में कार्यरत श्रमिकों को जो मासिक वेतन दिया जा रहा है उसमें श्रम अधिनियम एवं रेलवे बोर्ड के नियमों की खुल्लम-खुल्ला अवहेलना की जा रही है.

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समस्तीपुर में चुनावी सरगर्मी ब़ढी

झारखंड में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव एवं सरकार गठन के बाद अब बिहार में भी आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मी दिखने लगी है. उत्तर बिहार के प्रमुख राजनीतिक केंद्र समस्तीपुर में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज़ हो गई है. सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यालयों में संभावित उम्मीदवारों की आवाजाही तेज़ हो चली है. ज़िले के सभी दस विधानसभा क्षेत्रों में राजद-लोजपा, भाजपा-जदयू के अलावा कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की चहलकदमी देखकर ऐसा लगता है कि प्राय: सभी दलों में टिकट को लेकर सिर फुटौव्वल की स्थिति रहेगी, क्योंकि चुनाव लड़ने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है.

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मिथिलांचल की मांग ने जोर पकडा

तेलंगाना पर केंद्र ने सहमति क्या जताई, अलग मिथिलांचल राज्य की मांग ने एक बार फिर ज़ोर पकड़ लिया. बिहार के सोलह ज़िलों को मिलाकर बनने वाले इस राज्य की मांग से जुड़े नेताओं ने पुरानी फाइलें खोलकर संघर्ष की नई रणनीति बनानी शुरू कर दी है.

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