भू-माफ़ियाओं ने कुष्ठ रोगियों को खदेड़ भगाया : शाहजहांपुर के गांधी आदर्श कुष्ठ आश्रम को नष्ट कर रहा भ्रष्टाचार का कोढ़

शाहजहांपुर में एक वक्त वह भी था जब उसके पास अपना कारखाना था जिसमें वह कालीन व कपड़ों की बुनाई

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सियासत के शहर में सन्नाटा

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर जंग-ए-आज़ादी में बिस्मिल अशफाक-रोशन की साझी शहादत, साझी विरासत वाला शहर शाहजहांपुर आज न जाने क्यों राजनीतिक शून्यता का शिकार हो गया है. आज़ादी के बाद भी सेठ विशन चंद्र सेठ, प्रेम किशन खन्ना, जितेंद्र प्रसाद व सत्यपाल सिंह यादव जैसे कद्दावर नेता देश और प्रदेश की राजनीति में छाये रहे. अब मौजूदा हालात कुछ इस तरह बन गये हैं कि आरक्षण के भंवर में फंसा यह ज़िला सियासी तौर पर रस्म अदायगी तक सिमट कर रह गया है, ना पहले जैसी चर्चायें होती हैं ना सियासी कोठियों की धमक सुनाई देती है और ना ही समर्थकों में कोई जोश-ख़रोश दिखाई पड़ता है. सियासत जैसे कोई ग़ैर ज़रूरी चीज़ हो चुकी हो.

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कई रंगों से सजा है शाहजहांपुर रंगमंच

दिल्ली और लखनऊ के बीचों-बीच बसे शाहजहांपुर ज़िले के सांस्कृतिक परिदृश्य पर दृष्टि डाली जाए तो यहां रंगमंच एक समृद्ध विधा के रूप में स्थापित दिखाई देता है. यहां के रंगकर्मी राष्ट्रीय स्तर पर अपने नाट्य मंचनों से पहचान स्थापित करते दिखाई देंगे.

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