एक समय सरपंच ग्राम पंचायत का सबसे महत्वपूर्ण पद माना जाता था, लेकिन बिहार में इस पद की अहमियत कम होने लगी है. लगभग ढाई दशक बाद बिहार में वर्ष 2001 में पंचायत के चुनाव हुए तो लोगों को लगा कि ग्राम स्वराज का जो सपना महात्मा गांधी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने देखा था, वह साकार होने वाला है.
Tags: Bihar, Corruption, Village Panchayat, chief, elections, sarpanch, ग्राम, चुनाव, पंचायत, बिहार, भ्रष्टाचार, मुखिया, सरपंच Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, चुनाव, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: अभिषेक रंजन सिंह | No Comments » | Read More... |
आम तौर पर यह धारणा बनी हुई है कि जनसंख्या वृद्धि हानिकारक है. इससे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है. आर्थिक दृष्टिकोण के सभी पैमाने भी इसी की पुष्टि करते हैं. अर्थशास्त्रियों की परिभाषा का निष्कर्ष यही है कि जनसंख्या वृद्धि के कारण ही खाद्यान्न की कमी होती है, क्योंकि जिस अनुपात में आबादी में इज़ा़फा होता, उस अनुपात में पैदावार नहीं हो पाती है.
Tags: Nation, Population, definition, development, economic, आर्थिक, जनसंख्या, परिभाषा, राष्ट्र, विकसित Posted in आर्थिक, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: डॉ. गजाला उर्फी | No Comments » | Read More... |
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था ने आदमी को एक तरह से मशीन बना दिया है. उदाहरण के लिए घर में काम आने वाली सुइयां या कीलें आज से 200 वर्ष पहले ग्राम का कोई लोहार बनाता था. उसके बनाने में जो साजो-सामान लगता था, उसको प्राप्त करने से लेकर तैयार सुई या कील घर- घर जाकर बेचकर पैसा इकट्ठा करने तक का सारा काम वह स्वयं या उसका परिवार कर लेता था.
Tags: capitalism, economy, power, production, property, अर्थव्यवस्था, उत्पादन, पूंजीवादी, बिजली, संपत्ति Posted in आर्थिक, जरुर पढें, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More... |
बिहार राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा बरौनी ताप विद्युत संयंत्र का विस्तारीकरण किया जाना है. राज्य मंत्रिमंडल ने 3666 करोड़ रुपये की इस योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है. सरकार का कहना है कि फिलहाल 2250 मेगावॉट क्षमता वाले कोयला आधारित विद्युत संयंत्र की स्थापना होगी.
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एक और आवाज़ आजकल जोरों से उठाई जा रही है, वह है सहकारिता आंदोलन की. सहकारिता आंदोलन देश के लिए, राष्ट्र के हर व्यक्ति के लिए उपादेय है, बशर्ते कि इस पद्धति का ईमानदारी से अनुसरण किया जाए.
Tags: Movement, ancient, capitalist, cooperative, economy, tradition, अर्थव्यवस्था, आंदोलन, परंपरा, पूंजीवादी, प्राचीन, सहकारिता Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More... |
भारत में 14 साल तक के बच्चों की आबादी पूरी अमेरिकी आबादी से भी ज़्यादा है. कुल श्रम शक्ति का लगभग 3.6 फीसदी हिस्सा 14 साल से कम उम्र के बच्चों का है. प्रत्येक दस बच्चों में से 9 काम करते हैं. ये बच्चे लगभग 85 फीसदी पारंपरिक कृषि गतिविधियों में कार्यरत हैं, जबकि 9 फीसदी से कम उत्पादन, सेवा और मरम्मती कार्यों में लगे हैं.
Tags: American, India, child, labor, project, अमेरिकी, परियोजना, बाल, भारत, मज़दूरी, श्रम Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: सौमित्र मोहन | No Comments » | Read More... |
देश के संविधान में कुछ वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, ताकि सामाजिक तौर पर पिछड़े लोगों को बराबरी के अधिकार दिए जा सकें, उन्हें भी अन्य नागरिकों की तरह तरक्की के अवसर मिल सकें, क्योंकि इतिहास गवाह है कि हमारे यहां जाति और धर्म के नाम पर विभिन्न वर्गों और धर्मों के लोगों के साथ अन्याय होता रहा है.
Tags: Congress, Constitution, Muslim, fraud, reservations, rights, अधिकार, आरक्षण, कांग्रेस, धोखा, मुसलमान, संविधान Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, धर्म, राजनीति, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: डॉ. कमर तबरेज | No Comments » | Read More... |
भ्रष्टाचार के खिला़फ अन्ना हजारे के आंदोलन को लेकर मुस्लिम संगठनों के रहनुमाओं ने सियासी रोटियां सेंकनी शुरू कर दी हैं. एक तऱफ पूरा देश भ्रष्टाचार से परेशान है, वहीं दूसरी तऱफ कुछ मुस्लिम संगठनों ने अन्ना हज़ारे के आंदोलन का विरोध करने का ऐलान किया.
Tags: Anna, Corruption, Movement, Muslim, assembly, elections, अन्ना, आंदोलन, चुनाव, भ्रष्टाचार, मुस्लिम, विधानसभा Posted in आंदोलन, आर्थिक, कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, राजनीति, विधि-न्याय, समाज by Author: फिरदौस खान | No Comments » | Read More... |
शहरीकरण ने लोक मानस से बहुत कुछ छीन लिया है. चौपालों के गीत-गान लुप्त हो चले हैं. लोक में सहज मुखरित होने वाले गीत अब टीवी कार्यक्रमों में सिमट कर रह गए हैं. फिर भी गांवों में, पर्वतों एवं वन्य क्षेत्रों में बिखरे लोक जीवन में अभी भी इनकी महक बाक़ी है.
Tags: Farmer, Folklore, Music, Urbanization, folk singer, folktale, किसान, लोककथा, लोकगायक, लोकगीत, शहरीकरण, संगीत Posted in आर्थिक, कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज by Author: फिरदौस खान | No Comments » | Read More... |
वर्ष 2009 में एक बड़ी घटना हुई. चौथी दुनिया ने रंगनाथ मिश्र कमीशन की रिपोर्ट छाप दी और सरकार से कहा कि अगर यह रिपोर्ट झूठी है तो वह कहे कि यह रिपोर्ट झूठी है. उस रिपोर्ट को लेकर राज्यसभा में चार-पांच दिनों तक का़फी हंगामा होता रहा. राज्यसभा के सांसदों ने हमारे ख़िला़फ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव रखा और हमने उस विशेषाधिकार हनन के नोटिस का जवाब भी दिया.
Tags: Politics, Rajya Sabha, Ranganath, commissions, reports, कमीशन, चुनाव, रंगनाथ, राजनीति, राज्यसभा, रिपोर्ट Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, जब तोप मुकाबिल हो, राजनीति, विधि-न्याय, संपादकीय, समाज by Author: संतोष भारतीय | No Comments » | Read More... |
पूंजी संपत्ति पूंजीवाद का मूल स्तंभ है. इसे मिटाना ही होगा. इस श्रेणी में प्रधानत: दो ही संपत्तियों का समावेश होता है- (1) ज़मीन जायदाद, (2) पूंजी. भारत सरकार ने जबसे समाजवादी अर्थव्यवस्था को अपना ध्येय घोषित किया है, प्रथम कक्षा के लिए कई संशोधन हुए हैं, नए क़ानून बने हैं.
Tags: capitalism, economic, landlord, law, social, अर्थव्यवस्था, क़ानून, जमींदार, पूंजीवाद, समाजवादी Posted in आर्थिक, जरुर पढें, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More... |
जब लोकपाल बिल को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अन्ना हज़ारे का एक दिवसीय अनशन शुरू हुआ तो उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को जनलोकपाल बिल पर बहस करने की दावत दी, लेकिन सांसदों ने यह कहकर हंगामा खड़ा कर दिया कि इस बिल पर चर्चा करने का अधिकार केवल संसद को है, सड़क पर चर्चा नहीं होनी चाहिए. क्या सरकार और हमारे नेता इस बात का जवाब दे सकते हैं कि जब संसद की स्टैंडिंग कमेटी ने यूआईडीएआई के चेयरमैन नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में जारी आधार स्कीम पर सवालिया निशान लगाते हुए उसे ख़ारिज करके सरकार से उस पर दोबारा ग़ौर करने के लिए कहा है तो फिर क्यों अभी तक यह कार्ड बनने का सिलसिला जारी है.
Tags: Bill, Ombudsman, UID, cards, identity cards, planning, political, rights, support, अधिकार, आधार, कार्ड, पत्र, पहचान, बिल, यूआईडी, योजना, राजनीतिक, लोकपाल Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, राजनीति, विदेश, विधि-न्याय, समाज by Author: डॉ. कमर तबरेज | 1 Comment » | Read More... |
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जनता भोली होती है, बेवक़ू़फ नहीं |
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