मध्य प्रदेश के चंदेरी की हथकरघा कला जो देखता है, वही कायल हो जाता है, लेकिन इससे जुड़ा दूसरा सच यह है कि चंदेरी साड़ी उद्योग जैसे-जैसे व्यवसायिक गति पकड़ता जा रहा है, परंपरागत साड़ियां लुप्त होती जा रही हैं. चंदेरी के बुनकर कम समय में कम लागत की अधिक बिकने वाली साड़ियां बनाने में अधिक रुचि ले रहे हैं.
Tags: Chanderi, Industry, art, artwork, handicraft, sarees, weavers, उद्योग, कला, कलाकारी, चंदेरी, बुनकर, साड़ी, हस्तशिल्प Posted in आर्थिक, राज्य, स्टोरी-6 by Author: सुरेंद्र अग्निहोत्री | No Comments » | Read More... |
संजय साव की उम्र 32 साल है. वह बिहार के गोपालगंज का रहने वाला है. गांव में रहकर वह इतना नहीं कमा पाता कि अपने परिवार के भोजन और अन्य ज़रूरतों को पूरा कर सके. दिक्कतों को झेलते-झेलते परेशान होकर वह कमाने के लिए बाहर जाने का फैसला करता है, ताकि अपने घर कुछ पैसा भेज सके और बच्चों को कम से कम दो व़क्त की रोटी नसीब हो.
Tags: Delhi, Industry, Noida, company, unemployment, worker, उद्योग, कंपनी, दिल्ली, नोएडा, बेरोज़गारी, वर्कर Posted in आर्थिक, जरुर पढें, राज्य, समाज by Author: कुमार सुशांत | 1 Comment » | Read More... |
बिजली की बढ़ती मांग और उस अनुपात में लगातार गिरता उत्पादन, यही है ऊर्जा प्रदेश बनने का सपना संजोए उत्तराखंड की सीधी-सपाट पहचान. मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए राज्य को हर साल सर्दी के दिनों में रोज तक़रीबन पौने दो करोड़ रुपये की बिजली खरीदनी पड़ती है.
Tags: Uttarakhand, crisis, energy, power, production, उत्तराखंड, उत्पादन, ऊर्जा, बिजली, संकट Posted in आर्थिक, जरुर पढें, राज्य by Author: पूजा यादव | No Comments » | Read More... |
हमारे देश में आज़ादी के बाद से ही सुनियोजित तरीक़े से एक सामान्य बोध विकसित कर दिया गया है कि मुसलमान मुख्य धारा में नहीं आना चाहते और इसी वजह से वे पिछड़े हैं. कहने को मुस्लिम हर मामले में पिछड़े हुए हैं, लेकिन उन्हीं पर यह आरोप है कि बरसों से सियासी पार्टियां उनका तुष्टीकरण कर रही हैं.
Tags: Muslim, Ranganath Mishra Commission, Sachar Committee, development, reports, मुसलमान, मुस्लिम, रंगनाथ मिश्र आयोग, रिपोर्ट, विकास, सच्चर कमेटी Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, धर्म, विधि-न्याय, समाज by Author: जाहिद खान | No Comments » | Read More... |
यह दौर था 30-40 साल पहले का, जब बिहार-उत्तर प्रदेश में महेंद्र मिश्र की यह पूरबी ख़ूब गाई जाती थी. नाच या नौटंकी में इस तरह के गाने चलते थे. उस जमाने में कमाई के लिए पूरब का क्रेज़ था और प्रवासी श्रमिक सतुआ-भूजा की गठरी लेकर निकल पड़ते थे श्रमसंधान के लिए. उनका रुख़ पूरब की ओर यानी असम व पश्चिम बंगाल की ओर होता था.
Tags: Employment, Industrial, Industry, Overseas, acquisition, labor, अधिग्रहण, उद्योग, औद्योगिक, प्रवासी, मज़दूर, रोज़गार, श्रमिक Posted in आर्थिक, राज्य, समाज, स्टोरी-6 by Author: बिमल राय | No Comments » | Read More... |
जमीअत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी जाने-माने विद्वान हैं और अपने बेबाक विचारों के लिए विख्यात हैं. कश्मीर के ताज़ा हालात, मुस्लिमों की राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक स्थितियों-दुश्वारियों समेत अनेक विचारणीय बिंदुओं को लेकर चौथी दुनिया के समन्वय संपादक मनीष कुमार ने पिछले दिनों उनसे एक लंबी बातचीत की.
Tags: Arshad Madani, Kashmir, Movement, Muslim, cashmere, political, secular, अरशद मदनी, आंदोलन, कश्मीर, कश्मीरी, धर्मनिरपेक्षता, मुसलमान, मुस्लिम, राजनीतिक Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, राजनीति, राज्य, समाज, साक्षात्कार by Author: डा. मनीष कुमार | 1 Comment » | Read More... |
माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 में बदलाव के लिए मंत्रीस्तरीय समिति की स़िफारिशें सरकार के इरादों की पोल खोलकर रख देती हैं. खनन कंपनियों के मुना़फे का 26 प्रतिशत हिस्सा खनन क्षेत्र एवं स्थानीय वाशिंदों के विकास के लिए अलग रखने का प्रस्ताव हो या डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन का गठन संबंधी सुझाव, गहराई में जाकर देखें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार आदिवासियों और ग़रीब किसानों का हितैषी होने का केवल दिखावा भर करना चाहती है.
Tags: Aboriginal, Act, Land, acquisition, farmers, government, law, mining, poor, project, अधिग्रहण, आदिवासी, एक्ट, किसान, खनन, परियोजना, भूमि, सरकार, क़ानून, ग़रीब Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: आदित्य पूजन | No Comments » | Read More... |
सच्चर कमेटी ने देश में मुसलमान समुदाय के विभिन्न पक्षों का विस्तृत विश्लेषण किया और सारी बातें कमेटी की रिपोर्ट में उल्लिखित हैं. मुसलमानों की पहचान ही उनके विकास की सबसे बड़ी बाधा है, यह बात भी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कही गई है. साथ ही यह भी स्पष्ट है कि इससे ही कई और बाधाएं भी पैदा हो जाती हैं.
Tags: Employment, Indian, Muslim, Problem, Sachar Committee, report, भारत, मुसलमान, रिपोर्ट, रोज़गार, सच्चर कमेटी, समस्या Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज by Author: औसाफ अहमद | No Comments » | Read More... |
तस्करों के लिए बांग्लादेश जाकर मवेशियों को बेचना फायदे का सौदा बन गया है. वहां मवेशियों की ऊंची क़ीमत मिलती है. असम की बराक घाटी के रास्ते बांग्लादेश के भीतर बड़े पैमाने पर मवेशियों की तस्करी जारी है. सीमा सुरक्षाबल के सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश में भारत के मवेशियों की काफी मांग है. कालीगंज, काबूगंज, चिरागी और सीलटेक के बाज़ारों में नियमित रूप से मवेशियों की बिक्री की जाती है.
Tags: Bangladesh, India, cattle, fake, note, smuggling, जाली, तस्करी, नोट, बांग्लादेश, भारत, मवेशी Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, पड़ोस, विदेश, विधि-न्याय, स्टोरी-6 by Author: दिनकर कुमार | No Comments » | Read More... |
गया ज़िला अंतर्गत पंचायती अखाड़ा में रुकसाना अगरबत्ती बनाकर अपने परिवार का गुज़ारा करती है. रुकसाना एवं उसके बच्चे हर रोज़ तीन से चार किलो अगरबत्ती बनाते हैं. उसका पति मज़दूरी करता है. रुकसाना का कहना है कि वह तीन से चार हज़ार रुपये महीना कमा लेती है. बात करते-करते उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं और वह अपनी परेशानियां बयां करने लगती हैं.
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एक तो ग़रीब, ऊपर से विकलांग. ज़मीन के नाम पर स़िर्फ उतना, जिस पर झोपड़ीनुमा घर बना हुआ है. बेरोज़गारी और मु़फलिसी इनकी नियति बन चुकी थी. कल तक कालू भाट और राधेश्याम की ज़िंदगी की कहानी कुछ ऐसी ही थी, लेकिन यह कल की कहानी है. आज कालू भाट और राधेश्याम की ज़िंदगी में रोशनी है, आंखों में चमक है, उम्मीद की किरण है, एक सपना है बेहतर भविष्य का.
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आप सांसद हैं, देवता नहीं |
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