कोयले की कहानी कोयले की तरह और काली होती जा रही है. जब चौथी दुनिया ने 25 अप्रैल-1 मई 2011 के अंक में 26 लाख करोड़ का महाघोटाला शीर्षक से कहानी छापी तो हमें लगा कि हमने एक कर्तव्य पूरा किया, क्योंकि जनता के प्रतिनिधियों, सरकार बनाने वाले प्रतिनिधियों ने हिंदुस्तान के लोगों की गाढ़ी कमाई का पैसा कुछ लोगों की जेब में डाल दिया और उसमें से कुछ पैसा उनकी जेब में भी गया.
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नई मशीनरी का परिणाम है कम मज़दूरों से अधिक काम करवा सकना. उससे मज़दूरों की ज़रूरत न रहने से कटौती या छंटनी होती है. जो लोग बेकार होते हैं, वे कभी भी नहीं चाहेंगे कि नई मशीनरी लगाई जाए. जो काम करते रहें, उन्हें अधिक वेतन दें तथा हमें निकाल बाहर करें. युक्तीकरण का सबसे बड़ा विरोध इसी बुनियाद पर हो रहा है. नवीनीकरण में सबसे बड़ी बाधा इन मज़दूरों की छंटनी है.
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केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर बिहार में बहस शुरू हो गई है. इसे राजनीतिक रंग भी दिया जा रहा है. इस मामले को लेकर केंद्र सरकार के मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल फ्रंट फुट पर हैं, तो बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार बैक फुट पर आ गए हैं. लेकिन राजनीतिक मजबूरी और वादा़खिला़फी से घबराये बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, अंतरराष्ट्रीय पटल पर महत्वपूर्ण होते जा रहे गया में केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं बनने देना चाह रहे हैं.
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16 मार्च को प्रणब मुखर्जी लोकसभा में भाषण दे रहे थे. यह आम भाषण नहीं था, बल्कि 2012-13 का बजट भाषण था. सारा देश इस भाषण को ध्यान से सुन रहा था. हम भी इस भाषण को सुन रहे थे. इस भाषण को जब हमने सुनना शुरू किया तो हमें बहुत आशा थी कि प्रणब मुखर्जी इस देश के सामने आने वाली तकलीफ़ों को ध्यान में रखकर अपना बजट भाषण रखेंगे.
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हर धंधे में एक श्रमिक का औसत कार्यभार निर्धारित होना आवश्यक है. मालिक लोग तो, मान लीजिए, ऐसे एक मज़दूर को चुन लेते हैं, जो बहुत ज़्यादा मेहनत करता है या निपुण है, जो सबसे ज़्यादा काम करता है, और उसी को पैमाना बनाकर वे चाहते हैं कि हर श्रमिक का कार्यभार उतना ही हो.
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यह आलेख कॉरपोरेट मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली द्वारा दिए गए एक भाषण और नए कंपनी बिल-2011 पर आधारित है. वीरप्पा मोइली ने बंगलुरु में हुए एक सम्मेलन, जिसका विषय था-भारत में कॉरपोरेट्स का भविष्य, में बोलते हुए नए कंपनी बिल-2011 और कॉरपोरेट्स की सामाजिक ज़िम्मेदारी यानी सीएसआर पर अपने विचार रखे थे.
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यह सही है कि इससे जनता को कष्ट और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. अभी हम श्रमिक संघ प्रणाली का विश्लेषण कर रहे हैं. इसके कई पहलू अभी तक बाक़ी रह गए हैं. मज़दूरों के किसी भी आंदोलन को सफल बनाने के लिए सविनय अवज्ञा के तरीक़े हैं, जैसे टूल्स डाऊन, स्टे-इन-स्ट्राइक आदि.
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रिश्वत देना जहां एक ओर आम आदमी की मजबूरी बन गया है, वहीं कुछ लोगों के लिए यह अपना काम जल्दी और ग़लत तरीक़े से निकलवाने का ज़रिया भी बन गया है, लेकिन इन दोनों स्थितियों में एक फर्क़ है. एक ओर 2-जी स्पेक्ट्रम के लिए रिश्वत दी जाती है, तो दूसरी ओर एक आम और बेबस आदमी को राशन कार्ड बनवाने सरकारी पेंशन, दवा एवं इंदिरा आवास पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है.
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सोलह मार्च को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी बजट पेश करेंगे. पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद पेश किए जा रहे इस बजट की रूपरेखा पर हाल में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के घर पर एक मीटिंग हुई. दो घंटे के बाद मीडिया को स़िर्फ इतना बताया गया कि जनता के हितों को ध्यान में रखकर बजट तैयार किया जाएगा, लेकिन इस मीटिंग के बाद जितने भी नेता मुखर्जी के घर से बाहर निकल रहे थे, उनके चेहरे से पता चल रहा था कि आगे क्या होने वाला है.
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खबर आई है कि बिहार सरकार संत विनोबा भावे का भूदान आंदोलन एक बार फिर शुरू करने जा रही है. फर्क़ स़िर्फ इतना है कि विनोबा भावे द्वारा चलाया गया भूदान आंदोलन भूमिहीन किसानों को ज़मीन दिलाने के लिए था, वहीं बिहार सरकार का आंदोलन स्कूलों को ज़मीन उपलब्ध कराने के लिए होगा. इस आंदोलन के माध्यम से राज्य सरकार लोगों से विद्यालयों के लिए ज़मीन मांगेगी.
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बुनकर! स़िर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि प्रतीक भारतीयता का, मिट्टी की सोंधी महक का. स्वतंत्रता सेनानियों ने करघा के आसरे क्रांति का ख्वाब देखा और स्वतंत्रता प्राप्ति की तऱफ अग्रसर हुए. स्वतंत्र तो हम हुए, परंतु करघा दम तोड़ता गया. कपास से कपड़े तक के सफर में करघे पर ज़िंदगियां दम तोड़ती नज़र आती हैं. सिलसिला बदस्तूर जारी है. विकास और आधुनिकता की अंधी दौड़ के चलते हमने करघा, बुनकरों और खादी को लगभग बिसार दिया है.
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त्वरित शहरीकरण से इमारतों के निर्माण की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि होने के कारण अधिकाधिक अवसर भी पैदा हो रहे हैं. यह मांग अभी से भारत में बिजली की कुल खपत की 30 प्रतिशत आंकी गई है. बढ़ते विकास के अनुरूप ही देश के भवन निर्माण क्षेत्र में 2005 से 2050 तक पांच गुना वृद्धि की संभावना है.
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आप सांसद हैं, देवता नहीं |
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