Arvind Kejriwal Live : 6 May 2012
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Army Chief V.K.Singh Exclusive Interview with Chauthiduniya
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Subramanian Swamy exposed Chidambaram
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Democracy An Initiative:Part-2
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Baba Ramdev vs MPs
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Why Congress Lost the Election
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Archive for the ‘आर्थिक’ Category
पूर्वांचल के बुनकरों का दर्दः रिश्‍ता वोट से, विकास से नहीं
पूर्वांचल के बुनकरों का दर्दः रिश्‍ता वोट से, विकास से नहीं

केंद्र की यूपीए सरकार से पूर्वांचल के लगभग ढ़ाई लाख बुनकरों को का़फी उम्मीदें थीं. बुनकरों के लिए करोड़ों रुपये के बजट का ऐलान सुनते ही बुनकरों को यक़ीन हो गया कि उनकी हालत अब सुधरने वाली है, लेकिन जब हक़ीक़त सामने आई तो वे खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगे.

Tags: Purvanchal, abuse, banaras, development, economic, poverty, problems, suicide, vote, weavers, आत्महत्या, आर्थिक, पूर्वांचल, बनारस, बुनकर, विकास, वोट, शोषण, समस्या, ग़रीबी
Posted in आंदोलन, आर्थिक, कला और संस्कृति, कानून और व्यवस्था, राज्य, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: अभिषेक रंजन सिंह | No Comments » | Read More...
एक सीमावर्ती गांव की असली तस्वीर
एक सीमावर्ती गांव की असली तस्वीर

भारत को गांवों का देश कहा जाता है, क्योंकि यहां की अधिकतर आबादी आज भी गांव में ही निवास करती है, प्रकृति की गोद में जीवन बसर करती है और प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से जीवन के साधन जुटाती है. शहरी सुख-सुविधाओं से दूर ज़िंदगी कितनी कठिनाइयों से गुज़रती है, इसका अंदाज़ा लगाना बड़े शहरों में रहने वालों के लिए मुश्किल है.

Tags: India, Kupwara, development, planning, resources, rural, कुपवाड़ा, ग्रामीण, भारत, योजना, विकास, संसाधन
Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, पर्यावरण, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: इरफान अहमद लोन | No Comments » | Read More...
श्यामल के हौसले को सलाम
श्यामल के हौसले को सलाम

दुनिया में इतिहास रचने वालों की कोई कमी नहीं है. कुछ लोग अपना नाम चमकाने के लिए इतिहास रचते हैं तो कुछ लोग निस्वार्थ रूप से अपना कार्य करते हैं और उन्हें पता भी नहीं चलता कि उन्होंने इतिहास रच दिया. बिहार के गया ज़िले के दशरथ मांझी एक ऐसे ही इतिहास रचयिता रहे हैं, जिन्होंने अपनी पत्नी के इलाज में बाधक बने पहाड़ को काटकर सड़क निर्माण किया था.

Tags: Jharkhand, Shyamal Chowdhury, Weapons, World, agricultural, history, इतिहास, कृषि, झारखंड, दुनिया, श्यामल चौधरी, हथियार
Posted in आर्थिक, जरुर पढें, पर्यावरण, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: शैलेंद्र सिन्हा | No Comments » | Read More...
पीड़ित श्रमिक वर्ग
पीड़ित श्रमिक वर्ग

मध्यम वर्ग के संबंध में तो कह चुके. अब लीजिए ग़रीब वर्ग को, जो भूखे हैं, मज़दूर हैं, श्रमिक हैं, भीड़ हैं, चाहे जो कह लीजिए. दुनिया में किसी देश का हो, किसी जाति का हो, स्त्री हो या पुरुष, ऐसा व्यक्ति जिसके पास निज की कोई ज़मीन-जायदाद न हो, न जिसकी कोई पूंजी हो, जिसे अपने जीवन निर्वाह के लिए दूसरों के यहां नौकरी करनी पड़े, काम का मूल्य या भाड़ा लेकर काम करना पड़े, इन सबको सभ्य भाषा में श्रमिक वर्ग कहते हैं.

Tags: Class, Das Capital, Karl Marx, World, philosopher, workers, कार्ल मार्क्स, दार्शनिक, दास कैपिटल, दुनिया, वर्ग, श्रमिक
Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More...
बुंदेलखंडः महापर्व में घरवाले ही शामिल नहीं हैं
बुंदेलखंडः महापर्व में घरवाले ही शामिल नहीं हैं

उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड, यह नाम सुनते ही एक ऐसी तस्वीर सामने उभर कर आती है, जहां भूख है, सूखा है, मौत है और घरों में लटके ताले हैं. जिन घरों में ताले नहीं लगे हैं, वहां स़िर्फ बुज़ुर्ग है, जो दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में पलायन कर चुके अपने बच्चों द्वारा भेजे गए पैसों की वजह से जिंदा है, न कि केंद्र या सूबे की सरकार के अनुदान से. एक आंकड़े के मुताबिक़, पिछले पांच सालों में बुंदेलखंड से ढाई लाख से ज़्यादा लोग पलायन कर चुके हैं.

Tags: Bundelkhand, Uttar Pradesh, farmers, government, mahaparva, suicide, उत्तर प्रदेश, किसान, बुंदेलखंड, महापर्व आत्महत्या, सरकार
Posted in आंदोलन, आर्थिक, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, चुनाव, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: शशि शेखर | No Comments » | Read More...
उत्तर प्रदेश और निर्दलीय उम्मीदवार : कभी घी घना, कभी मुट्ठी भर चना, कभी वह भी मना
उत्तर प्रदेश और निर्दलीय उम्मीदवार : कभी घी घना, कभी मुट्ठी भर चना, कभी वह भी मना

सूबे में गठबंधन राजनीति का दौर क्या आया, निर्दलीयों की अहमियत में चार चांद लग गए, उनका मोल लगने लगा. हालांकि निर्दलीयों के लिए ऐसा अवसर कई बार आया, जब सत्ता की दावेदारी रखने वालों ने उन्हें लालबत्ती से नवाज़ कर कैबिनेट मंत्री तक का दर्जा दिया, लेकिन पूर्ण बहुमत की सरकारों में उन्हें अहमियत नहीं मिली.

Tags: Legislators, Politics, Uttar Pradesh, candidates, independent, red beacon, उत्तर प्रदेश, उम्मीदवार, निर्दलीय, राजनीति, लालबत्ती, विधायक
Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, चुनाव, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: अजय कुमार | No Comments » | Read More...
बिहार में पंचायती राज नहीं, मुखियाराज है
बिहार में पंचायती राज नहीं, मुखियाराज है

एक समय सरपंच ग्राम पंचायत का सबसे महत्वपूर्ण पद माना जाता था, लेकिन बिहार में इस पद की अहमियत कम होने लगी है. लगभग ढाई दशक बाद बिहार में वर्ष 2001 में पंचायत के चुनाव हुए तो लोगों को लगा कि ग्राम स्वराज का जो सपना महात्मा गांधी और लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने देखा था, वह साकार होने वाला है.

Tags: Bihar, Corruption, Village Panchayat, chief, elections, sarpanch, ग्राम, चुनाव, पंचायत, बिहार, भ्रष्टाचार, मुखिया, सरपंच
Posted in आर्थिक, कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, चुनाव, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज by Author: अभिषेक रंजन सिंह | No Comments » | Read More...
बढ़ती जनसंख्या अभिशाप नहीं
बढ़ती जनसंख्या अभिशाप नहीं

आम तौर पर यह धारणा बनी हुई है कि जनसंख्या वृद्धि हानिकारक है. इससे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है. आर्थिक दृष्टिकोण के सभी पैमाने भी इसी की पुष्टि करते हैं. अर्थशास्त्रियों की परिभाषा का निष्कर्ष यही है कि जनसंख्या वृद्धि के कारण ही खाद्यान्न की कमी होती है, क्योंकि जिस अनुपात में आबादी में इज़ा़फा होता, उस अनुपात में पैदावार नहीं हो पाती है.

Tags: Nation, Population, definition, development, economic, आर्थिक, जनसंख्या, परिभाषा, राष्ट्र, विकसित
Posted in आर्थिक, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: डॉ. गजाला उर्फी | 2 Comments » | Read More...
मनुष्य का यंत्रीकरण

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था ने आदमी को एक तरह से मशीन बना दिया है. उदाहरण के लिए घर में काम आने वाली सुइयां या कीलें आज से 200 वर्ष पहले ग्राम का कोई लोहार बनाता था. उसके बनाने में जो साजो-सामान लगता था, उसको प्राप्त करने से लेकर तैयार सुई या कील घर- घर जाकर बेचकर पैसा इकट्ठा करने तक का सारा काम वह स्वयं या उसका परिवार कर लेता था.

Tags: capitalism, economy, power, production, property, अर्थव्यवस्था, उत्पादन, पूंजीवादी, बिजली, संपत्ति
Posted in आर्थिक, जरुर पढें, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More...
जान देंगे, ज़मीन नहीं

बिहार राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा बरौनी ताप विद्युत संयंत्र का विस्तारीकरण किया जाना है. राज्य मंत्रिमंडल ने 3666 करोड़ रुपये की इस योजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है. सरकार का कहना है कि फिलहाल 2250 मेगावॉट क्षमता वाले कोयला आधारित विद्युत संयंत्र की स्थापना होगी.

Tags: District Megistrate, Farmer, Land, Movement, government, planning, आंदोलन, किसान, ज़मीन, ज़िलाधिकारी, योजना, सरकार
Posted in आंदोलन, आर्थिक, कानून और व्यवस्था, राजनीति, राज्य, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: सरोज सिंह | No Comments » | Read More...
सहकारी अर्थव्यवस्था की प्राचीन परंपरा

एक और आवाज़ आजकल जोरों से उठाई जा रही है, वह है सहकारिता आंदोलन की. सहकारिता आंदोलन देश के लिए, राष्ट्र के हर व्यक्ति के लिए उपादेय है, बशर्ते कि इस पद्धति का ईमानदारी से अनुसरण किया जाए.

Tags: Movement, ancient, capitalist, cooperative, economy, tradition, अर्थव्यवस्था, आंदोलन, परंपरा, पूंजीवादी, प्राचीन, सहकारिता
Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज by Author: महावीर प्रसाद आर मोरारका | No Comments » | Read More...
बालश्रम खत्म किया जा सकता है

भारत में 14 साल तक के बच्चों की आबादी पूरी अमेरिकी आबादी से भी ज़्यादा है. कुल श्रम शक्ति का लगभग 3.6 फीसदी हिस्सा 14 साल से कम उम्र के बच्चों का है. प्रत्येक दस बच्चों में से 9 काम करते हैं. ये बच्चे लगभग 85 फीसदी पारंपरिक कृषि गतिविधियों में कार्यरत हैं, जबकि 9 फीसदी से कम उत्पादन, सेवा और मरम्मती कार्यों में लगे हैं.

Tags: American, India, child, labor, project, अमेरिकी, परियोजना, बाल, भारत, मज़दूरी, श्रम
Posted in आर्थिक, कानून और व्यवस्था, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: सौमित्र मोहन | No Comments » | Read More...

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