यह विद्रोह की आहट है
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बिखर रहा है विजय माल्‍या का साम्राज्‍य
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तस्‍करी की शिकार महिलाओं का पुनर्वास कैसे हो?
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पाकिस्‍तानः आपदा से उपजा अनजाना डर
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दम तोड़ता लोकतंत्र
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नए ठौर की तलाश में बाहुबली
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कश्मीर समस्या का हल बातचीत से ही संभव
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आम लोगों के लिए हथियार बना सूचना अधिकार क़ानून
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Archive for the ‘जब तोप मुकाबिल हो’ Category
अब संभलना बहुत जरूरी है

पहले प्रधानमंत्री और बाद में सोनिया गांधी ने कहा कि कॉमनवेल्थ खेलों को हो जाने दें, भ्रष्टाचार की जांच होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. दोनों का बयान अच्छा लगा, पर ऐसे बयान तो हमने पहले भी देखे हैं. इन बयानों पर टिप्पणी बाद में, पहले हम राष्ट्रीय मनोविज्ञान की बात करते हैं.

Tags: Commonwealth, Corruption, PM, Sonia Gandhi, games, political, कॉमनवेल्थ, खेल, प्रधानमंत्री, भ्रष्टाचार, राजनैतिक, सोनिया गांधी
Posted in जब तोप मुकाबिल हो, संपादकीय by Author: संतोष भारतीय | No Comments » | Read More...
अब सुप्रीम कोर्ट से ही आशा है

न्‍याय का मूल सिद्धांत बदल रहा है, उसे बदल भी देना चाहिए. जब हमारे मन में उसके लिए कोई न इज़्ज़त हो, और न कोई जज़्बा, तो यही करना उचित है. मूल सिद्धांत है चाहे सौ अपराधी छूट जाएं, पर किसी निर्दोष को सज़ा नहीं मिलनी चाहिए. अब अलिखित सिद्धांत में पुलिस का भरोसा है कि एक अपराधी को बचाने के लिए सौ निर्दोषों को सज़ा देनी चाहिए.

Tags: Amit Shah, CBI, Gujarat, Kauser Bi, Sheikh, Supreme Court, encounter, अमित शाह, कौसर बी, गुजरात, मुठभेड़, सीबीआई, सुप्रीम कोर्ट, सोहराबुद्दीन
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महंगाई पर संसद का रवैया हैरान करता है

कहना बहुत सख्त होगा, और हो सकता है कुछ लोगों को बहुत बुरा भी लगे, पर सच्चाई यह है कि संसद इस देश के आम आदमी के दर्द का मज़ाक उड़ा रही है. सात दिनों तक लोकसभा और राज्यसभा नहीं चली, क्योंकि विपक्ष जिस नियम के तहत महंगाई पर बहस चाहता था सरकार उस पर कराने के लिए तैयार नहीं थी, क्योंकि तब मत विभाजन होता और सरकार शायद हार जाती.

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यह पाकिस्तान की मजबूरी है

एक महीने पहले जब मैंने यह लिखा था कि पाकिस्तान में सेना दस्तक दे रही है तो कई लोगों ने आश्चर्य जताया. दरअसल सारे संकेत इस ओर इशारा कर रहे थे कि सितंबर महीने तक सेना सत्ता पर क़ाबिज़ हो जाएगी.

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लोकतंत्र के खलनायक बनने से बचिए

आज आपकी ओर से पूरी राजनैतिक व्यवस्था से बात करेंगे. इसमें सभी राजनैतिक दल, क्या सरकार और क्या विपक्ष, ऐसा हो गया है कि शर्म से कह सकते हैं कि हमाम में सब नंगे हैं. सरकार को एक पैराग्राफ पढ़ने के लिए लिख देते हैं.

Tags: Budget, Constitution, PM, Supreme Court, development, प्रधानमंत्री, बजट, विकास, संविधान, सर्वोच्च न्यायालय
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भाजपा को कौरव सभा बनने से बचाइए

आपको एक महत्वपूर्ण बात बताते हैं, यह इतिहास का पन्ना है जिसका ज्ञान नितिन गडकरी को नहीं है. आचार्य नरेंद्र देव कांग्रेस छोड़ चुके थे और उन्होंने प्रजा समाजवादी पार्टी बनाई थी. पंडित संपूर्णानंद कांग्रेस में थे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे.

Tags: BJP, Congress, Prime Minister, comments, political, the report, कांग्रेस, टिप्पणियां, प्रधानमंत्री, भाजपा, राजनीतिक, रिपोर्ट
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हेडली से पूछताछ करने वाले सामने आएं

महंगाई के ऊपर प्रतिक्रियाएं आनी बंद हो गई हैं, शायद महंगाई कम हो गई है या फिर महंगाई के ऊपर राजनीति करने वालों का वार्षिक कर्तव्य समाप्त हो गया है. एक दिन का भारत बंद और इस बंद में भाजपा से लेकर वामपंथियों तक का शामिल होना तथा यह दावा करना कि इसे आम आदमी का समर्थन प्राप्त है, एक आंशिक सच्चाई है.

Tags: Finance Minister, Hadley, Inflation, Manmohan Singh, Prime Minister, प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह, महंगाई, वित्तमंत्री, हेडली
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पाकिस्‍तान में फौज के आने की आहट

पाकिस्तान से आने वाली ख़बरें चिंता पैदा कर रही हैं. किसी आम आदमी से बात हो रही हो या पत्रकार से, सांसद से या नौकरशाह से, बस एक बात कही जा रही है कि यहां के हालात अच्छे नहीं हैं. कितने अच्छे नहीं हैं, उसके जवाब में कहा जाता है कि बिल्कुल ही अच्छे नहीं हैं, बल्कि बहुत ख़राब हैं.

Tags: Inflation, Pakistan, U.S., military, terrorism, अमेरिका, आतंकवाद, पाकिस्तान, फौज, महंगाई
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दिग्विजय सिंह तमाम उम्र याद रहेंगे
दिग्विजय सिंह तमाम उम्र याद रहेंगे

अभी एक महीना भी नहीं बीता. लोधी इस्टेट के पंद्रह नंबर के घर में बैठे हम दिग्विजय सिंह से बात कर रहे थे. हमने देश का पहला इंटरनेट टीवी चौथी दुनिया टीवी शुरू किया है, जिसमें हम भारत के राजनीतिक इतिहास को टीवी पर ला रहे हैं. इंदिरा गांधी के समय के लोग हमारे बीच हैं, जो राजनीतिक घटनाओं के पीछे की कहानी बता सकते हैं.

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उर्दू चौथी दुनिया निकालने का मक़सद

देश के बुनियादी सवाल, जिनका रिश्ता भारत में रहने वाले हर इंसान से है, क्यों नहीं उर्दू जानने वालों के सामने लाए जाएं. बेकारी, भूख, दहशतगर्दी और असंतुलित विकास का शिकार हर भारतीय है तो क्यों नहीं उर्दू जानने वालों के सामने यह तथ्य लाया जाए. नाइंसा़फी के शिकार मुसलमानों के साथ भारत के दूसरे वर्ग भी हैं तो इसके आंकड़े क्यों उर्दू जानने वालों तक नहीं पहुंचते. कुछ लोग ज़रूर इस काम में लगे हैं, हम भी ऐसे लोगों की कतार में शामिल होना चाहते हैं.

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