हम लोगों में बहुत से ऐसे होंगे जिन्हें पिछली छब्बीस नवंबर को मुंबई में हुए आतंकी तांडव की याद होगी. हो सकता है कई ऐसे भी हों, जो इसे भूल गए हों. उस हमले में हमारे कई जांबाज़ शहीद हुए थे. हेमंत करकरे उनमें से एक थे.
Posted in चौथी दुनिया, जब तोप मुकाबिल हो, संपादकीय by Author: संतोष भारतीय | No Comments » | Read More... |
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आप सांसद हैं, देवता नहीं |
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