आम चुनाव के बहाने मुशर्रफ पाकिस्तान में अपनी राजनीतिक ज़मीन तलाशने में जुटे हुए हैं, लेकिन यहां उनकी लोकप्रियता लगातार घटती ही जा रही है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या मुशर्रफ मई में होने वाले चुनाव में कोई करिश्मा दिखा पाएंगे? पड़ोसी देश पाकिस्तान में चुनावी सरगर्मी तेज है. 11 मई को [...]
Tags: इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट, इमरान खान, नियामतुल्ला खान, परवेज़ मुशर्रफ, पाकिस्तान, वैश्विक स्तर Posted in ख़ुफ़िया, विदेश by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
हैदराबाद में दो धमाके हुए. आधिकारिक तौर पर 14 लोगों की जानें गईं और अनाधिकारिक रूप से बीस से ज़्यादा लोगों की जानें गईं. दैनिक अख़बार इस घटना को टेलीविजन की तरह रिपोर्ट कर रहे हैं, पर यहां कुछ दूसरे सवाल खड़े होते हैं. सवाल यह है कि आख़िर वह कौन-सा जादू है कि विस्फोट [...]
Tags: खुफिया एजेंसियों, गृह मंत्रालय, गृहमंत्री, तमाचा, देश के तंत्र, धमाके, पुलिस, बयान, भगवा आतंकवाद, मनमोहन सिंह, मुंह, राजनीतिक दलों, राज्य, विस्फोट, सुशील कुमार शिंदे, सोनिया गांधी, हैदराबाद Posted in ख़ुफ़िया, जब तोप मुकाबिल हो, राज्य by Author: संतोष भारतीय | 1 Comment » | Read More... |
अभी हैदराबाद में विस्फोट हुए. ये विस्फोट रुकने वाले नहीं हैं. पहला कारण तो यह है कि हमारी खुफिया एजेंसियों की हालत उतनी अच्छी नहीं है, जितनी होनी चाहिए, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि ऐसी घटनाएं न स़िर्फ भारतीय लोगों द्वारा अंजाम दी जा रही हैं, बल्कि इसमें सीमा पार से भी [...]
Tags: अंतरराष्ट्रीय, इंद्र कुमार गुजराल, खुफिया एजेंसियों, ग़रीब देश, गृह मंत्री, ड्यूटी, नरसिम्हाराव, पुलिस, प्रधानमंत्री, भारतीय लोगों, मुंबई, रकम मोटी, रॉ, विस्फोट, सरकार, सहयोग, सिक्योरिटी, सीमा, सेना, हैदराबाद Posted in कवर स्टोरी-2, ख़ुफ़िया, पड़ोस, समाज by Author: कमल मोरारका | No Comments » | Read More... |
करगिल और एलओसी के आसपास का इलाक़ा लद्दा़ख के ठंडे रेगिस्तान का एक हिस्सा है. सर्दियों में भारी ब़र्फबारी की वजह से रास्ता बाधित हो जाता है. 18000 फीट ऊंची पहा़िडयों पर -60 डिग्री का तापमान और ठंडी तेज़ हवाएं सांस लेना मुश्किल कर देती हैं. 1977 के भारत-पाक समझौते के तहत दोनों देशों की सेना 15 सितंबर से लेकर 15 अप्रैल तक इन इलाक़ों की किसी भी पोस्ट पर तैनात नहीं रहेगी, लेकिन पाक सेना ने इस क़रार को ताक़ पर रखकर 1999 में इसी दौरान घुसपैठ की. पाक की रणनीत यह थी कि वर्फ पिघलने से पहले इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया जाए क्योंकि इस दौरान सेना का श्रीनगर से इधर कूच करना संभव नहीं हो पाएगा. यह रणनीति कामयाब हो जाती तो पाकिस्तान सेना का कई महत्वपूर्ण चोटियों पर क़ब्ज़ा हो जाता, जहां से श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग-1ए का रास्ता कई जगह से बंद किया जा सकता था और भारतीय सेना के कई दस्तों को इस सीमा में लेकर बंधक बनाया जा सकता था. पाकिस्तान का क़ब्ज़ा एलओसी के महत्वपूर्ण इलाक़ों पर हो जाता, जहां से इस्लामाबाद को और भी मज़बूत बनाया जा सकता था. इससे भारतीय कश्मीर का एक ब़डा हिस्सा पाकिस्तान के क़ब्ज़े में आ जाता. इसके अलावा उनकी मंशा परमाणु शक्ति का डर दिखाना भी थी.
Posted in Crousel5, कानून और व्यवस्था, ख़ुफ़िया, जरुर पढें, राजनीति, समाज by Author: रीतिका सोनाली | 2 Comments » | Read More... |
ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और इज़रायल दूसरे देशों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. एक ओर इन दोनों देशों ने ईरान पर परमाणु बम बनाने का आरोप लगाया है और इसके कारण उस पर न केवल स्वयं आर्थिक प्रतिबंध लगाया है, बल्कि दूसरे देशों पर भी इसके लिए दबाव डाला है. इसके विपरीत अमेरिकी खु़फिया एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा है.
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पड़ोस में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण और क्षेत्रीय महाशक्ति के रूप में उदय होने के कारण भारत ने रक्षा के आधुनिकीकरण की एक विशाल योजना तैयार की है. स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (एसआईपीआरआई) द्वारा हाल ही में प्रकाशित अध्ययन में भारत को 2006 और 2010 के बीच हथियारों का सबसे बड़ा आयातक देश बताया गया है
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मरने वाला अकेला नहीं मरता. उसके साथ मरती हैं कई और ज़िंदगियां. ताउम्र, तिल-तिलकर. दिल्ली बम धमाके में जिन 13 लोगों की मौत हुई, उनके परिवार वालों की आंखों से निकलते आंसू देखकर किसी का भी कलेजा मुंह को आ जाए. पीएम से लेकर भविष्य में होने वाले पीएम तक अस्पताल पहुंचे
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कश्मीर के बारे में दुनिया के किसी भी व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी देश का रहने वाला हो, लेकिन जब वह व्यक्ति अपनी राय रखने के लिए पैसे लेता है तो इस पर अ़फसोस होता है. दिलीप पडगांवकर, कुलदीप नैयर, जस्टिस राजेंद्र सच्चर और गौतम नौलखा भारत के वे लोग हैं, जिनका हर कोई न केवल सम्मान करता है, बल्कि उन्हें ओपेनियन मेकर भी कहा जाता है.
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देश के रिज़र्व बैंक के वाल्ट पर सीबीआई ने छापा डाला. उसे वहां पांच सौ और हज़ार रुपये के नक़ली नोट मिले. वरिष्ठ अधिकारियों से सीबीआई ने पूछताछ भी की.
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ओसामा के मारे जाने के बाद अटकलों का बाज़ार काफी गर्म हो गया है. लगभग रोज़ ही कोई न कोई नई कहानी पता चलती है. इसी क्रम में हाल में जनता को बताया गया कि ओसामा का सौदा आज से दस साल पहले ही तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बुश और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्ऱफ के बीच हो चुका था.
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सीढ़ियों पर अपनी जान बचाते दौड़ते, भागते और हांफते दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के सांसद. कोई गिर रहा है, कोई दूसरे को धक्का दे रहा है. सब जान बचाकर भागने में लगे हैं. यह आंखों पर विश्वास करने वाला नजारा नहीं है. 9 सितंबर, 2001 से पहले यह कोई सोच भी नहीं सकता था कि अमेरिका के सांसद अपने ही संसद भवन से जान बचाकर इस तरह भागते हुए नज़र आएंगे. एक बार, दो बार नहीं, 2001 के बाद ऐसा नज़ारा कई बार देखा गया.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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