चौथी दुनिया के पास वे सारे दस्तावेज़ मौजूद हैं ,जो चीख-चीख कर इन महानुभावों की पोल खोल रहे हैं. बता रहे हैं कि कैसे गैस पी़डीतों की भावनाओं की बलि च़ढा कर नेताओं, नौकरशाहों और उद्योगपतियों ने डाओ को बचाने का काम किया. चौथी दुनिया की प़डताल में ऐसे ही लोगों की करतूतों का खुलासा किया जा रहा है. हर उस चिट्ठी के बारे में बताया जा रहा है, जो इन लोगों ने डाओ को बचाने के लिए लिखी है.
Tags: Anderson, Bhopal gas victims, Dow, Environment Minister Jairam Ramesh, Indian politics and media, Kamal Nath, Prithvi Raj Chauhan, Ratan Tata, Union Carbide, एंडरसन, कमलनाथ, पर्यावरण, पृथ्वी राज चौहान, यूनियन कार्बाइड, रतन टाटा Posted in कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, मीडिया, समाज by Author: शशि शेखर | 1 Comment » | Read More... |
हादसे के 25 साल बाद आज भी भोपाल की हालत खराब है. उस समय ज़हरीली गैस से पीड़ित हुए लोग आज तक मर रहे हैं. आज तक बीमार हो रहे हैं. आज भी लोगों की हालत खराब हो रही है. पिछले 25 साल में कितनी सरकारें बदलीं. मीडिया ने कितना पानी बदला, कितने विकास का दौर देखा, लेकिन आज तक अपनी प्राथमिकता नहीं तय कर पाया. न सियासतदानों ने और न मीडिया ने.
Tags: Bhopal Gas Trasdic Anderson, Karbaead Union, for Civil Nuclear Daimages Liayabilites, एंडरसन Posted in कवर स्टोरी, मीडिया, राजनीति by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | 4 Comments » | Read More... |
कुछ दिनों पहले की बात है, जब एक न्यूज़ चैनल पर एक रोचक, लेकिन हैरान करने वाली ख़बर देखने को मिली. लखनऊ में रहने वाली अलंकृत बारहवीं कक्षा की परीक्षा में शरीक हुई थी. बचपन से ही पढ़ाई में आगे रहने वाली अलंकृत दसवीं की बोर्ड परीक्षा में अपने स्कूल की टॉपर रही थी और एक बार फिर ऐसे ही रिज़ल्ट की उम्मीद कर रही थी,
Tags: CBSE, business, law, news channel, students, छात्र, न्यूज़ चैनल, व्यवसायिक, सीबीएसई, क़ानून Posted in कानून और व्यवस्था, मीडिया, राजनीति, विधि-न्याय, समाज, साहित्य, स्टोरी-6 by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
पिछले महीने हैम्पटन विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि मौजूदा दौर में मीडिया चौबीसो घंटे सक्रिय रहता है और आम लोगों को अक्सर ख़बरों की बौछार का सामना करना पड़ता है. इनमें कई ख़बरें ऐसी भी होती हैं, जिनकी सत्यता संदेह से परे नहीं होती.
Tags: Barack Obama, Pakistan, President, Prime Minister, Tony Blair, अंतरराष्ट्रीय, टोनी ब्लेयर, पाकिस्तान, प्रधानमंत्री, बराक ओबामा, मीडिया, राजनीति, राष्ट्रपति, विदेश Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, पड़ोस, मीडिया, राजनीति, विदेश, समाज by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
सर्वोच्च न्यायालय अपने नाम, जो इसे सर्वोच्च बताता है, के मुक़ाबले कम ही सर्वोच्च है. यह फांसी की सजा तो सुना सकता है, लेकिन ख़ुद फांसी नहीं दे सकता. सरकार अदालत के आदेश को न मानने की हिम्मत तो नहीं करती, लेकिन सरकार के पास उसे उलटने का विकल्प हमेशा मौजूद रहता है.
Tags: Afzal Guru, Driving, Supreme Court, hanging, अफजल गुरु, ताक़तवर, फांसी, मीडिया, सुप्रीम कोर्ट Posted in आंदोलन, कानून और व्यवस्था, मीडिया, राजनीति, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: एम जे अकबर | No Comments » | Read More... |
चौंसठ हज़ार करोड़ रुपये का घोटाला करने के बाद भी संचार मंत्री ए राजा बड़े ठाठ से अपने पद पर क्या इसलिए रहे, क्योंकि उनके रिश्ते कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मधुर हैं? जनता दल अध्यक्ष डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी आरोप लगाते हैं कि 2 जी स्पेक्ट्रम सौदे में सोनिया गांधी के केमैन आइलैंड स्थित बैंक ऑफ अमेरिका के खाते में करोड़ों डॉलर की एंट्री हुई है और इसके तमाम काग़ज़ात उनके पास मौजूद हैं.
Tags: Neera Aradia, Sharad Yadav, Sonia Gandhi, journalists, politicians, scam, spectrum, ए राजा, घोटाला, नीरा राडिया, नेता, पत्रकार, शरद यादव Posted in कवर स्टोरी, कानून और व्यवस्था, पहला पन्ना, मीडिया, राजनीति by Author: रूबी अरुण | 5 Comments » | Read More... |
एक जमाने में पत्रकारिता समाज के उन लोगों के साथ खड़ी होती थी, जो वंचित और शोषित कहे जाते थे और पत्रकार उनके हक़ के लिए खड़े हो जाते थे. पिछड़ों और दलितों को न्याय दिलाने की पत्रकारिता अब समाचार माध्यमों से विलुप्त होती दिख रही है. टेलीविज़न ने इस तरह की पत्रकारिता का बड़ा नुक़सान किया.
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पद्मश्री बरखा दत्त और वीर सांघवी. दो ऐसे नाम, जिन्होंने अंग्रेज़ी पत्रकारिता की दुनिया पर सालों से मठाधीशों की तरह क़ब्ज़ा कर रखा है. आज वे दोनों सत्ता के दलालों के तौर पर भी जाने जा रहे हैं. बरखा दत्त और वीर सांघवी की ओछी कारगुज़ारियों के ज़रिए पत्रकारिता, सत्ता, नौकरशाह एवं कॉरपोरेट जगत का एक ख़तरनाक और घिनौना गठजोड़ सामने आया है.
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लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर लोकसभा में झारखंड के गोड्डा के एक युवा सांसद निशिकांत दुबे ने आम बजट परिचर्चा में भाग लेते हुए सरकार की ओर ज्वलंत सवालों के कई गोले दनादन एक साथ दाग दिए तो एकबारगी पूरा सत्तापक्ष भी सन्न रह गया था. भाजपा के इस युवा सांसद ने सरकार से पूछा कि एक टेप आया है, एक पीआर एजेंसी के बारे में.
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भारतीय मीडिया में अब तक के सबसे अनोखे सोप ओपेरा एवं सनसनीखेज क्राइम थ्रिलर से अचंभित और रोमांचित हो रहे लोगों के बारे में यही कहा जा सकता है कि उन्होंने शायद अगाथा क्रिस्टी की लिखी मर्डर ऑन द ओरिएंट एक्सप्रेस नहीं पढ़ी. उन्होंने इसके फिल्मी रूपांतरण में अल्बर्ट फिनी और पीटर उस्तीनोव को हरक्यूल पॉयरट के किरदार में भी नहीं देखा है.
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भारत की राजनीति को सा़फ करने का समय आ गया है. सारे देश को मूर्ख बना कर पैसा बनाने का घिनौना खेल अपने अंतर्विरोध की वजह से खुल गया है. दरअसल यह हिंदुस्तान का वाटर गेट है, जिसकी शुरुआत एक टिप्पणी से हुई और आज इसमें भारत सरकार के कई मंत्री, क्रिकेट से जुड़े बड़े लोग और अपराध की दुनिया के बादशाह एक साथ, हाथ मिलाए खड़े दिखाई दे रहे हैं.
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बात खत्म नहीं हुई, बल्कि अभी तो शुरू हुई है. मेरे खिला़फ लिखना मना है शीर्षक से छपी खबर के बाद सूबे का सियासी पारा अचानक काफी चढ़ गया है. नेताओं को यह यकीन ही नहीं हुआ कि बिहार में कोई अ़खबार इस तरह की खबरें छापने का साहस कर सकता है, लेकिन सच के सामने आते ही कोई बेचैन है तो कोई गला फाड़-फाड़कर कह रहा है कि देखो, मैं कहता था न कि सरकारी दबाव ने सच पर पहरा लगा दिया है,
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आप सांसद हैं, देवता नहीं |
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