मैंने कुछ दिनों पहले असम के बाहरी क्षेत्र में स्थित पोबितोरा गेम पार्क में पहली बार हाथी की सवारी की. यह बहुत अच्छा अनुभव था. हाथी की सवारी करना थोड़ा मुश्किल होता है, क्योंकि उसकी पीठ चौड़ी होती है और हमें इसके लिए अपने पैरों को थोड़ा ज़्यादा फैलाना पड़ता है, जिसके हम आदी नहीं होते हैं. फिर भी इसका अनुभव बहुत अच्छा रहा और मैं किसी को भी इसकी सवारी करने की सलाह देना चाहूंगा. इसके साथ-साथ मैं यह भी सलाह देना चाहूंगा कि अगर संभव हो तो हमें पूर्वोत्तर भारत जाना चाहिए.
Tags: India, North East, Pobitora, ROI, assault, nationalism, आक्रमण, आरओआई, पूर्वोत्तर, पोबितोरा, भारत, राष्ट्रीयता Posted in कला और संस्कृति, कानून और व्यवस्था, राज्य, विधि-न्याय, समाज, स्टोरी-6 by Author: मेघनाद देसाई | No Comments » | Read More... |
शहरीकरण ने लोक मानस से बहुत कुछ छीन लिया है. चौपालों के गीत-गान लुप्त हो चले हैं. लोक में सहज मुखरित होने वाले गीत अब टीवी कार्यक्रमों में सिमट कर रह गए हैं. फिर भी गांवों में, पर्वतों एवं वन्य क्षेत्रों में बिखरे लोक जीवन में अभी भी इनकी महक बाक़ी है.
Tags: Farmer, Folklore, Music, Urbanization, folk singer, folktale, किसान, लोककथा, लोकगायक, लोकगीत, शहरीकरण, संगीत Posted in आर्थिक, कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज by Author: फिरदौस खान | No Comments » | Read More... |
शब्द-शब्द संघर्ष करने वाले साहित्य जगत के शिल्पकार रामनाथ सिंह उ़र्फ अदम गोंडवी नहीं रहे. ग़ुरबत में ज़िंदगी ग़ुजार कर साहित्य की सेवा करने वाले अदम गोंडवी ने अभाव में ज़िंदगी के ताप को महसूस कराने के लिए अपने गांव आटा परसपुर (गोंडा, उत्तर प्रदेश) की ओर से साहित्यानुरागियों का ध्यान खींचने के लिए क़लम को तलवार बनाते हुए कहा था
Tags: Gondvi, Uttar Pradesh, life, literature, scratch, struggle, उत्तर प्रदेश, क़लम, गोंडवी, ज़िंदगी, संघर्ष, साहित्य Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: संजय सक्सेना | No Comments » | Read More... |
मनुष्य-जातियों का इतिहास उनकी यायावरी प्रवृत्ति से संबद्ध है. यात्रा का मुख्य आकर्षण-बिंदु मनुष्य के सौंदर्य बोध के विकास के साथ-साथ चतुर्दिक् व्याप्त जगत का विस्तार भी है. प्रस्तुत कृति के लेखक अनिल सुलभ ने सौंदर्य बोध की दृष्टि से उल्लास की भावना द्वारा प्रेरित होकर उत्तर और दक्षिण भारत की यात्रा की.
Tags: Man, Sulabh, Travel, cultural, literary, मनुष्य, यात्रा, सांस्कृतिक, साहित्य, सुलभ Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: श्रीरंजन सूरिदेव | No Comments » | Read More... |
दिल्ली के 100 साल पूरे हो गए. इस जश्न-ए-दिल्ली में सरकारी महकमों से लेकर कई ग़ैर-सरकारी संगठनों ने राजधानी में कई कार्यक्रम आयोजित किए और मशहूर ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस की शान में खूब क़सीदे भी पढ़े.
Tags: Delhi, Heritage, Lutians, Parliament, capital, दिल्ली, धरोहर, राजधानी, लुटियंस, संसद Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज by Author: अभिषेक रंजन सिंह | 1 Comment » | Read More... |
किसी देश के विकास को जानने और समझने के लिए वहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का महत्वपूर्ण योगदान है. हमारे देश में ऐसी अनेक इमारतें हैं, जिनसे देश की प्राचीन संस्कृति का पता चलता है.
Tags: Fort, Heritage, book, cultural, historical, review, ऐतिहासिक, क़िला, धरोहर, पुस्तक, समीक्षा, सांस्कृतिक Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, राज्य, समाज, साहित्य by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
बेहद ही दिलचस्प, लेकिन हैरान करने वाला वाक़िया है. एक दिन यूं ही दफ्तर से निकला तो त़फरीह के लिए पास के ही एक मॉल में चला गया. अपनी आदत है कि जहां भी जाता हूं वहां किताबों की दुकान ढूंढकर एक बार उसके चक्कर ज़रूर लगाता हूं. नोएडा के उस शानदार मॉल में भी घूमते-घामते एक बहुत बड़ी किताबों की दुकान पर जा पहुंचा.
Tags: Noida, Office, Premchand, book, mall, publishing, किताब, दफ्तर, नोएडा, प्रकाशन, प्रेमचंद, मॉल Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
इक्कीसवीं सदी के ग्लोबलाइज्ड वर्ल्ड में व्यापार लोगों को जोड़ने वाली सबसे शक्तिशाली चीज़ों में से है. लेकिन आश्चर्य यह है कि व्यापार की ब़ढती समृद्धि के साथ ग़रीबी भी ब़ढी है और इससे अमीरी और ग़रीबी के बीच की खाई ब़डी हो गई है. विश्व व्यापार में वे संभावनाएं हैं, जो ग़रीबी हटाने के साथ इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए बेहतरीन माध्यम बन सकती हैं.
Tags: International Trade Fair 2011, Madhubani Painting, Pragati Maidan, exhibition, अंतराष्ट्रीय व्यापार मेला 2011, इंटरनेशनल ट्रेड फेयर 2011, इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स, क्रॉकरी, ट्रेड फेयर, त्रिपुरा, प्रगति मैदान, फ्लॉवर वाश, शीप ज्वैलरी, सिक्की कला, हस्तकला Posted in Crousel2, कला और संस्कृति, कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, समाज by Author: रीतिका एस बर्णवाल | No Comments » | Read More... |
राजस्थान के झुंझनू का कठराथल गांव, दूर तक नज़र आते लहलहाते खेत, चरते पशु और रंग-बिरंगे पक्षी, कच्ची पगडंडियों के किनारे बने मिट्टी और घास-फूंस के छोटे-ब़डे घर, सौंधी खुशबू वाली आबोहवा और प्रकृति के प्रेम से सराबोर वातारण.
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धारावाहिक रामायण में राम का रोल निभाने वाले अरुण गोविल और अभिनेता संजीव कुमार में सहज ही कोई समानता नहीं दिखेगी, लेकिन दोनों के करियर का विश्लेषण करें, तब उनमें छवि की समानता नज़र आती है.
Tags: Arun, Ramayan, Sanjeev, Similarity, actor, episode, अभिनेता, अरुण, धारावाहिक, रामायण, संजीव, समानता Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, फिल्म, समाज, साहित्य by Author: प्रकाम्य भदौरिया | No Comments » | Read More... |
आगामी 30 तारी़ख को कई भारतीय शूमाकर फॉर्मूला ट्रैक पर रेसिंग करते दिखाई देंगे. यह रेस इस बार भारतीय मेजबानी के तहत ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर होगी. यह भारत के लिए पहला मौक़ा होगा, जब इस देश में फॉर्मूला रेस होगी.
Tags: Formula, Indian, Noida, foreign, racing, इंटरनेशनल, नोएडा, फॉर्मूला, भारतीय, रेसिंग, विदेश, विदेशी Posted in कला और संस्कृति, खेल, जरुर पढें, राज्य, समाज by Author: राजेश एस कुमार | No Comments » | Read More... |
मोहिनीअट्टम केरल का एक नृत्य है, जो भरतनाट्यम का ही एक रूप है. भारती शिवाजी और उनकी बेटी विजय लक्ष्मी ने इस नृत्यकला को पूरी दुनिया में मशहूर करने का बीड़ा उठाया है. भारती शिवाजी ने अपनी पोती नयनतारा को भी मोहिनीअट्टम सिखाया है
Tags: Bharti, Keral, Lakshmi, MOhini Attam, Sivaji, Vijay, dance, केरल, नृत्य, भारती, मोहिनीअट्टम, लक्ष्मी, विजय, शिवाजी Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज by Author: डी.आर. आहूजा | No Comments » | Read More... |
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अन्ना और रामदेव ने जनता का विश्वास खो दिया |
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