दुनिया को पता चल गया कि पाकिस्तान की जेल में बंद निर्दोष भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह की जान एक सोची-समझी साजिश के तहत ले ली गई. लेकिन एक तीखा सच यह भी है कि सरबजीत की मौत के लिए जितनी ज़िम्मेदार पाकिस्तान सरकार है, हमारा यानी भारत का अपराध किसी भी मायने में उससे कम [...]
Tags: औवेस शेख, कानून व्यवस्था, कूटनीति की मौत, घडि़याली आंसू, दलबीर कौर, नेपाल, पाकिस्तान की जेल, पाकिस्तान सरकार, बम धमाका, बांग्लादेश, बेअंत सिंह की हत्या, भारत पाकिस्ता रिश्ता, मंजीत सिंह, सरबजीत, सरबजीत की मौत, साजिश, हिंदुस्तान की सरकार Posted in कवर स्टोरी, पहला पन्ना by Author: डा. मनीष कुमार | 1 Comment » | Read More... |
जल, जंगल और ज़मीन ऐसे प्राकृतिक संसाधन हैं, जो इस देश के करोड़ों लोगों के जीवन का मूलभूत आधार हैं. सदियों से नदी के किनारे और जंगल में बसे लोगों का इन संसाधनों पर नैसर्गिक अधिकार रहा है. लेकिन सरकार नव-उदारवादी व्यवस्था की आड़ में आम आदमी को उसके इस अधिकार से वंचित करने की [...]
Tags: अंतर्राज्यीय नदियों का राष्ट्रीयकरण बिल, उदारवादी व्यवस्था, केंद्र सरकार, ग़ैरकानूनी तरीके, ग्रामसभा, जंगल, जल, ज़मीन, दलित, नवउदारवाद, प्राकृतिक संसाधन, भूमि अधिग्रहण, राज्य सरकार, राष्ट्रीयकरण, वन अधिकार कानून, वनवासी अधिनियम 2006, संशोधित बिल कानून, संशोधित भूमि अधिग्रहण बिल, हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्लांटस Posted in कवर स्टोरी-2 by Author: शशि शेखर | 1 Comment » | Read More... |
वेनेजुएला में भले ही समाजवादी नेता निकोलस माडुरो ने चुनाव जीत लिया है, लेकिन उनकी जीत का अंतर देखकर तो यही लगता है कि वहां समाजवादियों का वर्चस्व धीरे-धीरे कम होता जा रहा है. अगर जीत की खुशी में माडुरो इस ओर ध्यान नहीं देंगे, तो कुछ सालों के अंदर समाजवादी वहां अल्पसंख्यक हो जाएंगे. [...]
Tags: कैपरिल्स, पूंजीवादी, माडुरो, राजनीतिक और आर्थिक एजेंडे, राष्ट्रपति पद, वेनेजुएला, समाजवादी नेता, सालस रोमर, ह्यूगो चावेज Posted in विदेश, स्टोरी-6 by Author: राजीव कुमार | No Comments » | Read More... |
भारत एक लोकतांत्रिक देश है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम आदमी ही देश का असली मालिक होता है, इसलिए जनता को यह जानने का हक़ है कि जो सरकार उसकी सेवा के लिए बनाई गई है, वह कैसे, कहां और क्या काम कर रही है. इसके साथ ही हर व्यक्ति इस सरकार को चलाने के लिए [...]
Tags: अधिनियम 2005, उच्चतम न्यायालय, लोक सूचना अधिकारी, लोकतांत्रिक देश, सूचना का अधिकार Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
करीब 50 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र में औंध की देशी रियासत में राजा ने कुछ अधिकार गांव वालों को दिए थे. पहले तो लोगों को लगा कि अब अपना राज्य हो गया है, तो अब कर देने की क्या ज़रूरत है? इसलिए कर की वसूली में शिथिलता आई. ज्यों ही गांव का खजाना खाली हो [...]
Tags: कर की वसूली, गैर ग्रामदानी, देशी रियासत, मवेशी, स्वशासन Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें by Author: ठाकुर दास बंग | No Comments » | Read More... |
देश में आएदिन आतंकी हमले होते रहते हैं, लेकिन हमारी सुरक्षा-खुफिया एजेंसियां ऐसी घटनाओं पर रोक नहीं लगा पाती हैं, जबकि हमारे यहां संसाधनों की कोई कमी नहीं है. तो फिर इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? पढ़िए, एक गंभीर एवं विश्लेषणात्मक टिप्पणी… बंगलुरू में हाल में हुए बम विस्फोट हमें फिर से याद [...]
Tags: आतंकी हमला, खुफिया नेटवर्क, गृह मंत्री, बंगलुरू, राष्ट्रीय सुरक्षा, सख्त गृह मंत्री Posted in कवर स्टोरी-2, संपादकीय by Author: कमल मोरारका | No Comments » | Read More... |
देश को आज़ादी मिले 65 वर्ष से ज़्यादा हो गए हैं, लेकिन आदिवासियों-वनवासियों के साथ अभी तक न्याय नहीं हो पाया है. राजनीतिक दल उनका येन-केन-प्रकारेण इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन जब अधिकार और नेतृत्व देने की बात आती है, तो उन्हें सांप सूंघ जाता है. आखिर ऐसा क्यों? आदिवासी हकों-हितों के साथ मौजूदा राज्य [...]
Tags: आदिवासी परिवार, आदिवासी संगठित, गुलाजर सिंह मरकाम, तहसीलदार शाहिद खान, फर्जी आदिवासी, फर्जी प्रमाणपत्र, मूल आदिवासी, मोती कश्यप Posted in जरुर पढें by Author: अरविंद वर्मा | No Comments » | Read More... |
हर आम या खास आदमी को कभी न कभी, किसी सरकारी विभाग से काम प़डता ही है, चाहे वह राशनकार्ड बनवाने का काम हो या पासपोर्ट बनवाने का. आप चाहे शहर में रहते हों या गांव में, सरकारी बाबुओं की फाइल दबाने और फाइल आगे ब़ढाने के लिए रिश्वत की मांग से आप सभी का [...]
Tags: इंकम टैक्स, रिश्वत, रिश्वतखोर अधिकारी, समस्याएं अनेक, सरकारी विभाग, सूचना का अधिकार Posted in कानून और व्यवस्था, स्टोरी-6 by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
आम चुनाव सिर पर है. यूपीए और एनडीए इसके लिए अपने-अपने तरीके से तैयारियां कर रहे हैं. वहीं देश के सामने अनगिनत समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं और हमारी अर्थव्यवस्था की हालत भी अच्छी नहीं है. पेश है एक विश्लेषण. चुनाव नज़दीक आता दिख रहा है. वैसे भी, 2014 में आम चुनाव होना है, लेकिन [...]
Tags: अन्ना हजारे, अमेरिका, आजादी के 60-65 वर्ष, आम चुनाव, ब्लॉक आबंटन, मनमोहिन सिंह आर्थिक स्थिति, यूपीए Posted in कवर स्टोरी-2, चुनाव, राजनीति by Author: कमल मोरारका | No Comments » | Read More... |
यह आक्षेप अक्सर लगाया जाता है कि गांवों को स्व-शासन के अधिकार देने पर अन्याय, अत्याचार बढ़ेंगे और ग़लतियां भी होंगी. गांव का स्वरूप रूढ़िवादी एवं कट्टरपंथी होगा. इससे यथास्थिति भी क़ायम रहेगी, क्योंकि सुविधासंपन्न लोग ग्रामसभा के अधिकारों को हथिया लेंगे. संविधान सभा में भाषण देते हुए डॉ. अंबेडकर ने कहा था, संवैधानिक नैतिकता [...]
Tags: गरीबों का बहुमत, ग्रामसभा, वंचित, विघटनकारी तत्व, सत्ता का उपयोग Posted in जरुर पढें, विधि-न्याय by Author: ठाकुर दास बंग | No Comments » | Read More... |
स्थायी नौकरी के बदले अनुबंध पर काम कराने का चलन दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है. इसीलिए ठेकेदारी प्रथा को बंद कर पक्की नौकरी देने की मांग भी उठ रही है, लेकिन सरकार को इससे कोई मतलब ही नहीं है. पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों ने वेतन से [...]
Tags: आंदोलन, आरसीएच, एनआरएचएम, ठेकेदारी प्रथा, राष्, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, विरोध-प्रदर्शन, संविदाकर्मियों, स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन Posted in स्टोरी-6 by Author: अभिषेक रंजन सिंह | No Comments » | Read More... |
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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