भारत एक लोकतांत्रिक देश है. लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम आदमी ही देश का असली मालिक होता है, इसलिए जनता को यह जानने का हक़ है कि जो सरकार उसकी सेवा के लिए बनाई गई है, वह कैसे, कहां और क्या काम कर रही है. इसके साथ ही हर व्यक्ति इस सरकार को चलाने के लिए [...]
Tags: अधिनियम 2005, उच्चतम न्यायालय, लोक सूचना अधिकारी, लोकतांत्रिक देश, सूचना का अधिकार Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
करीब 50 वर्ष पूर्व महाराष्ट्र में औंध की देशी रियासत में राजा ने कुछ अधिकार गांव वालों को दिए थे. पहले तो लोगों को लगा कि अब अपना राज्य हो गया है, तो अब कर देने की क्या ज़रूरत है? इसलिए कर की वसूली में शिथिलता आई. ज्यों ही गांव का खजाना खाली हो [...]
Tags: कर की वसूली, गैर ग्रामदानी, देशी रियासत, मवेशी, स्वशासन Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें by Author: ठाकुर दास बंग | No Comments » | Read More... |
देश को आज़ादी मिले 65 वर्ष से ज़्यादा हो गए हैं, लेकिन आदिवासियों-वनवासियों के साथ अभी तक न्याय नहीं हो पाया है. राजनीतिक दल उनका येन-केन-प्रकारेण इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन जब अधिकार और नेतृत्व देने की बात आती है, तो उन्हें सांप सूंघ जाता है. आखिर ऐसा क्यों? आदिवासी हकों-हितों के साथ मौजूदा राज्य [...]
Tags: आदिवासी परिवार, आदिवासी संगठित, गुलाजर सिंह मरकाम, तहसीलदार शाहिद खान, फर्जी आदिवासी, फर्जी प्रमाणपत्र, मूल आदिवासी, मोती कश्यप Posted in जरुर पढें by Author: अरविंद वर्मा | No Comments » | Read More... |
यह आक्षेप अक्सर लगाया जाता है कि गांवों को स्व-शासन के अधिकार देने पर अन्याय, अत्याचार बढ़ेंगे और ग़लतियां भी होंगी. गांव का स्वरूप रूढ़िवादी एवं कट्टरपंथी होगा. इससे यथास्थिति भी क़ायम रहेगी, क्योंकि सुविधासंपन्न लोग ग्रामसभा के अधिकारों को हथिया लेंगे. संविधान सभा में भाषण देते हुए डॉ. अंबेडकर ने कहा था, संवैधानिक नैतिकता [...]
Tags: गरीबों का बहुमत, ग्रामसभा, वंचित, विघटनकारी तत्व, सत्ता का उपयोग Posted in जरुर पढें, विधि-न्याय by Author: ठाकुर दास बंग | No Comments » | Read More... |
संसार में ऐसी कोई भी चीज़ नहीं है, जो पूरी तरह सर्वगुण संपन्न हो या पूरी तरह गुणहीन हो. एक न एक गुण या अवगुण सभी में होते हैं. मात्र ग्रहणता की बात है कि आप क्या ग्रहण करते हैं, गुण या अवगुण? इसीलिए साई बाबा भी कहते हैं कि अपने मन में हमेशा सकारात्मक [...]
Tags: Sai Baba, गुणग्रोही गुलाब, गुणग्रोही मोर, छिन्द्रान्वेषी, मौलिक परिवर्तन Posted in जरुर पढें, साईं बाबा by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
हम सब यह जानते हैं कि बीमारी में गोली खाना ज़्यादातर लोगों को अच्छा नहीं लगता, लेकिन अगर ठीक होना है, तो गोली खाना पड़ता है, लेकिन लोगों को जवान दिखने का बहुत शौक होता है. दरअसल, लोग अपने बुढ़ापे को छिपाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं. आजकल बाज़ार [...]
Tags: 20 रोगों की रोकथाम, उम्र बढ़ाने की दवाई, जवान दिखने का नया फंडा Posted in अन्य, जरुर पढें by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
आज तक आपने बोलने वाले कई गैजेट्स देखें होंगे, लेकिन गूगल अपनी वर्कशॉप में अब एक ऐसा जूता ले आया है, जो आपको बोलकर हर चीज की जानकारी देगा. गूगल ने इसे टॉकिंग शूज का नाम दिया है. अब आलसीराम अगर सुबह उठकर दौड़ना शुरू करेंगे, तो उनका जूता रोने लगेगा. सेल्समैन अगर दिन में [...]
Tags: एक्सीलरोमीटर, गूगल का जूता, टॉकिंग जूता, ब्लूटुथ लगा हुआ जूता, माइक्रोचिप्स Posted in अन्य, जरुर पढें, विविध by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
1. ग्राम संबंधी भूमि व्यवस्था एवं भू-राजस्व संबंधी जो भी अभिलेख, अधिकार आदि आज तहसील (तालुका) या अंचल को हैं, वे सब ग्रामसभा में निहित होंगे, जैसे-ज़मीन की बिक्री, आवंटन आदि के अधिकार. 2. बड़ी सिंचाई योजनाओं में गांव के खेतों में पानी के बंटवारे का अधिकार या सिंचाई के स्थानीय स्रोतों पर ग्रामसभा [...]
Tags: ग्रामसभा का कर्तव्य, ग्रामसभा के अधिकार Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज by Author: ठाकुर दास बंग | No Comments » | Read More... |
दुनिया का हर शख्स करियर के प्रति हमेशा सचेत रहता है और आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रयत्न भी करता रहता है. बॉलीवुड में भी जब अभिनेत्रियां आती हैं, तो उनकी दिली ख्वाहिश यही होती है कि उनसे बेहतर कोई न हो. शुरू-शुरू में वे अपना काम मेहनत एवं लगन से करें और साथ [...]
Tags: अनु अग्रवाल, खो गई हीरोइन, गुमनाम हसीनाएं, गुमराह अभिनेत्रियां, चांदनी, तनिशा मुखर्जी, भाग्य श्री, भूमिका चावला, सोनम, सोनिका गिल, स्नेहा उलाल Posted in जरुर पढें, फिल्म by Author: सोनिका गुप्ता | No Comments » | Read More... |
गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटकर भारत का वर्ष भर दौरा किया. भारत के ग्रामीणों की दुर्दशा देखी. उनके मुंह से वेदनापूर्ण उद्गार निकले, हमारे गांव पैमाल (तुच्छ) हो गए हैं, क्योंकि हम सच्चा अर्थशास्त्र एवं सच्चा समाजशास्त्र जानते नहीं है. बापू का यह कथन बीसवीं सदी के दूसरे दशक के गांवों को जितना [...]
Tags: अंग्रेजों, अंधकार, अर्थशास्त्र, इतिहास, गुप्त वंश, ग्राम प्रधान देश, ग्रामीण, दक्षिण अफ्रीका, भारत, लोकतंत्र, संस्कृति, समाजशास्त्र Posted in जरुर पढें, राज्य by Author: ठाकुर दास बंग | No Comments » | Read More... |
डॉ. सुनीलम को अदालत द्वारा सज़ा सुनाए जाने के बाद अन्ना हजारे समेत देश भर के सामाजिक संगठनों, सोशल मीडिया एवं बुद्धिजीवियों के एक तब़के द्वारा जगह-जगह विरोध एवं धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश के भाजपा और कांग्रेस नेताओं की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है. डॉ. सुनीलम को [...]
Posted in जरुर पढें, मीडिया, राजनीति, साक्षात्कार by Author: अभिषेक रंजन सिंह | 2 Comments » | Read More... |
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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