यह आक्षेप अक्सर लगाया जाता है कि गांवों को स्व-शासन के अधिकार देने पर अन्याय, अत्याचार बढ़ेंगे और ग़लतियां भी होंगी. गांव का स्वरूप रूढ़िवादी एवं कट्टरपंथी होगा. इससे यथास्थिति भी क़ायम रहेगी, क्योंकि सुविधासंपन्न लोग ग्रामसभा के अधिकारों को हथिया लेंगे. संविधान सभा में भाषण देते हुए डॉ. अंबेडकर ने कहा था, संवैधानिक नैतिकता [...]
Tags: गरीबों का बहुमत, ग्रामसभा, वंचित, विघटनकारी तत्व, सत्ता का उपयोग Posted in जरुर पढें, विधि-न्याय by Author: ठाकुर दास बंग | No Comments » | Read More... |
जिस देश की अधिकांश आबादी ग़रीब हो, वहां यह ज़रूरी हो जाता है कि ग़रीबों से जु़डी योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया जाए. लेकिन व्यवहार में अब तक यही देखने को मिला है कि ग़रीबों के विकास के लिए बनाई गई लगभग सभी योजनाओं में भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है, चाहे वह मनरेगा हो [...]
Tags: आरटीआई, इंदिरा आवास योजना, गरीबों को हक कैसे मिलेगा, जन प्रतिनिथि, बीपीएल, मनरेगा, सस्ता राशन Posted in कानून और व्यवस्था, विधि-न्याय, स्टोरी-6 by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | 1 Comment » | Read More... |
भारतीय लोकतंत्र के लिए आने वाला समय काफी महत्वपूर्ण है. लोगों का इस व्यवस्था से भरोसा उठने और उसके नतीजे के तौर पर जनता के सड़क पर उतरने की घटनाएं लगातार जारी हैं. दामिनी वाली घटना में जिस तरह से युवा लगातार दिल्ली और देश के बाक़ी हिस्सों में आंदोलन कर रहे हैं, इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत माना जा सकता है.
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नरेंद्र मोदी की विजय ने संघ और भारतीय जनता पार्टी में एक चुप्पी पैदा कर दी है. संघ के प्रमुख लोगों में अब यह राय बनने लगी है कि नरेंद्र मोदी को देश के नेता के रूप में लाना चाहिए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता इस सोच से सहमत नहीं हैं. भारतीय जनता पार्टी के लगभग सभी नेताओं का मानना है कि नरेंद्र मोदी को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करते ही देश के 80 प्रतिशत लोग भारतीय जनता पार्टी के ख़िला़फ हो जाएंगे, क्योंकि मोदी की सोच से देश के 16 प्रतिशत मुसलमान और लगभग 80 प्रतिशत हिंदू सहमत नहीं हैं.
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अगर कोई अ़खबार या संपादक किसी के ड्राइंगरूम में ताकने-झांकने लग जाए और गलत एवं काल्पनिक कहानियां प्रकाशित करना शुरू कर दे तो ऐसी पत्रकारिता को कायरतापूर्ण पत्रकारिता ही कहेंगे. हाल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, सीक्रेट लोकेशन. यह इस अ़खबार में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम डेल्ही कॉन्फिडेंशियल का एक हिस्सा थी.
Tags: . मीडिया, Ahkbar, Anna Hazare, Editor, Indian Express, Journalism, Public, Santosh Bhartiya, Shekhar Gupta, Story, VK Singh, Vinod Mehta, chauthi Duniya, court, defamation, journalist, lawsuit, news, publish, reporter, reports, अदालत, अन्ना हजारे, अ़खबार, इंडियन एक्सप्रेस, खबर, चौथी दुनिया, जनता, पत्रकार, पत्रकारिता, प्रकाशित, मानहानि, मुकदमा, रिपोर्ट, रिपोर्टर, विनोद मेहता, वी के सिंह, शेखर गुप्ता, संतोष भारतीय, संपादक, स्टोरी Posted in आंदोलन, कवर स्टोरी, कानून और व्यवस्था, चौथी दुनिया, पहला पन्ना, मीडिया, राजनीति, विधि-न्याय, समाज by Author: डा. मनीष कुमार | 5 Comments » | Read More... |
गुजरात का चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए एक अलग तरह का सबक़ है और कांग्रेस के लिए दूसरी तरह का. भारतीय जनता पार्टी न अपनी जीत से कुछ सीखती है और न कांग्रेस अपनी हार से. एक और वर्ग है, जो सबक़ नहीं सीखता और वह है हमारे देश का मुस्लिम समाज. मैं शायद ग़लत शब्द इस्तेमाल कर रहा हूं. मुझे मुस्लिम समाज नहीं, मुस्लिम संगठन और मुस्लिम नेता शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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