झारखंड खनिज संपदा से भरा पड़ा है. फिर भी वहां ग़रीबी है, नक्सलवाद है, बेरोज़गारी है और भुखमरी भी. बावजूद इसके कि इस राज्य में टाटा से लेकर मित्तल ग्रुप तक का अरबों का व्यापारिक साम्राज्य कायम है. समृद्धि की कौन कहे, ज़्यादातर वाशिंदों को दो व़क्त की रोटी भी मयस्सर नहीं. वजह यह कि अरबपति औद्योगिक घराने इनकी हक़मारी कर रहे हैं, अपनी जेबें भरने की खातिर इन ग़रीबों के पेट पर लात मार रहे हैं
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दिल किसी पर क्यों यक़ीन करता है, इसका जवाब देना बहुत मुश्किल है. संजीव की बातों पर यक़ीन इसलिए है, क्योंकि गुजरात में उनके साथ जो हो रहा है, वह पहली बार नहीं हुआ और न आख़िरी बार होगा. 2002 के बाद हमने भाजपा की एलिमीनेशन पॉलिसी देखी है, जिसके द्वारा वहां हर उस व्यक्ति को टारगेट किया जाता है, जो नरेंद्र मोदी के विरुद्ध बोलने का साहस करता है.
Tags: BJP, Elimination, Heart, Narendra, Policy, Sanjeev, एलिमीनेशन, दिल, नरेंद्र, पॉलिसी, भाजपा, संजीव Posted in कवर स्टोरी-2, कानून और व्यवस्था, राजनीति, समाज by Author: वसीम रशीद | 4 Comments » | Read More... |
आंध्र प्रदेश के अहम हिस्से तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर पिछले चार दशकों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन अभी तक सरकार किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है. इस मुद्दे पर जहां केंद्र की यूपीए सरकार पर तेलंगाना इलाक़े के अपने नेताओं का दबाव है, वहीं अन्य सियासी दलों के नेता भी सरकार पर जल्द फैसला लेकर आंदोलन खत्म करने के लिए दबाव बना रहे हैं.
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लीबिया, ट्यूनीशिया और मिस्र में सत्ता के विरुद्ध जनता का आंदोलन सफल रहा. तीनों देशों के तानाशाहों को पराजित होना पड़ा, लेकिन आंदोलन अभी थमा नहीं है. अगली बारी यमन की है. यमन में भी सत्ता के विरुद्ध संघर्ष हो रहा है. राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह को सत्ता से बेदखल करने के लिए खूनी जंग चल रही है. सऊदी अरब से इलाज कराकर अब्दुल्ला सालेह की वापसी के बाद हिंसा-प्रतिहिंसा का दौर फिर शुरू हो गया है.
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मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र सरकार से मुसलमानों के लिए आरक्षण की मांग करके इस मुद्दे को एक बार फिर सु़र्खियों में ला दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में कहा है कि अगर अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों की हालत सुधारनी है तो यह ज़रूरी है कि शिक्षा, रोज़गार और दूसरे क्षेत्रों में उनके लिए विकल्प ब़ढाए जाएं. आज़ादी के 64 सालों बाद भी मुसलमान पिछ़डे हुए हैं
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नाटक का पात्र मत बनिए, अज्ञानता के लिए माफी मांगिए. राजद सांसद जगदानंद सिंह कम बोलते हैं, पर जब बोलते हैं तो दो टूक. पिछले चुनाव में जब उन्होंने कहा था कि बेटे का नहीं, पार्टी का साथ दूंगा तो सहसा लोगों को यक़ीन नहीं हुआ, लेकिन जब राजद प्रत्याशी ने उनके पुत्र को हरा दिया तो सूबे की जनता ने माना कि जगदा बाबू जो कहते हैं, वह करते हैं.
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2 अक्टूबर बीत गया. पहली बार देश में 2 अक्टूबर सरकारी फाइलों और सरकारी समारोहों से बाहर निकल करके लोगों के बीच में रहा. लोगों ने गांधी टोपी लगाकर महात्मा गांधी को याद किया. न केवल महात्मा गांधी को याद किया, बल्कि उनके विचारों के ऊपर चर्चाएं कीं, सेमिनार किए. 2 अक्टूबर बीतने के बाद ऐसा लग रहा है कि इस देश में बहुत सालों के बाद गांधी का नाम गांधीवादियों द्वारा नहीं, बल्कि गांधी के विचारों की ताक़त के आधार पर लोगों के मन में घर कर रहा है.
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उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को इस बात से कोई परेशानी नहीं है कि उनके राज्य में पुलिस प्रमुख का पद रिक्त है. बीते अगस्त माह में डीजीपी कर्मवीर सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद आर के तिवारी ने कार्यभार संभाला है, लेकिन अभी तक किसी को स्थायी रूप से पुलिस प्रमुख नहीं बनाया गया है. इसके पीछे कारण कुछ और बताया जा रहा है.
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खबर आई कि प्रणब मुखर्जी ने अपने नोट से चिदंबरम को कठघरे में ला खड़ा किया. इसके बाद एक और खबर आई कि यह नोट तो पीएमओ के कहने पर तैयार किया गया था. दर्जनों बैठकों और कई मंत्रालयों के विचार इस नोट में शामिल हैं. सवाल यह है कि क्या चिदंबरम पर निशाना साधने के लिए किसी ने किसी के कंधे का इस्तेमाल तो नहीं किया है? सवाल यह भी है कि कहीं निगाहें चिदंबरम पर और निशाना कहीं और तो नहीं है?
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छात्र राजनीति और जय प्रकाश आंदोलन का दंभ भरते हुए जेपी के कुछ शिष्य आपको संसद संसद और विधानसभा में हमेशा दिख जाएंगे. जेपी के इन होनहार शिष्यों में लालू प्रसाद यादव का नाम सबसे ऊपर है.
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अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है. कब कौन किसके पक्ष में खड़ा हो जाए और कौन किसके विरोध में, इसका अनुमान लगाना का़फी कठिन होता है. किसी का एक बयान राजनीतिक समीकरणों को बदलने के लिए काफी है
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दिल्ली के रामलीला मैदान हादसे से उबरने के बाद बाबा रामदेव एक बार फिर हुंकार भरने लगे हैं. भारत स्वाभिमान यात्रा के दूसरे चरण में बाबा रामदेव का केंद्र के प्रति हमला और भी तेज हो गया है. बाबा की दूसरे दौर की यात्रा वीरांगना लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि झांसी से शुरू हुई.
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आप सांसद हैं, देवता नहीं |
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