बीती सोलह जनवरी को हिंदी के वरिष्ठ कवि, आलोचक, स्तंभकार अशोक वाजपेयी इकहत्तर बरस के हो गए. उनके जन्मदिन के मौक़े पर इंडिया इंटरनेशलन सेंटर की एनेक्सी में एक बेहद आत्मीय सा समारोह हुआ. उस मौक़े पर वरिष्ठ आलोचक डॉक्टर पुरुषोत्तम अग्रवाल के संपादन में अशोक वाजपेयी पर एकाग्र एक किताब का विमोचन मशहूर चित्रकार रज़ा साहब, अशोक जी और उनकी पत्नी रश्मि जी ने किया.
Tags: Ashok Vajpayee, columnist, critic, painter, poet, अशोक वाजपेयी, आलोचक, कवि, चित्रकार, स्तंभकार Posted in जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
वर्ष 2011 ख़त्म हो गया. देश के विभिन्न समाचारपत्र-पत्रिकाओं में पिछले वर्ष प्रकाशित किताबों का लेखा-जोखा छपा. पत्र-पत्रिकाओं में जिस तरह के सर्वे छपे, उससे हिंदी प्रकाशन की बेहद संजीदा तस्वीर सामने आई. एक अनुमान के मुताबिक़, तक़रीबन डेढ़ से दो हज़ार किताबों का प्रकाशन पिछले साल भर में हुआ.
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एक अच्छी कोशिश हमेशा प्रशंसनीय होती है, लेकिन जब ऐसी कोई कोशिश नए और संसाधनों का अभाव झेलने वाले लोग करते हैं तो वे दो-चार अच्छे शब्दों और शाबाशी के हक़दार ख़ुद-बख़ुद हो जाते हैं. त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका समसामयिक सृजन इसकी मिसाल है.
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तक़रीबन दस-ग्यारह महीने बाद एक बार फिर वर्धा जाने का मौक़ा मिला. वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के छात्रों से बात करने का मौक़ा था. दो छात्रों हिमांशु नारायण और दीप्ति दाधीच के शोध को सुनने का अवसर मिला.
Tags: Deepti Dadhich, Himanshu Narayan, Mahatma Gandhi, Wardha, university, दीप्ति दाधीच, महात्मा गाँधी, वर्धा, विश्वविद्यालय, हिमांशु नारायण Posted in जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
चौथी दुनिया उर्दू में प्रकाशित होने वाले पत्रों में से हर सप्ताह एक सर्वश्रेष्ठ पत्र को पुरस्कृत किया जाता है. पुरस्कार के रूप में उक्त पत्र के लेखक को क़ौमी काउंसिल बराए फ़रोग उर्दू द्वारा एक हज़ार रुपये की पुस्तकें प्रदान की जाती हैं.
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जन लोकपाल बिल पर सरकार और टीम अन्ना के बीच जारी बवाल, रिटेल में विदेशी निवेश पर सरकार, उसके सहयोगी दलों एवं विपक्ष के बीच मचे घमासान और गृहमंत्री चिदंबरम पर एक के बाद एक लग रहे आरोपों के बीच देश में कई अहम खबरें गुम सी हो गईं.
Tags: Anna, Congress, Home Minister, Lok Pal, foreign, government, अन्ना, कांग्रेस, गृहमंत्री, लोकपाल, विदेशी, सरकार Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज, साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
शब्द-शब्द संघर्ष करने वाले साहित्य जगत के शिल्पकार रामनाथ सिंह उ़र्फ अदम गोंडवी नहीं रहे. ग़ुरबत में ज़िंदगी ग़ुजार कर साहित्य की सेवा करने वाले अदम गोंडवी ने अभाव में ज़िंदगी के ताप को महसूस कराने के लिए अपने गांव आटा परसपुर (गोंडा, उत्तर प्रदेश) की ओर से साहित्यानुरागियों का ध्यान खींचने के लिए क़लम को तलवार बनाते हुए कहा था
Tags: Gondvi, Uttar Pradesh, life, literature, scratch, struggle, उत्तर प्रदेश, क़लम, गोंडवी, ज़िंदगी, संघर्ष, साहित्य Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: संजय सक्सेना | No Comments » | Read More... |
दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक हॉवर्ड विश्वविद्यालय इन दिनों विवादों में घिर गया है. विश्वविद्यालय के दो निर्णयों की दुनिया भर में आलोचना हो रही है. पहला निर्णय तो भारतीय राजनेता एवं अर्थशास्त्री सुब्रह्मण्यम स्वामी को गर्मी के दौरान चलने वाले अर्थशास्त्र के दो पाठ्यक्रमों के शिक्षण से हटा देने का है.
Tags: Harvard, Subramanian, World, criticism, economists, university, अर्थशास्त्री, आलोचना, दुनिया, विश्वविद्यालय, सुब्रह्मण्यम, हॉवर्ड Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज, साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
मनुष्य-जातियों का इतिहास उनकी यायावरी प्रवृत्ति से संबद्ध है. यात्रा का मुख्य आकर्षण-बिंदु मनुष्य के सौंदर्य बोध के विकास के साथ-साथ चतुर्दिक् व्याप्त जगत का विस्तार भी है. प्रस्तुत कृति के लेखक अनिल सुलभ ने सौंदर्य बोध की दृष्टि से उल्लास की भावना द्वारा प्रेरित होकर उत्तर और दक्षिण भारत की यात्रा की.
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साहित्य और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है. जब से साहित्यिक लेखन की शुरुआत हुई है, तभी से विषयों को लेकर मतांतर भी हैं. उसी मतांतर की परिणति विवादों में होती है. कुछ विवाद घोर साहित्यिक होते हैं
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किसी देश के विकास को जानने और समझने के लिए वहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का महत्वपूर्ण योगदान है. हमारे देश में ऐसी अनेक इमारतें हैं, जिनसे देश की प्राचीन संस्कृति का पता चलता है.
Tags: Fort, Heritage, book, cultural, historical, review, ऐतिहासिक, क़िला, धरोहर, पुस्तक, समीक्षा, सांस्कृतिक Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, राज्य, समाज, साहित्य by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
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जनता भोली होती है, बेवक़ू़फ नहीं |
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