मानव सभ्यता का विकास ज़रूरत के टुच्चे सिद्धांत के चलते नहीं, बल्कि सौंदर्यबोधात्मक चेतना के कारण हुआ है.
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स़िर्फ और स़िर्फ यही एक तसल्ली की बात है कि इस बदलते हुए बेचैन व़क्त और बदहवास दौर में मुक़म्मल तहज़ीब का ऩक्शा तैयार करते शायर शहरयार हमारे साथ हैं, नहीं तो हम भी यही कहते हैं, आंखों से कहो अब मांगे ख्वाबों के सिवा जो चाहे..
Tags: Galib, Shaharyar, civilization, history, language, magazine, इतिहास, गालिब, धर्म, पत्रिका, भाषा, सभ्यता Posted in साहित्य by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
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आप सांसद हैं, देवता नहीं |
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