हिंदुस्तान में महिलाओं का स्वास्थ्य हाशिए पर है. देश में गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के समय आने वाली जटिलताओं के कारण हर 10 मिनट में एक महिला की मौत हो जाती है. वहीं महिलाएं कई और तरह की जानलेवा बीमारियों के कारण असमय ही मौत के मुंह में समा जाती हैं, लेकिन सरकार इस [...]
Tags: अल्पविकसित देश, एनीमिया, कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, महिलाओं का स्वास्थ्य हाशिए पर, महिलाओं में जागरूकता, मोटापा, स्तन कैंसर, हिंदुस्तान में महिलाओं का स्वास्थ्य, हृदय रोग Posted in स्वास्थ्य by Author: प्रियंका प्रियम तिवारी | No Comments » | Read More... |
बच्चे यानी देश का भविष्य, लेकिन हर साल दम तोड़ते इन हज़ारों-लाखों बच्चों की चिंता किसी को भी नहीं है. न तो उत्तर प्रदेश सरकार को और न ही केंद्र सरकार को, क्योंकि अगर चिंता होती, तो एम्स की तर्ज पर प्रस्तावित अस्पताल गोरखपुर में स्थापित करने का निर्णय लिया जाता, न कि सोनिया गांधी [...]
Tags: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, इंसेफेलाइटिस, एम्स, कब्रगाह पूर्वांचल, गोरखपुर में बीआरडी कॉलेज, गोरखपुर यूनिट, गोरखपुर हेल्थ फोरम, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पैरामेडिकल स्टाफ, बकौल मिश्र, राधे मोहन मिश्रा, रायबरेली, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, स्वास्थ्य सुरक्षा योजना Posted in कवर स्टोरी-2, राजनीति, स्वास्थ्य by Author: शशि शेखर | No Comments » | Read More... |
देश में लोगों की एक ग़लत धारणा है कि बच्चों को टीबी की बीमारी बहुत कम होती है, जबकि सच यह है कि टीबी किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को हो सकती है. देश में हर वर्ष लगभग दो लाख मौतें टीबी की वजह से होती हैं. जिनमें एक बड़ी संख्या बच्चों की भी [...]
Tags: इलाज, ऑक्सीजन, ख़ून, खांसी, खाना-पीना, जागरूकता, टीबी, टीबी गांठें, दिमाग की टीबी, देश, निमोनिया, निवाला, प्राइमरी कांप्लेक्स, प्रोग्रेसिव टीबी, प्रोग्रेसिव प्राइमरी टीबी, बच्चो, बाल टीबी, बीमारी, बुखार, मिलियरी टीबी, लक्षण, लोगों, वयस्कों, व्यक्ति, हड्डी की टीबी Posted in स्वास्थ्य by Author: नवीन चौहान | No Comments » | Read More... |
अप्रकट संक्रमण वह है, जब आपको टीबी के कोई लक्षण नहीं दिखते. बैक्टीरिया आपके शरीर में होता तो है, पर वह सक्रिय नहीं होता. सक्रिय टीबी तब होती है, जब लोगों को इसके लक्षण दिखने लगते हैं…तो कैसे बचें इसकी मार से? क्षय, तपेदिक अथवा टीबी एक घातक और संक्रामक बीमारी है. सच तो यह [...]
Tags: अफ्रीका, अमेरिका, इलाज, कीटाणु, चीन, जागरूक, जानलेवा, टीबी, डॉट्स प्लस, दवा, देश, पक्का इलाज, फेफड़ों, बलगम, बीमारी, बीसीजी का टीका, भारत, माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस, मुंबई, मेडिकल स्टोरों, यूरोप, राजधानी, रूस, लक्षण, लाइलाज, विश्व स्वास्थ्य संगठन, वैज्ञानिक, शरीर, संक्रमित, समाज, सरकार Posted in स्टोरी-6, स्वास्थ्य by Author: मृदुल कुमार सिंह | No Comments » | Read More... |
दुनिया भर में एड्स को फैलने से बचाने के लिए तमाम मुहिमें चल रही हैं. वैज्ञानिक इसका इलाज ढूंढने के लिए दिन-रात एक करने में लगे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि एड्स के अलावा कई गंभीर बीमारियां हैं, जो लाइलाज हैं. सरकार मस्न्युलर डिस्ट्रॉफी जैसी बीमारियों के लिए न तो आंकड़े उपलब्ध करा पा [...]
Tags: अनजान रोग, इंद्रप्रस्थ हॉस्पिटल, केंद्र, गोरखपुर, चिकित्सा, जनसंख्या, डॉ. सिंघल, थैलेसीमिया, दुनिया, देश, नवजात शिशु, फीजियोथैरेपी, बीमारियों, भारत, मस्न्युलर डिस्ट्रॉफी, मांसपेशियों, मुस्लिम समुदाय, विकलांग, विकलांगता, व्हीलचेयर, सरकारी सुविधाओं, स्यूडोहाइपरट्रॉफी, स्वास्थ्य, हड्डियों, हॉस्पिटल Posted in स्टोरी-6, स्वास्थ्य by Author: नवीन चौहान | No Comments » | Read More... |
दवा, डॉक्टर एवं दुकानदार के प्रति भोली-भाली जनता इतना विश्वास रखती है कि डॉक्टर साहब जितनी फीस मांगते हैं, दुकानदार जितने का बिल बनाता है, को वह बिना किसी लाग-लपेट के अपना घर गिरवी रखकर भी चुकाती है. क्या आप बता सकते हैं कि कोई घर ऐसा है, जहां कोई बीमार नहीं पड़ता, जहां दवाओं की ज़रूरत नहीं पड़ती? यानी दवा इस्तेमाल करने वालों की संख्या सबसे अधिक है. किसी न किसी रूप में लगभग सभी लोगों को दवा का इस्तेमाल करना पड़ता है, कभी बदन दर्द के नाम पर तो कभी सिर दर्द के नाम पर.
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भारत दवाओं का एक ब़डा बाज़ार है. यहां बिकने वाली तक़रीबन 60 हज़ार ब्रांडेड दवाओं में महज़ कुछ ही जीवनरक्षक हैं. बाक़ी दवाओं में ग़ैर ज़रूरी और प्रतिबंधित भी शामिल होती हैं. ये दवाएं विकल्प के तौर पर या फिर प्रभावी दवाओं के साथ मरीज़ों को ग़ैर जरूरी रूप से दी जाती हैं. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए गठित संसद की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दवाओं के साइड इफेक्ट की वजह से जिन दवाओं पर अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों में प्रतिबंधित लगा हुआ है, उन्हें भारत में खुलेआम बेचा जा रहा है.
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हाल में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं और 43 फीसदी पांच साल से कम उम्र के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बच्चे कमज़ोर और एनीमिया से ग्रसित हैं. इन क्षेत्रों के 48 प्रतिशत बच्चों का वज़न उनकी उम्र के अनुपात में बहुत कम है. यूनिसेफ द्वारा चिल्ड्रन इन अर्बन वर्ल्ड नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी ग़रीबों में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है, जहां गंभीर बीमारियों का स्तर गांव की तुलना में अधिक है.
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साल 2012 में हमें यह सोचकर खुश होना चाहिए कि समाज के कर्णधार यानी हमारी नौजवान पी़ढी अब ज़्यादा स्वस्थ हो रही है. देश के सर्वोच्च स्वास्थ्य संस्थान एम्स द्वारा 19 ब़डे शहरों में किए गए सर्वे के अनुसार, साल 1992 के मुक़ाबले 2012 के युवा ज़्यादा लंबे और वज़न में भारी हो रहे हैं. इसी तथ्य पर सरकार यह मानती है कि पोषण में पौष्टिकता ब़ढने की वजह से बच्चे अब स्वस्थ हो रहे हैं.
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देश में स्वास्थ्य के मामले में महिलाओं की हालत बेहद बदतर है. हालत यह है कि हर साल क़रीब एक लाख महिलाएं एनीमिया की वजह से मौत का शिकार हो रही हैं, जबकि 83 फ़ीसदी महिलाएं ख़ून की कमी की बीमारी से पीड़ित हैं. एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक़, देश में पांच साल से कम उम्र के 42 फ़ीसदी बच्चे कम वज़न के हैं और 69.5 फ़ीसदी बच्चों में ख़ून की कमी है
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स्पेनिश नेशनल कैंसर रिसर्च सेंटर ने प्टेन जीन को लेकर काम तो यह शुरू किया था, ताकि कैंसर सेल पर शोध की जा सके. शोध आगे बढ़ा तो पता चला कि इस जीन को यदि थोड़ा-सा बदल दिया जाए तो कैंसर के साथ मोटापे की समस्या से भी निजात पाई जा सकती है.
Tags: Spanish, cancer, chemicals, doctors, genes, कैंसर, जीन, डॉक्टर, रसायन, स्पेनिश Posted in जरुर पढें, स्वास्थ्य by Author: चौथी दुनिया ब्यूरो | No Comments » | Read More... |
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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