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2 thoughts on “संपर्क

  • September 10, 2017 at 3:19 PM
    Permalink

    लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ “मीडिया” खतरे में…!
    देश में पांच सितम्बर को गौरी लंकेश जैसी महान पत्रकार की हुई हत्या जो समाज के लिए निंदनीय है। उनकी हत्या के बाद सोशल मीडिया पर उनके लिए प्रयोग की गयी अभद्र भाषा हमारी सांस्कृति को शोभा नहीं देता। इस अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों पर कार्यवाही होनी चाहिए। भारत में बक्शी तीरार्थ सिंह (1992) इरफ़ान हुसैन (1999) शिवानी भटनागर (1999) रामचन्द्र छत्रपति (2002) राजेश वर्मा (2013) संदीप कोठरी (2015) राजदेव रंजन (2016) और अब गौरी लंकेश (2017) जैसे महान पत्रकारो की हत्याएं हो चुकी है। यह हत्याएं किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे समाज की हत्याएं है। मीडिया समाज की आवाज होती है और इस आवाज़ का लगातार गला घोटा जा रहा है। कभी डरा-धमकाकर तो कभी लालच देकर समाज की आवाज़ को निरंतर चुप कराया जाता रहा है।
    चूँकि मैं भी पत्रकारिता के क्षेत्र से हूँ वर्तमान में मास कम्युनिकेशन (अंतिम वर्ष) का छात्र हूँ इससे पूर्व मैंने अपने गृह जनपद फर्रुखाबाद में “यूथ इण्डिया” समाचार पत्र में पत्रकार के रूप में कार्य किया जहाँ भू-माफियाओं के खिलाफ संपादक शरद कटियार के निर्देशन में समाचारों का प्रकाशन करने के बाद धमकियों का सामना कर चूका हूँ। हालाँकि माता-पिता के मना करने पर कुछ ही समय में मुझे इस अखबार को छोड़ना पड़ा। मुझे नहीं मालूम मेरा यह फैसला सही था या गलत…! लेकिन इस अखबार के (यूथ इण्डिया) संपादक शरद कटियार को झूठे मुक़दमे में फंसाकर 19 अगस्त 2017 को गिरफ्तार किया गया है। क्यूंकि वह अपनी धारदार कलम से सफेदपोश भू-माफियाओं एवं गुंडों की असलियत को सामने लाने का कार्य करते रहे है। इससे पूर्व उनपर कई जानलेवा हमले भी हो चुके है। लेकिन आज भी वह इस आन्दोलन से पीछे नहीं हट रहे है।
    अगर ऐसा ही रहा तो यकीनन मीडिया का अस्तित्व ही मिट जायेगा। मीडिया का कार्य समाज की बुराईयों से पर्दा उठाना और सच्चाई को सामने लाना है जबकि मीडिया को सफेदपोश अपने इशारो पर नाचने देखना चाहते है। अब वक़्त है कि प्रत्येक नागरिक को मीडिया की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा के लिए आवाज़ उठानी चाहिए। झूठी और बिकाऊ पत्रकारिता से समाज को कोई लाभ नहीं है। सरकार को चाहिए कि कलम के कातिलों को कठोर से कठोर सजा दी जाये एवं मीडिया की सुरक्षा एवं स्वतंत्रता के लिए कानून बनाया जाये और अगर ऐसा कर पाना संभव न हो तो लोकतंत्र के चौथा स्तम्भ “मीडिया” को लोकतंत्र से ही बाहर कर देना चाहिए।

    मोहम्मद आकिब खाँन
    पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, केएमआई
    डॉ० भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा
    aqibfarrukhabadi@gmail.com
    +91-9044441004
    कृपया लेख प्रकाशित होने पर सूचना देने का कष्ट करें…..!!!

    Reply
  • August 14, 2017 at 1:04 PM
    Permalink

    राष्ट्रीय ख्याति के बीसवे अम्बिकाप्रसाद दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकें आमंत्रित ।
    “साहित्य सदन” भोपाल द्वारा राष्ट्रीय ख्याति के बीसवे अम्बिकाप्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों हेतु साहित्य की अनेक विधाओं में पुस्तकें आमंत्रित की गई हैं । उपन्यास , कहानी , कविता , व्यंग , निबन्ध एवं बाल साहित्य विधाओं पर प्रत्येक के लिए इक्कीस सौ रुपये राशि के पुरस्कार प्रदान किये जायेंगे । दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकों की दो प्रतियाँ , लेखक के दो चित्र एवं प्रत्येक विधा की प्रविष्टि के साथ 200 /- दो सौ रुपये प्रवेश शुल्क भेजना होगा । हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकों की मुद्रण अवधि 1 जनवरी2015 से लेकर 31 दिसम्बर 2017 के मध्य होना चाहिये । राष्ट्रीय ख्याति के इन प्रतिष्ठापूर्ण चर्चित दिव्य पुरस्कारों हेतु प्राप्त पुस्तकों पर गुणवत्ता के क्रम में दूसरे स्थान पर आने वाली पुस्तकों को दिव्य प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जायेगा ।
    अन्य जानकारी हेतु मोबाइल नं. 09977782777 और दूरभाष : 0755-2494777 , एवं ईमेल : jagdishkinjalk@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है ।
    पुस्तकें भेजने का पता है :
    श्रीमती राजो किंजल्क ,
    साहित्य सदन ,
    145-ए , सांईनाथ नगर , सी सेक्टर ,
    कोलार रोड , भोपाल – 462042
    पुस्तकें प्राप्त करने की अंतिम तिथि 30 दिसम्बर 2017 है ।
    कृपया प्रेषित पुस्तकों पर पेन से कोई भी शब्द न लिखें । ( Press Note for publication Please ) -Jagdish Kinjalk, Bhopal. M.P.

    Reply

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