अगले छह महीने बाद भारत बदलने वाला है

मानना चाहिए कि अगले छह महीने में भारत बदलने वाला है. कहने वाले तो कह रहे हैं कि भारत बदल

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लोकतंत्र के नाम पर तानाशाही लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है

पिछले पंद्रह सालों में मध्य प्रदेश में, छत्तीसगढ़ में, पांच सालों में राजस्थान में सरकारों ने क्या वायदे किए, राजनीतिक

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संवैधानिक संस्थाएं जन भावना से संचालित नहीं होती हैं

ये सारी चीजें हम जैसों को सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर

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सर्वोच्च पद और संस्था को मज़ाक़ का विषय मत बनाइए

हमें अगर अपने संस्थान पर नियंत्रण रखना है या अपना वर्चस्व बनाए रखना है या अपने नेतृत्व के प्रति पूरे

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ज़िंदगी की चुनौतियों का सामना मुस्कुरा कर करना चाहिए

कल्पेश याग्निक एक ऐसे पत्रकार थे, जो स्वयं में एक संस्था थे. कल्पेश याग्निक ने विश्वविद्यालय की खबरों से जिंदगी

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अर्बन नक्सल जैसे शब्द सत्ता के दिमागी दिवालिएपन की उपज हैं

नए-नए शब्द हमारे सामने आते रहते हैं. अब एक नया शब्द आया है, अर्बन नक्सलिज्म. इस शब्द को गढ़ने वाली

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नई कार्यकारिणी से निराश हैं कांग्रेस के कार्यकर्ता

अब कांग्रेस राहुल गांधी की कांग्रेस है. हालांकि पिछले दस साल से राहुल गांधी कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रहे और

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हिन्दी की चिंता दुनिया को है लेकिन हम ख़ुद बेख़बर हैं

पिछले दिनों जब पूरा यूरोप फुटबॉल वर्ल्ड कप के बुखार में था, उस दौरान लंदन में था. लंदन की हर

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विपक्ष अपनी ग़लतियों से सीखने के लिए तैयार नहीं है

मुझे नहीं लगता कि विरोधी पक्ष में रहने वाले कोई सीख ले पाएंगे और यही प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह

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उपचुनाव परिणाम: जनता की इस चेतावनी को समझिए

लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव के परिणाम सामने आ गए हैं. अभी पिछले हफ्ते हमने चौथी दुनिया की लीड स्टोरी की

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राजनीतिक दलों से लोकलाज और नैतिकता की उम्मीद बेमानी है

वक्त, नैतिकता, नियम-कानून कैसे बदलते हैं, इसका प्रमाण और इसका मनोविज्ञान आज हमारे सामने है. आजादी के बाद देश के

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जनता के सवालों पर बहस की उम्मीद करना बेमानी है

कर्नाटक चुनाव बीत गया. कर्नाटक का कोई भी असल मुद्दा किसी भी भाषण में न भारतीय जनता पार्टी ने उठाया

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जनसमस्याओं के समाधान की इच्छाशक्ति किसी भी राजनीतिक दल में नहीं है

अभी भी देश में ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जो चुनाव में किस पार्टी ने क्या किया और कौन

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