मौसम विभाग का पूर्वानुमान, लगातार तीसरे साल सामान्य रहेगा मानसून

मौसम विभाग की तरफ से जारी किए गए पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल जून से सितंबर के दौरान 97% बारिश

Read more

ये शौचालय का पैसा भी खा जाते हैं!

संयुक्त राष्ट्र से आए प्रतिनिधि लियो हेलर ने भारत के एक दौरे के बाद यहां की जल एवं स्वच्छता नीतियों

Read more

नर्मदा सरदार सरोवर बांध विस्थापितों की मांग: विस्थापन मंजूर पर पहले हो पुनर्वास

नर्मदा आंदोलन ने पर्यावरण तथा विकास के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है. सुप्रीम कोर्ट

Read more

गर्मी ने तो बस ट्रेलर दिखाया है, पूरी फिल्म अभी बाकी है

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : पूरे देश में गर्मी का प्रकोप अभी से दिखाई देने लगा है. इस गर्मी का

Read more

गर्मी को लेकर अलर्ट जारी, इस साल मार्च महीने से ही झेलने पड़ेंगे लू के थपेड़े

अभी मार्च का महीना समाप्त होने को है और गर्मी का कहर दिखाई देने लगा है. मार्च के महीने में

Read more

दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए अरविंद केजरीवाल का प्लान ‘JET’

नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया) : राजधानी में पारा गिरते ही प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। पिछले साल अरविंद

Read more

स्मॉग: अस्थमा और एलर्जी के मरीजों में इजाफा, खुद को रखें ध्यान

नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया): दीवाली के बाद से दिल्ली एक गैस के चैंबर में तब्दील होती जा रही है।

Read more

जैविक खेती : और कारवां बढ़ता ही जा रहा है…

एक कहावत है कि कोई भी मुश्किल ऐसी नहीं है, जो आसान न हो जाए. बस किसी मुश्किल को आसान

Read more

हर दिन, हर पल मनाएं : विश्व पर्यावरण दिवस

यह ख़ुशी की बात है कि हमने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया. हमारे लिए हर दिन, हर लम्हा,

Read more

पेड़ों की तस्करी का ज़िम्मेदार कौन

आम तौर पर पर्यावरण को हरा-भरा रखने के साथ ही वातावरण को स्वच्छ बनाये रखने के लिए सरकार द्वारा पेड़-पौधे

Read more

कश्मीर घाटी में पर्यटक सीज़न ख़तरे में…

  अफ़ज़ल की फांसी के बाद यहां काफी फ़र्क़ पड़ा है. दरअसल, मार्च और अप्रैल के पर्यटन सीज़न को बहुत

Read more

जल, जंगल और ज़मीन बचाने में जुटे आदिवासी

आदिवासियों की पहचान जल, जंगल और ज़मीन से ज़रूर है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण उन्हें इन

Read more

किसानो की मांग समर्थन मूल्य नहीं लाभकारी मांग चाहिए

खुदरा बाज़ार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को केंद्र सरकार भले ही किसानों की भलाई के लिए उठाया गया क़दम मानती

Read more

सीमेंट कारखानों के लिए भूमि अधिग्रहण : किसान आखिरी दम तक संघर्ष करें

देश में जब भी भूमि अधिग्रहण की बात होती है, तो सरकार का इशारा आम आदमी और किसान की तऱफ होता है. आज़ादी के बाद से दस करोड़ लोग भूमि अधिग्रहण की वजह से विस्थापित हुए हैं. अपनी माटी से अलग होने वालों में कोई पूंजीपति वर्ग नहीं होता. विकास की क़ीमत हमेशा आम आदमी को ही चुकानी पड़ी है. जिनके पास धन है, वे दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में अपने मनमाफिक मकान ख़रीद सकते हैं, लेकिन वह आम आदमी, जिसके पास अपनी जीविका और रहने के लिए ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा है, उसे बेचकर आख़िर वह कहां जाएगा? ऐसे कई ज्वलंत सवालों पर पेश है चौथी दुनिया की यह ख़ास रिपोर्ट…

Read more

यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

Read more

सरकार जवाब दे यह देश किसका है

हाल में देश में हुए बदलावों ने एक आधारभूत सवाल पूछने के लिए मजबूर कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह देश किसका है? सरकार द्वारा देश के लिए बनाई गई आर्थिक नीतियां और राजनीतिक वातावरण समाज के किस वर्ग के लोगों के फायदे के लिए होनी चाहिए? लाजिमी जवाब होगा कि सरकार को हर वर्ग का ख्याल रखना चाहिए. आज भी देश के साठ प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं. मुख्य रूप से सरकारी और निजी क्षेत्र में काम कर रहा संगठित मज़दूर वर्ग भी महत्वपूर्ण है.

Read more

एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

Read more

सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए भूमि अधिग्रहणः खूनी मैदान में तब्‍दील हो सकता है नवलगढ़

करीब पांच दशक पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1959 को जिस राजस्थान के नागौर ज़िले में पंचायती राज का शुभारंभ किया था, उसी सूबे की पंचायतों और ग्राम सभाओं की उपेक्षा होना यह साबित करता है कि ग्राम स्वराज का जो सपना महात्मा गांधी और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने देखा था, वह आज़ादी के 65 वर्षों बाद भी साकार नहीं हो सका.

Read more

शेखावटी- जैविक खेती : …और कारवां बनता जा रहा है

पंजाब में नहरों का जाल है. गुजरात और महाराष्ट्र विकसित राज्य की श्रेणी में हैं. बावजूद इसके यहां के किसानों को आत्महत्या करनी प़डती है. इसके मुक़ाबले राजस्थान का शेखावाटी एक कम विकसित क्षेत्र है. पानी की कमी और रेतीली ज़मीन होने के बाद भी यहां के किसानों को देखकर एक आम आदमी के मन में भी खेती का पेशा अपनाने की इच्छा जागृत होती है, तो इसके पीछे ज़रूर कोई न कोई ठोस वजह होगी. आखिर क्या है वह वजह, जानिए इस रिपोर्ट में:

Read more

जनता को चिढ़ाइए मत, जनता से डरिए

शायद सरकारें कभी नहीं समझेंगी कि उनके अनसुनेपन का या उनकी असंवेदनशीलता का लोगों पर क्या असर पड़ता है. फिर चाहे वह सरकार दिल्ली की हो या चाहे वह सरकार मध्य प्रदेश की हो या फिर वह सरकार तमिलनाडु की हो. कश्मीर में हम कश्मीर की राज्य सरकार की बात इसलिए नहीं कर सकते, क्योंकि कश्मीर की राज्य सरकार का कहना है कि वह जो कहती है केंद्र सरकार के कहने पर कहती है, और जो करती है वह केंद्र सरकार के करने पर करती है.

Read more

मणिपुर जमीन की एक लड़ाई यहां भी

क्या पूर्वोत्तर को तभी याद किया जाएगा, जब कोई सांप्रदायिक हिंसा होगी, जब लोगों का खून पानी बनकर बहेगा? या तब भी उनके संघर्ष को वह जगह मिलेगी, उनकी आवाज़ सुनी-सुनाई जाएगी, जब वे अपने जल, जंगल एवं ज़मीन की लड़ाई के लिए शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध करेंगे? मणिपुर में तेल उत्खनन के मसले पर जारी जनसंघर्ष की धमक आखिर तथाकथित भारतीय मीडिया में क्यों नहीं सुनाई दे रही है? एस बिजेन सिंह की खास रिपोर्ट :-

Read more

संशोधित भूमि अधिग्रहण बिल: काला कानून, काली नीयत

उदारीकरण का दौर शुरू होते ही जब सवा सौ साल पुराने भूमि अधिग्रहण क़ानून ने अपना असर दिखाना शुरू किया, तब कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को यह मुद्दा अपनी छवि बनाने के एक अवसर के रूप में दिखा. नतीजतन, अपनी तऱफ से उन्होंने इस कानून में यथाशीघ्र संशोधन कराने की घोषणा कर दी. घोषणा चूंकि राहुल गांधी ने की थी, इसलिए उस पर संशोधन का काम भी शुरू हो गया.

Read more

राजस्‍थान का नंदीग्राम नवलगढ़ : सीमेंट फैक्‍ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण

बिन पानी सब सून. राजस्थान के अर्द्ध मरुस्थलीय इलाक़े शेखावाटी की हालत कुछ ऐसी ही है. यहां के किसानों को बोरवेल लगाने की अनुमति नहीं है. भू-जल स्तर में कमी का खतरा बताकर सरकार उन्हें ऐसा करने से रोकती है. दूसरी ओर राजस्थान सरकार ने अकेले झुंझुनू के नवलगढ़ में तीन सीमेंट फैक्ट्रियां लगाने की अनुमति दे दी है. इसमें बिड़ला की अल्ट्राटेक और बांगड़ ग्रुप की श्री सीमेंट कंपनी शामिल है.

Read more

कैसे बचेगी गंगा-जमुनी तहजीब

गंगा की निर्मलता तभी संभव है, जब गंगा को अविरल बहने दिया जाए. यह एक ऐसा तथ्य है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है, लेकिन गंगा की स़फाई के नाम पर पिछले 20 सालों में हज़ारों करोड़ रुपये बहा दिए गए और नतीजे के नाम पर कुछ नहीं मिला. एक ओर स़फाई के नाम पर पैसों की लूटखसोट चलती रही और दूसरी ओर गंगा पर बांध बना-बनाकर उसके प्रवाह को थामने की साजिश होती रही.

Read more

जनसंवाद यात्रा : औधोगीकरण बनाम कृषि भूमि का मुद्दा उठाया

जनसंवाद यात्रा का प़डाव सूरत ज़िले का मांडवी था, जहां नगर पंचायत मांडवी की ओर से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की एक संयुक्त बैठक का आयोजन शिक्षक भवन में किया गया था. मांडवी ज़िले का यह क्षेत्र अपनी उर्वरा भूमि के लिए प्रसिद्ध है. विगत 20 वर्षों से सभी सरकारों द्वारा लगातार यह आश्वासन दिया जाता रहा है कि नर्मदा नदी में बांध बनने के पश्चात खेतों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा और लोगों के लिए पेयजल उपलब्ध होगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

Read more

भारतीय जल नीति के खतरे

यूनेस्को ने यूनाइटेड नेशन्स वर्ल्ड वाटर डेवलपमेंट रिपोर्टः मैनेजिंग वाटर अंडर अनसर्टेंटी एंड रिस्क पेश की है. इस रिपोर्ट में 2009 के विश्व बैंक के दस्तावेज़ का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि भारत में विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण ने 2009 में एक परियोजना चलाई थी, जिसका उद्देश्य 2020 तक बिना ट्रीटमेंट के नाली तथा उद्योगों के गंदे पानी को गंगा में छोड़े जाने से रोकना था, ताकि गंगा के पानी को सा़फ किया जा सके. गंगा के प्रदूषण के लिए खुली जल निकासी व्यवस्था सबसे अधिक ज़िम्मेदार है.

Read more

बंजर भूमि का बढ़ता खतरा

उपजाऊ शक्ति के लगातार क्षरण से भूमि के बंजर होने की समस्या ने आज विश्व के सामने एक बड़ी चुनौती पैदा कर दी है. सूखा, बाढ़, लवणीयता, कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल और अत्यधिक दोहन के कारण भू-जल स्तर में गिरावट आने से सोना उगलने वाली उपजाऊ धरती मरुस्थल का रूप धारण करती जा रही है.

Read more

आबादी पर काबू पाने में सरकार नाकाम

विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई पर विशेष वर्ष 2000 में बनी राष्ट्रीय जनसंख्या नीति का मुख्य उद्देश्य 2045 तक स्टेबल

Read more

उत्तराखंडः पिंडरगंगा घाटी, ऐसा विकास किसे चाहिए

पिंडरगंगा घाटी, ज़िला चमोली, उत्तराखंड में प्रस्तावित देवसारी जल विद्युत परियोजना के विरोध में वहां की जनता का आंदोलन जारी है. गंगा की सहायक नदी पिंडरगंगा पर बांध बनाकर उसे खतरे में डालने की कोशिशों का विरोध जारी है. इस परियोजना की पर्यावरणीय जन सुनवाई में भी प्रभावित लोगों को बोलने का मौक़ा नहीं मिला. आंदोलनकारी इस परियोजना में प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं.

Read more