अडानी का धंधा : भारत में खामोशी ऑस्ट्रेलिया में तू़फान

जिस तरह देश में कुछ खास पूंजी घरानों का मकड़जाल फैलता जा रहा है, उससे साफ-साफ लगता है कि सत्ता

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बर्मा तक घुस आया था चीन

बहुत लोगों को यह पता नहीं है कि तिब्बत के निर्वासित धर्मगुरु दलाईलामा के अरुणाचल आगमन के ठीक एक महीने

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मई में बनेगी नई पार्टी मुलायम जेपी बनेंगे

विपक्षी एकता को ग्रहण लगा हुआ है. एकता हो पाएगी, नहीं हो पाएगी, कौन करेगा, नहीं करेगा, किसके साथ करेंगे,

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आधार का रहस्य – प्रधानमंत्री आधार कार्ड के समर्थक क्यों बने?

इस देश में अजीब माहौल बन गया है. सभी लोग अच्छी-अच्छी बातें बोलना और सुनना चाहते हैं. देश का भविष्य

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माफ कर दिया यूपी के किसानों का कर्ज : योगी के बड़े फैसले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आश्वासन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरा किया. मोदी ने चुनावी सभा में उत्तर प्रदेश के छोटे

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बीसीसीएल-डीवीसी-धनवाद : कोयला घोटाला + फर्जी विस्थापित दो घोटालों की एक कहानी

25 साल पुराने एक घोटाले की कहानी अभी क्यों? इसलिए, क्योंकि इससे जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि सारी जानकारी दिए

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प्रशांत किशोर यानि पीके ने नाक कटाई

रणनीति और राजनीति पर्यायवाची शब्द नहीं हैं. इन दोनों में जमीन और आसमान का फर्क है. चाहे वो राजनीति का सबसे बड़ा धुरंधर ही क्यों न हो, जब भी किसी ने रणनीति को राजनीति समझने की गलती की, वो चौपट हो गया. अगर चुनाव सिर्फ रणनीति के सहारे जीते जा सकते, तो पूरी दुनिया में राजनीति शास्त्र के पंडितों व विश्लेषकों की सत्ता होती. फिर राजनीतिक नेता और जननायकों की जरूरत ही नहीं पड़ती, पार्टी की जरूरत नहीं होती, विचारधारा की जरूरत नहीं होती, संगठन व कार्यकर्ताओं की भी जरूरत नहीं पड़ती. फिर कोई भी धनाढ्य व्यक्ति महंगे से महंगे रणनीतिकार को भाड़े पर रख लेता और चुनाव जीत जाता. आज देश के कई राजनीतिक विश्लेषकों को शर्मसार होना पड़ रहा है, क्योंकि वे रणनीति और राजनीति का फर्क भूल गए. राजनीतिज्ञों से श्रेय छीनकर उन्होंने रणनीतिकार को सुपर-हीरो घोषित करने की भूल की. प्रशांत किशोर यानि ‘पीके’ नाम के प्रसिद्ध पेशेवर चुनावी-रणनीतिकार का महिमामंडन इसी भूल का नतीजा है.

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यूपी के पीठाधीश्वर

उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा इसे लेकर चुनाव के पहले और चुनाव परिणाम आने के बाद तक तमाम कयासबाजियां

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम : भाजपा के लिए भी अविश्वसनीय है

चुनाव के अप्रत्याशित परिणाम हमारे सामने हैं. ये परिणाम बताते हैं कि जब इच्छाओं का सत्य के साथ मिश्रण होता

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ये बनेंगे राष्ट्रपति

इस वर्ष जुलाई में राष्ट्रपति का चुनाव होगा. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निर्विवादित कार्यकाल खत्म होने जा रहा है. वे

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मदरसों की बेजा गतिविधियों के खिलाफ लखनऊ में बड़ी मुहिम : धर्म का धंधा बहुत ही गंदा

उत्तर प्रदेश में मदरसों का धंधा बेतहाशा चल रहा है. देश-विदेश के विभिन्न स्रोतों से आने वाला फंड धंधेबाजों को

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