भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने नशे की हालत में हिरोइन से की मारपीट

‘लॉलीपॉप लागेलू’ गाने से शोहरत बटोर चुके बॉलीवुड एक्टर और सिंगर पवन सिंह एक बार फिर से चर्चा में आ

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बॉलीवुड मेगाबजट फिल्म ‘महाभारत’ में एक साथ नज़र आ सकते हैं तीनों खान

बॉलीवुड में अब तक कई सारी फिल्में बन चुकी हैं जिनमें कई सारी फिल्में बेहद ही बड़े बजट में बनकर

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अमेरिकी मीडिया पर ट्रंप का ट्वीट अटैक, कहा- मीडिया अमेरिकी लोगों का दुश्मन है

नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी मीडिया से दो-दो हाथ करने के मूड में साफ नजर आ रहे

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आधार बिल पर बहस : संसद में फिर लहराया चौथी दुनिया

संसद में एक बार फिर चौथी दुनिया अख़बार लहराया. इस बार जनता दल यूनाइटेड के सांसद केसी त्यागी ने राज्यसभा

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बिहार विधानसभा चुनाव सर्वे का बाज़ार गर्म है

बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही चुनावी सर्वे का बाज़ार गर्म हो गया. कई टीवी चैनलों और अ़खबारों

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दिल्ली का बाबू : सार्क यात्रा के मायने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत की प्राथमिकता पड़ोसी देशों में अपना प्रभाव बढ़ाना है. इसलिए

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आखिर क्यों मारा जाता है एक पत्रकार

पत्रकारों के हितों की पैरोकार न्यूयॉर्क की संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) की एक रिपोर्ट में उन देशों का

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पेट्रोगेट और तेल कंपनियां : सच साबित हुई चौथी दुनिया की चार साल पुरानी रिपोर्ट

चार साल पहले चौथी दुनिया ने अपनी स्टोरी, जिसका शीर्षक था-तेल कंपनियां या सरकार, देश कौन चला रहा है, में

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कब होगी न्यायालय की अवमानना?

पिछले अंक में हमने आपको आरटीआई के तहत तीसरे पक्ष के बारे में बताया था. हम उम्मीद करते हैं कि

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आरटीआई की दूसरी अपील

आरटीआई अधिनियम सभी नागरिकों को लोक प्राधिकरण द्वारा धारित सूचना की अभिगम्यता का अधिकार प्रदान करता है. यदि आपको किसी

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सरकार का भोंपू : दूरदर्शन और आकाशवाणी

देश एक ब़डे क्रांति के मुहाने पर है. सूचना क्रांति के तहत आकाशवाणी और दूरदर्शन को जब इसमें ब़ढ-च़ढ कर

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समाचार पत्रों पर अंकुश कितना जरूरी

 न्यायमूर्ति मैथ्यू ने दूसरे प्रेस आयोग की भी अध्यक्षता की थी जिसकी रपट सुक्षावों का एक समूह ही है जिसे

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इस बार का बजट लोकलुभावन नहीं होगा

देश की तरक्क़ी आम जनता को हाशिए पर रखकर नहीं हो सकेगी, इसलिए वित्त मंत्री चिदंबरम को आम लोगों को

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सबक छोड़ गया भारत बंद

आज़ाद भारत के इतिहास में शायद पहली मर्तबा ऐसा हुआ, जब छात्र, नौजवान, महिलाएं एवं सामाजिक संगठनों ने अपने स्तर पर भारत बंद और काला दिवस मनाने का फैसला किया. हालांकि राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित किए जाने वाले भारत बंद की तरह इस बंद का असर यातायात और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर नहीं पड़ा.

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प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रही होगी, उनमें किसान, मज़दूर एवं छात्रनेता भी थे, जो अपने भाषणों में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ आग उगल रहे थे. वे सब अपने भाषणों में सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे थे. उस प्रदर्शन का नेतृत्व समाजवादी नेता चंद्रशेखर कर रहे थे.

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इंडियन एक्‍सप्रेस की पत्रकारिता- 2

अगर कोई अ़खबार या संपादक किसी के ड्राइंगरूम में ताकने-झांकने लग जाए और गलत एवं काल्पनिक कहानियां प्रकाशित करना शुरू कर दे तो ऐसी पत्रकारिता को कायरतापूर्ण पत्रकारिता ही कहेंगे. हाल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, सीक्रेट लोकेशन. यह इस अ़खबार में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम डेल्ही कॉन्फिडेंशियल का एक हिस्सा थी.

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इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

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यह आम आदमी की पार्टी है

भारतीय राजनीति का एक शर्मनाक पहलू यह है कि देश के राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों की कमान चंद परिवारों तक सीमित हो गई है. कुछ अपवाद हैं, लेकिन वे अपवाद ही हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश के प्रजातंत्र के लिए खतरा पैदा हो जाएगा. राजनीतिक दलों और देश के महान नेताओं की कृपा से यह खतरा हमारी चौखट पर दस्तक दे रहा है, लेकिन वे देश की जनता का मजाक उड़ा रहे हैं.

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हम तो ख़ुद अपने हाथों बेइज़्ज़त हो गए

जी न्यूज़ नेटवर्क के दो संपादक पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए. इस गिरफ्तारी को लेकर ज़ी न्यूज़ ने एक प्रेस कांफ्रेंस की. अगर वे प्रेस कांफ्रेंस न करते तो शायद ज़्यादा अच्छा रहता. इस प्रेस कांफ्रेंस के दो मुख्य बिंदु रहे. पहला यह कि जब अदालत में केस चल रहा है तो संपादकों को क्यों गिरफ्तार किया गया और दूसरा यह कि पुलिस ने धारा 385 क्यों लगाई, उसे 384 लगानी चाहिए थी. नवीन जिंदल देश के उन 500 लोगों में आते हैं, जिनके लिए सरकार, विपक्षी दल और पूरी संसद काम कर रही है.

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अन्ना हजारे नेता नहीं, जननेता हैं

शायद जयप्रकाश नारायण और कुछ अंशों में विश्वनाथ प्रताप सिंह के बाद देश के किसी नेता को जनता का इतना प्यार नहीं मिला होगा, जितना अन्ना हजारे को मिला है. मुझे लगा कि अन्ना हजारे के साथ कुछ समय बिताया जाए, ताकि पता चले कि जनता उन्हें किस नज़रिए से देखती है और उन्हें क्या रिस्पांस देती है.

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