मुजरिम का महिमामंडन करती फिल्म

हिंदी फिल्मों में पिछले दिन जितने भी बॉयोपिक बने लगभग सभी सफल रहे, कुछ बेहद सफल तो कुछ ने औसत

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137 वीं जयंती पर याद किए जा रहे हैं साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद

प्रेमचंद को हिन्दी कहानी व उपन्यास का सम्राट कहा जाता है.  साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की आज 137वीं जयंती है. 8

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स्थापित उद्देश्यों से भटकती संस्था

एनएफडीसी अगर अपने स्थापित उद्देश्यों से भटक गई है, तो यह करदाताओं के साथ छल है और उनकी गाढ़ी कमाई

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लंबी बीमारी के बाद नहीं रहे कवि गोपाल दास नीरज, यह थी आखिरी इच्छा

हिंदी के प्रख्यात कवि गोपाल दास नीरज का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को 93 साल की उम्र निधन हो

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साहित्य में उठाने गिराने का खेल

अगर हम देखें, तो नहीं पढ़ना या कम पढ़ना एक बड़ी समस्या के तौर पर साहित्य में उपस्थित हो गया

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नई वाली हिंदी को नए विषय की दरकार

नई वाली हिंदी की ब्रैंडिंग के बाहर के लेखक चेतन भगत और पंकज दूबे ने भी यूनिवर्सिटी जीवन को केंद्र

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सफल होती नायिका प्रधान फिल्में

तीन साल पहले की बात है, कुमाऊं लिटरेचर फेस्टिवल में फिल्मों पर एक सत्र चल रहा था, जिसमें फिल्मी शख्सियतों

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संस्कृति प्राथमिकता में नहीं

एक नजर भाषा के विकास के लिए बनाई गई संस्थाओं पर डालते हैं, तो वहां भी कई ऐसे संस्थान हैं

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सोशल मीडिया का अराजक तंत्र

कर्नाटक में राजनीतिक गहमागहमी के बीच कांग्रेस पार्टी ने रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता की कुछ पंक्तियां टि्‌वट की.

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विभाजन, युद्ध और प्यार की फिल्में

हिंदी फिल्मों में भारत-पाकिस्तान के विभाजन और उसमें हिंदू-मुस्लिम, पारसी, सिख परिवारों के द्वंद्व पर भी कई फिल्में आईं. भारत-पाकिस्तान

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सोना जैसे मसलों पर चुप्पी ठीक नहीं

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर पर मचे बवाल के बीच एक और अहम खबर दब सी गई. उसपर

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ठोस पहल से सार्थक परिणाम

ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन के मॉरीशस आयोजन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. इसका आयोजन संभवतः इस वर्ष अगस्त

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पौराणिक कथाओं के चित्रण की चुनौतियां

समग्रता में तर्क सामने नहीं आते हैं, क्योंकि मूल ग्रंथ के चरित्र तक जाने और उसको जानने की कोशिश के

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साहित्य में गंगा-जमुनी तहज़ीब!

साहित्य में गंगा-जमुनी तहजीब के झंडाबरदारों ने इतने सालों से ये सवाल नहीं उठाया, उनकी चुप्पी भी सवालों के कठघरे

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साहित्य के ‘अखाड़े’ में ‘कमज़ोर समानांतर साहित्य उत्सव’

दरअसल अगर हम पूरे आयोजन को लेकर समग्रता में विचार करें, तो यह बात समझ में आती है कि इसकी

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‘चश्मे’ के लेखन के विरोधी थे दूधनाथ

करीब 13 साल पहले की बात होगी, जब तस्लीमा नसरीन पहली बार 2004 में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेने

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यूएन नहीं, देश में मिले हिंदी को हक़

संविधान के लागू होने के एक दशक बाद भी हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की दिशा में कोई काम नहीं हुआ.

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पुस्तकों के केंद्र में व्यक्ति और प्रवृत्तियां

बीते साल पर अगर नजर डालें तो यह बात साफ तौर पर उभर कर आती है कि फिल्मी सितारों की

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2017 में फिल्मी सितारों की किताबों ने बटोरीं सुर्खियां

इस बार हम चर्चा करेंगे उन चुनिंदा फिल्मी पुस्तकों की, जो 2017 में सुर्खियों में रहीं. सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी

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प्रकाशन जगत में कॉरपोरेट की दस्तक

भारत में प्रकाशन जगत को उद्योग का दर्जा प्राप्त नहीं है, बहुधा हमारे हिंदी के प्रकाशक इस बात को अलग-अलग

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जन्मदिन: ग़ालिब के बिना शायरी है अधूरी, ऐसी है इनकी दास्तान

ग़ालिब एक ऐसे शायर हुए हैं, जो अपनी बेहतरीन शायरी के लिए सदियों तक याद किए जाते रहेंगे. उनकी शायरी

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सकारात्मकता से परास्त विवाद

अपने एक लेख में मशहूर सांस्कृतिक इतिहासकार लोटमान ने लिखा है कि चिन्हों और प्रतीकों के जरिए संप्रेषण मानवता की

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साहित्योत्सव से संस्कृति निर्माण?

पिछले कई सालों से देशभर में साहित्य, कला और संस्कृति को लेकर एक प्रकार का अनुराग उत्पन्न होता दिखाई दे

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अराजक नहीं होती कलात्मक आज़ादी

गोवा में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल के पहले विवाद की चिंगारी भड़काने की कोशिश की गई, जब दो

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लेखकीय आत्मलज्जा का सवाल

हिंदी साहित्य के लिए फेसबुक और वहां चलने वाली बहसें काफी महत्वपूर्ण हो गई हैं. महत्वपूर्ण इस वजह से कि

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साहित्य क्षितिज पर छाए सितारे

अभी पिछले दिनों हेमा मालिनी की प्रामाणिक जीवनी ‘हेमा मालिनी: बियांड द ड्रीम गर्ल’ की खासी चर्चा रही. इस पुस्तक

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वैचारिकी का ओवरडोज़

वर्ष 2017 के लिए जब मैन बुकर प्राइज अमेरिकी लेखक जॉर्ज सैंडर्स को उनके उपन्यास लिंकन इन द बार्डो को

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‘मैं और मेरा’ के चक्रव्यूह में सृजन

आज के साहित्यिक परिदृष्य पर अगर नजर डालें तो ‘मैं’, ‘मेरा’ और ‘मेरी’ की ध्वनियों का कोलाहल सुनाई देता हैं.

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