साई बाबा : जैसा भाव वैसा गुरु

अपने सांसारिक ज्ञान के आधार पर आध्यात्मिक कार्य की विवेचना करना मनुष्य की एक बहुत बड़ी कमी है. आध्यात्मिक ज्ञान

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साईं-साहित्य के कुछ आधार

शिरडी में बाबा के प्रवास-काल (लगभग 1860-1918 ई.) में महाराष्ट्र में प्रकाशित होने वाले समाचार-पत्र एवं पत्रिकाओं की संख्या बहुत कम

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इस संसार में ऐसे असंख्य लोग हैं, जो किसी गुरु को नहीं मानते

गुरु-कृपा पानेवाले का धर्म सद्गुरु जब कृपा करते हैं, तो कृपा पाने वाले का क्या धर्म होना चाहिए? सद्गुरु ़फकीर

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साई वंदना : सद्‌गुरु का मूलभूत गुण है ईश्वरीय करुणा

क्या पाप-कर्म करने वालों की मुक्ति सम्भव है? जीवन में किए गए नकारात्मक एवं सकारात्मक कर्मों का स्त्रोत एक ही

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साईं की आराधना श्रद्धा सबुरी के साथ करनी चाहिए

क्या सदगरु से सांसारिक मांगे करना अनुचित हैं? बाबा भक्तों की मांगों को पूरी करते रहे और आज भी पूरी

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सद्गुरु भक्तों के अर्न्तमन को जानते हैं

गुरु-मुख होने की आवश्कता संसार में जो अनेक तरह के बंधन हैं, मनुष्य उनमें क्यों फंसता है? संसार के अनेक बंधनों

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सद्गुरु प्रकाशमान सूर्य की भांति हैं

करोड़ो प्रकार के विभिन्न प्राणी-जिनमें मानव सबसे उन्नत है, जीवन के अलग-अलग गलियारों में चलते रहते हैं- राजपथ पर पहुंचने के

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