प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति पर विवादः प्रधानमंत्री की अग्नि परीक्षा

चौथी दुनिया को कुछ ऐसे दस्तावेज़ हाथ लगे हैं, जिनसे हैरान करने वाली सच्चाई का पता चलता है. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई हुई, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह को अगले सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए.

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भारतीय समाज को बेहतर बनाने के लिए आईओएस का 25 वर्षों का प्रयास

भारत में मुसलमान अल्पसंख्यक बिरादरी का दर्जा रखता है. देश के संविधान ने दूसरे वर्गों के साथ-साथ इस देश के मुसलमानों को भी बराबर के अधिकार दिए हैं, लेकिन आज़ादी के 60 साल से भी ज़्यादा का वक़्त गुज़र जाने के बाद भी, आज मुसलमानों को अपना हक़ मांगना पड़ रहा है.

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समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट

हाल में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं और 43 फीसदी पांच साल से कम उम्र के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बच्चे कमज़ोर और एनीमिया से ग्रसित हैं. इन क्षेत्रों के 48 प्रतिशत बच्चों का वज़न उनकी उम्र के अनुपात में बहुत कम है. यूनिसेफ द्वारा चिल्ड्रन इन अर्बन वर्ल्ड नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी ग़रीबों में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है, जहां गंभीर बीमारियों का स्तर गांव की तुलना में अधिक है.

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स्त्रियों की मज़दूरी का मूल्यांकन

फिर कल-काऱखानों के चल निकलने के कारण स्त्री कामगारों की संख्या बढ़ी, लेकिन बाज़ार में इनकी मज़दूरी का भाव पुरुषों की अपेक्षा निम्न स्तर का ही रहा. मालिकों की दलील यह थी कि यदि हमें मज़दूरों की ज़रूरत ही हो तो हम पुरुषों को ही क्यों न रखें और फिर सस्ती दर में औरतें काम करने के लिए राज़ी भी तो हैं. उनके इस उत्तर में सुदृढ़ तर्क का अभाव भले हो, इसने स्त्रियों को मज़दूरी की आवश्यकता के कारण सस्ती दर पर काम करने के लिए बाध्य कर दिया.

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इमोशनल चूहे

इमोशनल अत्याचार अब स़िर्फ इंसानों में नहीं, बल्कि चूहों में भी देखा जा सकता है. एक अनुसंधान कहता है कि वे दयालु और उदार होते हैं. शिकागो विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने प्रयोग के लिए चूहों को जोड़ों में रखा, ताकि वे एक-दूसरे को जान सकें.

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आदिवासियों की उपेक्षा कब तक?

आज देश का आदिवासी समुदाय राजनीति के केंद्र में आ गया है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर के लिए नहीं, बल्कि इसलिए कि उसने देश की सरकार के ख़िला़फ संघर्ष का बिगुल बजा दिया है. आदिवासी एक ऐसे सामजिक समूह के सदस्य हैं, जो आज अपनी पहचान के लिए लड़ रहा है.

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कश्मीरियों की व्यथा कब तक अनसुनी की जाएगी

अरुंधति राय के इस वक्तव्य कि कश्मीर भारत का अविभाज्य हिस्सा नहीं है, पर काफी बवाल मचा. भाजपा ने मांग की कि अरुंधति के ख़िला़फ देशद्रोह का मुक़दमा क़ायम किया जाना चाहिए. भाजपा महिला मोर्चा के सदस्यों ने उनके दिल्ली स्थित निवास में तोड़फोड़ की और बजरंग दल ने उन्हें कई तरह की धमकियां दीं.

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अपनी ही करनी का फल भोग रहे हैं हम

पाकिस्तान में इन दिनों न्यूज़ चैनलों और वेबसाइटों पर सियालकोट की एक घटना की वीडियो बार बार दिखाई जा रही है. वीडियो में दिखाया गया है कि चंद लोग एक भीड़ की मौजूदगी में, जिसमें कुछ पुलिस के जवान भी शामिल हैं, दो लड़कों को डंडों से बुरी तरह पीट रहे हैं. जिन को मारा गया है, वह दोनों भाई हैं, जिनमें से एक की उम्र 18 वर्ष और दूसरे की उम्र 15 वर्ष है.

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यूरोप में महिलाओं पर अत्याचार

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप और अमेरिका में रहने वाले दक्षिणी एशियाई ख़ानदानों में सैकड़ों महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें ग़ुलामों की तरह रखा जाता है. हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पर्दे में रहने वाली मुस्लिम महिलाओं को ब्याह कर पाकिस्तान लाया गया और ग़ुलामों की ज़िंदगी जीने पर विवश किया गया.

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स्‍कूलों में बच्‍चों की सुरक्षा का सवाल

हाल में उड़ीसा विधानसभा में एक ऐसे मुद्दे को लेकर गहमागहमी बढ़ गई, जिसका सीधा संबंध ग़रीब आदिवासियों की बेबसी और लाचारी की आड़ में उनके शोषण से जुड़ा था. राज्य सरकार द्वारा संचालित जनजातीय विद्यालय, जो ग़रीब एवं पिछड़े आदिवासी छात्रों को शिक्षा का उजाला दिखाने के लिए खोले गए थे, उनके उत्पीड़न का केंद्र बन गए.

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औरतों का मुक़ाम समाजी और सियासी दोनों है

सामाजिक जीवन में पुरुष-महिला का रिश्ता सबसे अहम है. उसका कारण यह है कि यह रिश्ता मानवीय संवेदना की बुनियाद है और इसमें मामूली सी ग़लती भी सामाजिक ढांचे को बदनुमा और दाग़दार बना सकती है. हमारा इतिहास औरतों पर होने वाले अत्याचार और पाबंदियों के कलंकित दृश्यों से भरा पड़ा है.

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सार-संक्षेप

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्वाचन क्षेत्र बुदनी के वनग्राम खटपुरा के 200 वनवासी परिवारों को एक भाजपा नेता के इशारे पर वन विभाग के अफसर प्रताड़ित कर रहे हैं. 25 वर्षों से वनभूमि पर रहने वाले वनवासियों का आरोप हैं कि उन्हें खेती के लिए पट्टे देना तो दूर, वन अधिकारी उनकी फसल चौपट कर उनके खिला़फ झूठे मुकदमे दर्ज करा रहे हैं.

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स्‍वर्णिम मध्‍य प्रदेश सिर्फ एक सपना है

स्‍वर्णिम मध्य प्रदेश की योजनाओं के तहत मध्य प्रदेश सरकार पर 58000 करोड़ रूपए का क़र्ज़ हो चुका है और उस पर 6500 करोड़ का ब्याज भी च़ढ चुका है. प्रदेश में बच्चों के प्रति अपराधों का ग्राफ चढ़ता ही जा रहा है. राज्य में 40 से अधिक सांप्रदायिक घटनाएं हुई हैं, सरकार की देनदारियों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है. महिलाओं और कमज़ोर तबके पर बढ़ते अपराध और अत्याचार, प्रशासनिक स्तर पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के भ्रष्टाचारों का खुलेआम नज़र आना. यह सब मिलकर प्रदेश के मनोरम स्वप्न को एक डरावनी हक़ीक़त का रूप देते हैं.

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