जनता को विकल्प की तलाश है

नरेंद्र मोदी की विजय ने संघ और भारतीय जनता पार्टी में एक चुप्पी पैदा कर दी है. संघ के प्रमुख लोगों में अब यह राय बनने लगी है कि नरेंद्र मोदी को देश के नेता के रूप में लाना चाहिए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता इस सोच से सहमत नहीं हैं. भारतीय जनता पार्टी के लगभग सभी नेताओं का मानना है कि नरेंद्र मोदी को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करते ही देश के 80 प्रतिशत लोग भारतीय जनता पार्टी के ख़िला़फ हो जाएंगे, क्योंकि मोदी की सोच से देश के 16 प्रतिशत मुसलमान और लगभग 80 प्रतिशत हिंदू सहमत नहीं हैं.

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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उत्तर प्रदेश : नवरत्‍नों के सहारे कांग्रेस

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई भी प्रयोग स़फल नहीं हो पा रहा है. सभी प्रयोग उसके लिए उलटे पड़ रहे हैं. दो दशक से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन कांग्रेस एक बार डूबी तो फिर आज तक उबर नहीं पाई है. इस दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा सभी ने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया. प्रदेश की कुर्सी पर कई अध्यक्ष बैठे. सबने बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कोई नहीं बदल पाया.

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यह खामोशी देश के लिए खतरनाक है

कोयला घोटाला अब स़िर्फ संसद के बीच बहस का विषय नहीं रह गया है, बल्कि पूरे देश का विषय हो गया है. सारे देश के लोग कोयला घोटाले को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इसमें पहली बार देश के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठे व्यक्ति का नाम सामने आया है. मनमोहन सिंह कोयला मंत्री थे और यह फैसला चाहे स्क्रीनिंग कमेटी का रहा हो या सेक्रेट्रीज का, मनमोहन सिंह के दस्तखत किए बिना यह अमल में आ ही नहीं सकता था.

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फैसले न लेने की कीमत

मनमोहन सिंह की बुनियादी समस्या यह है कि वह खुद फैसले नहीं लेना चाहते, लेकिन प्रधानमंत्री हैं तो फैसले तो लेने ही थे. जब उनके पास फाइलें जाने लगीं तो उन्होंने सोचा कि वह क्यों फैसले लें, इसलिए उन्होंने मंत्रियों का समूह बनाना शुरू किया, जिसे जीओएम (मंत्री समूह) कहा गया. सरकार ने जितने जीओएम बनाए, उनमें दो तिहाई से ज़्यादा के अध्यक्ष उन्होंने प्रणब मुखर्जी को बनाया.

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यूपीए-2 के तीन साल : सत्ता के संवेदनहीन होने की कहानी

22 मई की रात. तीन साल पूरे होने के अवसर पर यूपीए-2 सरकार ने एक डिनर पार्टी का आयोजन किया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत सारे महत्वपूर्ण नेता इस पार्टी में शामिल थे. उसी दिन सुबह एक खबर आई थी, हुबली-बंगलुरु एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से 25 लोगों की मौत हो गई. लेकिन सुबह की उस दुर्घटना का रात की डिनर पार्टी पर कोई असर नहीं था.

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सपने सच नहीं होते, काटजू साहब

इन दिनों मीडिया में प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष और दुनिया के प्रकांडतम विद्वानों में से एक, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश जस्टिस मार्केंडेय काटजू के विवादास्पद बयानों पर बहस चल रही है. काटजू ने अपने बयानों में न्यूज़ चैनलों को निहायत ही ग़ैर ज़िम्मेदार और समाज को बांटने वाला क़रार देकर विवाद को जन्म दिया.

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जनरल वी के सिंह जन्म तिथि विवाद : टॉप सीक्रेट फाइल की कहानी क्या है?

थलसेना अध्यक्ष जनरल वी के सिंह की जन्मतिथि पर सरकार किस तरीके से विवाद खड़ा कर रही है और तमाम हथकंडे अपना कर उन्हें ग़लत साबित करने पर तुली हुई है, इसका खुलासा जब चौथी दुनिया ने किया, तब देश के मीडिया और खासकर अंग्रेजी मीडिया से लेकर रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों तक ने एक बार फिर से इस विवाद को हवा देना शुरू कर दिया.

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मधु चौहान बहाल

उच्च न्यायालय ने देहरादून ज़िला पंचायत अध्यक्ष पद पर मधु चौहान को बहाल करके प्रदेश सरकार को एक करारा झटका दिया. मालूम हो कि बीती 18 फरवरी को आठ निराधार आरोपों के आधार पर श्रीमती चौहान को बर्खास्त करते हुए राज्य सरकार ने मामले की जांच मंडलायुक्त को सौंप दी थी. मंडलायुक्त ने भी अपनी रिपोर्ट में उन पर लगे तीन आरोपों को सच बताया था.

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उक्रांद अध्यक्ष पंवार पर निशंक सरकार की पहली गाज गिरी

कल तक सूबे की भारतीय जनता पार्टी से गलबहिया कर सरकार होने का मजा लूटने वाले उत्तराखंड के एक मात्र क्षेत्रिय दल उत्तराखंड क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार पर सूबे की निशंक सरकार से समर्थन वापसी की पहली गाज दून के अफसरों ने ही गिरा दी.

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नई राजनीति, पुराने नेता

एक पखवाड़े के अंदर भारतीय राजनीति में इतने झंझावात, इतने सारे उतार-चढ़ाव. ऐसा अक्सर नहीं होता, कांग्रेस पार्टी के दो-दो मुख्यमंत्रियों को एक के बाद एक अपना पद छोड़ना पड़े और संसद सप्ताहों तक लगातार बाधित होती रहे. कांग्रेस महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के इस्ती़फे को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है, लेकिन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रोसैय्या के साथ ऐसा क्यों हुआ? कहीं इसकी वजह यह तो नहीं कि दिवंगत मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी के बेटे जगन मोहन ने अपने न्यूज़ चैनल पर सोनिया गांधी का मखौल उड़ाया? अब यदि वह बग़ावत पर उतारू हो गए तो कांग्रेस क्या करेगी? वहीं दूसरी ओर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के इस्ती़फे के मामले में भारतीय जनता पार्टी को अपनी हैसियत का अंदाज़ा हो गया. भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की तमाम कोशिशों के बावजूद येदियुरप्पा अपना पद छोड़ने को राजी नहीं हुए. भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी को सुशासन के बारे में अभी काफी कुछ जानने की ज़रूरत है, साथ ही पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच उन्हें अपना कद भी बढ़ाना होगा. बिहार विधानसभा चुनाव में राजग गठबंधन की एकतरफा जीत ने भाजपा को चेहरा बचाने का साधन उपलब्ध करा दिया, लेकिन पार्टी यह अच्छी तरह जानती है कि इस जीत का सारा श्रेय नीतीश कुमार को जाता है. भाजपा का इसमें कोई खास योगदान नहीं है और सच तो यह है कि चुनाव प्रचार में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को शामिल करने के इसके प्रस्ताव को नीतीश ने सिरे से खारिज कर दिया था और अब वह इसके लिए वाहवाही लूट रहे हैं.

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उत्तराधिकार की राजनीति

ब्रिटेन में लेबर पार्टी को नया नेता मिल गया है. मई 2010 में बहुमत खोने के बाद गार्डन ब्राउन ने इस्ती़फा दे दिया था और इसके ठीक बाद उनके उत्तराधिकारी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई थी. लेबर पार्टी के नियमों के मुताबिक़ केवल संसद सदस्य ही पार्टी के नेता पद का चुनाव लड़ सकते हैं. नामांकन करने के बाद उम्मीदवार पूरे देश में घूमकर पार्टी सदस्यों के सामने अपना पक्ष रखते हैं.

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दिल्‍ली का बाबूः नया चेयरमैन नहीं मिला

राष्ट्रीय राजमार्गों पर आसानी से दिख जाने वाला गड्‌ढा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की अंदरूनी हालत की असली तस्वीर पेश करता है. सरकार ने एनएचएआई के नए अध्यक्ष की तलाश में एक साल तक कोशिश की, लेकिन उपयुक्त उम्मीदवार न मिलता देख वह इसके मौजूदा अध्यक्ष ब्रजेश्वर सिंह को तीन महीने का सेवा विस्तार देने का फैसला लेने के लिए मजबूर हो गई.

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भाजपा और सांस्‍कृतिक राष्‍ट्रवाद का ढोंग

नितिन गडकरी को जब राजनाथ सिंह के स्थान पर भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था, उसी समय दो बातें बिलकुल स्पष्ट हो गई थीं. एक तो यह कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी ऐसे नेता को भाजपा प्रमुख के पद पर आसीन करना चाहता था, जो संघ की पृष्ठभूमि का हो और संघ एवं उसकी नीतियों के प्रति वफादार रहे.

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संसद के सेंट्रल हॉल में स्व. चंद्रशेखर के चित्र का अनावरण

चार मई को संसद के सेंट्रल हॉल में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर के चित्र का अनावरण किया गया. अनावरण उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी के हाथों संपन्न हुआ.

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ऊर्जा क्षेत्र में मचा घमासान

देश के ऊर्जा क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों की कोई कमी नहीं है. लेकिन सरकार को इस क्षेत्र में देश की शीर्ष नीति नियामक संस्था सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (सीईए) में चल रहे घालमेल का जवाब तलाशना ही होगा. सूत्रों के मुताबिक़ सीईए के सदस्य गुरदयाल सिंह को संस्था का कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाने के बाद कई लोग विद्रोह पर उतारू हो गए हैं.

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विवादों का बादशाह ललित मोदी

हो सकता है कि ललित मोदी को क्रिकेट से बहुत प्यार हो. लेकिन सच यह है कि मोदी को क्रिकेट से कहीं ज़्यादा प्यार विवादों से है. विवादों को जन्म देना और विवादों में बने रहना, मानो उनका बचपन से शौक़ रहा हो. विश्वास नहीं होता तो इतिहास के पन्ने पलटिए और उनके छात्र जीवन पर नज़र डालिए.

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मधुबनी में जदयू गुटबाज़ी का शिकार

विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जहां कांग्रेस, भाजपा, लोजपा समेत अन्य राजनैतिक दलों ने मधुबनी ज़िले में संगठन की मजबूती के लिए पूरी ताक़त झोंक दी है, वहीं सतारूढ़ जदयू के कुनबे में आपसी जंग जोरों पर है. ज़िले के 21 प्रखंडों में से अधिकांश प्रखंडों में जदयू ज़िलाध्यक्ष के पद को लेकर घमासान मचा हुआ है.

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गडकरी जी, अध्‍यक्ष की तरह दिखिए

देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता का कद किसी उद्योगपति की पत्नी से छोटा हो गया है? भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन गडकरी आईपीएल के मुंबई और चंडीगढ़ की टीम के मैच के बाद पुरस्कार वितरण समारोह में मौजूद थे. मंच पर और भी लोग थे. जो सबसे प्रमुख अवार्ड था, उसे मिसेज मुकेश अंबानी के हाथों दिया गया और गडकरी के हाथों एक छोटा अवार्ड दिलाया गया.

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दागदार दामन को निशंक दबंगई से धोना चाहते हैं

उत्तराखंड राज्य के मुखिया डा. रमेश पोखरियाल निशंक पर जिस तरह एक के बाद एक भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे है, उससे इस बात की आशंका ब़ढ जाती है कि सूबे के मुखिया का दामन बेदाग़ नहीं है. यह बात दीगर है कि रंगमंच एवं पत्रकारिता की उपज निशंक अपने दामन पर लगे दाग़ को अपनी दबंगयी से लोकतांत्रिक रास्ते से हट कर धोने का लगातार प्रयास कर रहे है.

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पंचायत चुनाव की कठिन डगर

झारखंड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन 15 जून से पहले पंचायत चुनाव की घोषणा कर चुके हैं और उप मुख्यमंत्री रघुवर दास उनके सुर में सुर मिलाकर बरसात के पहले पंचायत चुनाव करा लेने का दावा कर रहे हैं. हाल में भूरिया आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप सिंह भूरिया एक कार्यशाला में शिरकत करने रांची आए.

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ज़िलाध्यक्ष चुनाव में भाजपा की नाक कटी

गठबंधन के सहारे सत्ता में पहुंचकर भारतीय जनता पार्टी में अब वे सारे दुर्गुण आ गए हैं, जो सत्ताधारी दलों में सत्ता की गंध से उत्पन्न हो जाते हैं. यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी में भी सत्ता की सोंधी महक ने सांगठनिक चुनाव में पद पाने की लालसा से पार्टीजनों के बीच विवाद को बढ़ा दिया है.

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सार-संक्षेप

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्वाचन क्षेत्र बुदनी के वनग्राम खटपुरा के 200 वनवासी परिवारों को एक भाजपा नेता के इशारे पर वन विभाग के अफसर प्रताड़ित कर रहे हैं. 25 वर्षों से वनभूमि पर रहने वाले वनवासियों का आरोप हैं कि उन्हें खेती के लिए पट्टे देना तो दूर, वन अधिकारी उनकी फसल चौपट कर उनके खिला़फ झूठे मुकदमे दर्ज करा रहे हैं.

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पर्यावरण से संबंधित फैसलों में हितों का टकराव

भारत का समाजवादी लोकतंत्र प्रतिनिधित्व की राजनीति में अच्छी तरह रचा-बसा है. यहां विशेषज्ञों की सभा और समिति के बारे में आमतौर पर यह माना जाता है कि वे स्थितियों को बेहतर ढंग से समझते हैं. बनिस्बत उनके, जो ऐतिहासिक तौर पर सत्ता प्रतिष्ठान में निर्णायक भूमिका रखते हैं. यह सब एक प्रक्रिया के तहत होता है. इसमें प्राथमिकताएं सुनिश्चित होती हैं, योजनाओं का मूल्यांकन किया जाता है और विकास के रास्ते तैयार किए जाते हैं.

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दिल्‍ली का बाबू : नीलेकणी की तलाश जारी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा इंफोसिस के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणी को यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) का मुखिया नियुक्त किए जाने के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत तो हो गई, लेकिन हम जैसे पत्रकार इससे ज़्यादा उत्साहित नहीं हैं. तमाम अनुमानों के विपरीत नीलेकणी ने घोषणा कर दी कि वह कॉरपोरेट दुनिया से जुड़े लोगों के बजाए आईएएस अधिकारियों को ज़िम्मेदारी वाले पदों पर रखना चाहेंगे. लेकिन, सूत्रों पर भरोसा करें तो यूआईडीएआई में खाली पदों को भरने के लिए उन्हें खासी मश़क्क़त करनी पड़ रही है.

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अब संघ के शिकंजे में है भाजपा

भारतीय जनता पार्टी अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राह पर चलेगी. भाजपा पहले भी संघ के इशारे पर ही चलती थी, लेकिन थोड़ा पर्दा था. नए अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यह पर्दा भी उठा दिया है. पहले संघ के लोग कहते थे कि भाजपा के क्रियाकलापों में संघ का कोई हस्तक्षेप नहीं है और भाजपा के नेता कहते थे कि संघ उनके लिए वैचारिक प्रेरणास्रोत है, भाजपा के काम में संघ की कोई दख़लअंदाज़ी नहीं है.

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