संविधान में राजनीतिक दल का ज़िक्र नहीं है : कब और कैसे बना हमारा संविधान

इस अंक से हम डॉ. बी आर अंबेडकर द्वारा 25 नवंबर, 1949 को संविधान सभा में दिए गए आख़िरी भाषण

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सामरदा पंचायत : मानव विकास की जीती-जागती मिसाल

बीकानेर ज़िले की खाजूवाला पंचायत समिति की सामरदा पंचायत के कार्यालय एवं परिसर को देखकर ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि यह उन चुनिंदा पंचायतों में से एक है, जो स्वशासन का सपना साकार करने के लिए प्रयासरत हैं. राजीव गांधी भारत निर्माण भवन, सरपंच कार्यालय, कंप्यूटर रूम, दीवारों पर चस्पां विभिन्न सूचनाएं और लोगों का आवागमन इस बात की पुष्टि करता है कि इस पंचायत का नेतृत्व कोई जागरूक एवं कुशल नेता कर रहा है.

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वनाधिकार कानून और महिलाएं

देश को आज़ादी मिलने के साठ साल बाद 2006 में वनाश्रित समुदाय के अधिकारों को मान्यता देने के लिए एक क़ानून पारित किया गया, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत निवासी (वनाधिकारों को मान्यता) क़ानून. यह क़ानून बेहद है. यह केवल वनाश्रित समुदाय के अधिकारों को ही मान्यता देने का नहीं, बल्कि देश के जंगलों एवं पर्यावरण को बचाने के लिए वनाश्रित समुदाय के योगदान को भी मान्यता देने का क़ानून है.

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सीएनटी एक्‍ट विवाद थमेगा नहीं

सीएनटी एक्ट को लेकर पिछले दिनों उठा विवाद फिलहाल थम गया है, लेकिन राख के नीचे चिंगारी दबी है. यह चिंगारी कभी भी भड़क सकती है. पिछले दिनों सीएनटी एक्ट के एक प्रावधान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया था.

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अनुसूचित जाति आयोग के निशाने पर राखी

राखी सावंत के रियलिटी शो राखी का इंसा़फ में न्याय की उम्मीद में आए एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी, उसके बाद से राखी पर मुसीबतों का दौर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा. प्रोग्राम के प्रसारण के दौरान राखी की टिप्पणी से व्यथित झांसी के एक युवक लक्ष्मण प्रसाद ने आत्महत्या कर ली थी.

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यह गूजर नहीं किसान आंदोलन है

भारतीय लोकतंत्र का यह अजीब चेहरा है. देश के किसानों को जब भी कोई बात सरकार तक पहुंचानी होती है, उन्हें आंदोलन करना पड़ता है. वहीं देश के बड़े-बड़े उद्योगपति सीधे मंत्रालय जाकर नियम-क़ानून बदल कर करोड़ों का फायदा उठा लेते हैं.

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मतदाताओं के साथ नक्सली भी रखेंगे वजन

सासाराम ज़िले के सात विधानसभा क्षेत्रों में से अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित, चेनारी विधानसभा का आगामी चुनाव किसी भी दल एवं प्रत्याशी के लिए आसान नहीं होगा. बात पहले वाली नहीं रही, क्योंकि नए परिसीमन में इस विधानसभा क्षेत्र से शिवसागर एवं कोचस का आधा हिस्सा तथा करगहर का पूरा प्रखंड कटकर अलग हो गया है.

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