जनतंत्र यात्रा : सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे : अन्ना

अन्ना हज़ारे की जनतंत्र यात्रा का चौथा चरण बीते 5 जुलाई को मध्य प्रदेश के रीवा से शुरू हुआ, जहां

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अन्ना के नाम एक शाम : उर्दू पत्रकार और मुसलमानों की समस्याए

भारतीय मुसलमानों को अन्ना से हमेशा इस बात की शिकायत रही कि अन्ना ने कभी उनकी समस्याओं को नहीं उठाया.

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जब तोप मुकाबिल हो : उत्तराखंड की मदद हर भारतीय का कर्तव्य है

उत्तराखंड की आपदा क्या दैवीय आपदा है? क्या यह भगवान की नाराज़गी का परिणाम है, या यह गंगा मां के

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जनतंत्र मोर्चा पहला कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर संपन्न

प्रख्यात गांधीवादी एवं सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने बीते 9 जून को ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में जनतंत्र मोर्चा द्वारा

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सत्ता के पूर्ण विकेंद्रीकरण से संभव है : पार्टीविहीन लोकतंत्र

गांधी और जेपी की सोच पार्टीविहीन लोकतंत्र को कभी उभरने नहीं दिया गया, क्योंकि अगर ऐसा होता, तो आज जो

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अन्ना की हुंकार : जन विरोधी सरकारों को उखाड़ फेंके

अन्ना हज़ारे की जनतंत्र यात्रा का तीसरा चरण उत्तराखंड में बीते 24 मई को संपन्न हुआ. समाजसेवी अन्ना हज़ारे एवं

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जनतंत्र यात्रा : उत्तराखंड में अन्ना ने कहा : प्रधानमंत्री की लाचारी से देश शर्मसार

जनंतत्र यात्रा के पहले और दूसरे चरण की सफलता के बाद १३ मई से जनतंत्र यात्रा का तीसरा चरण उत्तराखंड

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जनतंत्र यात्रा 2013 – अब बदलाव ज़रूरी है

अन्ना हज़ारे की जनतंत्र यात्रा सुपर फ्लॉप हो सकती है, क्योंकि कई लोग यह मानते हैं कि हिंदुस्तान के लोगों

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राजनीति में नैतिकता बहुत ज़रूरी

पिछले साल देश भ्रष्टाचार और विदेश में रखे काले धन की चर्चा में व्यस्त रहा. कुछ मंत्री जेल गए और अन्ना हज़ारे ने भ्रष्टाचार के खिला़फ आंदोलन शुरू किया. हालांकि भ्रष्टाचार एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है, देश में रोजग़ार के अवसरों का अभाव.

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उठो जवानो तुम्‍हें जगाने क्रांति द्वार पर आई है

एक कहावत है, प्याज़ भी खाया और जूते भी खाए. ज़्यादातर लोग इस कहावत को जानते तो हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को ही पता है कि इसके पीछे की कहानी क्या है. एक बार किसी अपराधी को बादशाह के सामने पेश किया गया. बादशाह ने सज़ा सुनाई कि ग़लती करने वाला या तो सौ प्याज़ खाए या सौ जूते. सज़ा चुनने का अवसर उसने ग़लती करने वाले को दिया.

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