केरल: बीजेपी कार्यालय पर हमला, इलाके में भारी तनाव

नई दिल्ली।  केरल में बीजेपी के एक कार्यालय तड़के सुबह हमला हुआ। हमला राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम के एक जिला

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बांग्लादेश : गृहयुद्ध के हालात

बांग्लादेश में हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें 80 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. एक तरफ़ विपक्षी

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अपराध की दुनिया में फंसता बचपन : मासूम या मुजरिम

बदलते परिवेश में बच्चे वक्त से पहले ही ब़डे हो रहे हैं. एक तऱफ वे कम उम्र में तमाम तरह

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फर्रुख़ाबाद को बदनाम मत कीजिए

मैं अभी तक पसोपेश में था कि सलमान खुर्शीद के खिला़फ कुछ लिखना चाहिए या नहीं. मेरे लिखे को सलमान खुर्शीद या सलमान खुर्शीद की जहनियत वाले कुछ और लोग उसके सही अर्थ में शायद नहीं लें. इसलिए भी लिखने से मैं बचता था कि मेरा और सलमान खुर्शीद का एक अजीब रिश्ता है. फर्रुख़ाबाद में हम दोनों पहली बार लोकसभा के चुनाव में आमने-सामने थे और चुनाव में सलमान खुर्शीद की हार और मेरी जीत हुई थी.

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संसद ने सर्वोच्च होने का अधिकार खो दिया है

भारत की संसद की परिकल्पना लोकतंत्र की समस्याओं और लोकतंत्र की चुनौतियों के साथ लोकतंत्र को और ज़्यादा असरदार बनाने के लिए की गई थी. दूसरे शब्दों में संसद विश्व के लिए भारतीय लोकतंत्र का चेहरा है. जिस तरह शरीर में किसी भी तरह की तकली़फ के निशान मानव के चेहरे पर आ जाते हैं, उसी तरह भारतीय लोकतंत्र की अच्छाई या बुराई के निशान संसद की स्थिति को देखकर आसानी से लगाए जा सकते हैं.

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जेलों में बढ़ती मुसलमानों की आबादी

आज से 65 वर्ष पूर्व जब देश स्वतंत्र हुआ था तो सबने सोचा था कि अब हम विकास करेंगे. आज़ाद देश में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी. छुआछूत, जाति-पांत और भेदभाव का अंत होगा. हर धर्म से जुड़े लोग एक भारतीय के रूप में आपस में भाईचारे का जीवन व्यतीत करेंगे. धार्मिक घृणा को धर्मनिरपेक्ष देश में कोई स्थान प्राप्त नहीं होगा. यही ख्वाब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था और यही आश्वासन संविधान निर्माताओं ने संविधान में दिया था, लेकिन आज 65 साल बीत जाने के बाद यह देखकर पीड़ा होती है कि जाति-पांत की सियासत हमारे देश की नियति बन चुकी है.

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दक्षिण कोरिया से सबक़ लें

हमारे देश के छोटे-छोटे गांवों से लेकर महानगर तक जंगल बनते जा रहे हैं, जहां महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. हालत यह है कि अ़खबारों के पन्ने बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की खबरों से भरे रहते हैं. इससे निपटने के लिए सरकार को दक्षिण कोरिया की तरह सख्त क़दम उठाने होंगे.

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सेक्‍स, सीडी और खिलाड़ी

अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं. इससे भी बड़ा परिचय उनका यह है कि वह सांसद हैं. ऐसे-वैसे सांसद नहीं, बल्कि संसद की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन हैं. वह देश में क़ानून बनाने की प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली केंद्र हैं.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सच बोलना अपराध नहीं है

सेवा में,

श्री वीरभद्र सिंह जी,

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री

1, जंतर मंतर रोड,

नई दिल्ली-110001

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न्याय याचना के ज्वलंत सवाल

भारतीय साहित्यकार संघ के अध्यक्ष डॉ. वेद व्यथित का खंड काव्य न्याय याचना एक अनुपम कृति है. जैसा नाम से ही ज़ाहिर है कि इसमें न्याय पर सवाल उठाए गए हैं. वह कहते हैं, यह ठीक है कि जानबूझ कर किया गया अपराध अनजाने में हुए अपराध से कहीं भयावह है, लेकिन लापरवाही में किया गया अपराध भी कम भयावह नहीं है. ज़रूर कहीं उसके अवचेतन में व्यवस्था और अनुशासन की अवहेलना है. ठीक है, गंधर्व ने जानबूझ कर ऋषि की अंजलि में नहीं थूका, लेकिन क्या कहीं भी थूक देना उचित है?

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जनता को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी चाहिए

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महंगाई, बेरोज़गारी, शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और भ्रष्टाचार आदि मुद्दे सा़फ दिखाई देते हैं, लेकिन इन्हीं के साथ एक और महत्वपूर्ण मुद्दा दिखाई देता है, वह है अपराध. अपराध प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, लेकिन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अपराध से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है राजनीति का अपराधीकरण या अपराधियों का राजनीति में बेख़ौ़फ प्रवेश.

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बिहारः आरटीआई कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं

सूचना के अधिकार के सिपाही रामविलास सिंह अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगाते रहे, पर लखीसराय सहित बिहार का सारा पुलिस अमला आराम से सोता रहा. राज्य मानवाधिकार आयोग में भी उनकी फरियाद अनसुनी रह गई. अपराधी उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे थे और प्रशासन ने आंखें मूंद लेने में भलाई समझी.

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दिल्‍ली का बाबूः उत्तर प्रदेश के बाबू परेशान

उत्तर प्रदेश की राजनीति अपराध और भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात रही है. इस वजह से वहां काम करने वाले कई बाबुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हाल में वहां कई करोड़ रुपये का चिकित्सा घोटाला हुआ.

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ड्रग वॉर की चपेट में आम आदमी

मैक्सिको की औद्योगिक राजधानी कहलाने वाला मोंटेरे शहर मस्ती में डूबा हुआ था. शहर में पैसे वालों की कमी नहीं है. लोग जुआघर में जुआ खेलने में मस्त थे. अचानक कुछ बंदूकधारी वहां घुस आए और ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगे. जुआघर में अफरातफरी मच गई. लोग इधर-उधर भागने लगे. चारों ओर चीख-पुकार मच गई. बंदूकधारियों ने जुआघर को आग के हवाले कर दिया.

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फ़र्ज़ी एंकाउंटर: दोषी पुलिसवालों को फांसी हो

गत दिनों राजस्थान में दारा सिंह की फ़र्ज़ी मुठभेड़ में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे का प्रयोग करते हुए कहा है कि फ़र्ज़ी मुठभेड़ों में संलिप्त पुलिस वालों को फांसी पर लटका देना चाहिए. दारा सिंह एक संदिग्ध डाकू था, जिसकी राजस्थान पुलिस ने 23 अक्टूबर को एक फ़र्ज़ी मुठभेड़ के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी थी.

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सांप्रदायिक दंगा निरोधक विधेयकः मौजूदा कानून कहीं से कमतर नहीं

भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के बावजूद देश में टाडा जैसे क़ानून लागू हुए, मगर अपराध फैलते ही रहे. परिणाम यह हुआ कि जनता की मांग के मद्देनज़र न्याय की प्राप्ति के लिए 2005 और 2009 में विभिन्न स़िफारिशों एवं संशोधनों पर आधारित नया विधेयक प्रस्तुत किया गया. अब 2011 में पुराने क़ानूनों में संशोधन करके नया बिल पेश कर दिया गया है.

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मिलावटख़ोरों को फांसी हो

हमारे देश में इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है. देश में फैला मिलावटख़ोरी व नक़ली वस्तुएं बेचने वालों का नेटवर्क भी इसी भ्रष्टाचार का एक सर्वप्रमुख अंग है, परंतु बावजूद इसके कि लगभग प्रत्येक भारतीय इस समय कहीं न कहीं मिलावटख़ोरी या नक़ली वस्तुओं की ख़रीद फरोख्त का स्वयं शिकार हो रहा है.

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निराशा से भरा संपादकीय

मीडिया पर वह यहीं नहीं रुकते, उसी में आगे कहते हैं-देश की राजधानी में हर रोज दर्जनों हत्याएं, बलात्कार और लूटपाट की घटनाएं आम हो चुकी हैं. ग़रीबी-अमीरी के बीच की खाई अपराधों और हत्याओं से पाटी जा रही है.

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पटना विधि विज्ञान प्रयोगशाला : सुशासन और विकास का क़डवा सच

न्याय के साथ विकास और अपराध-भ्रष्टाचार मुक्त बिहार बनाने की बातें अच्छी लगती हैं तथा नीतीश कुमार ने अपना यह वादा पूरा करने की हर मुमकिन कोशिश भी की, लेकिन क़ानून का राज अभी पूरी तरह क़ायम नहीं हुआ है. क़ानून का पालन कराने वाली एजेंसी ईमानदारी से काम नहीं कर रही है.

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आतंकवादी मानवता के दुश्मन हैं

हिंदू आतंकवाद, मुस्लिम आतंकवाद, संघ परिवार का आतंकवाद यह तीनों ही शब्द स्वामी असीमानंद के अपराध स्वीकारने के बाद से लगातार सुनने में आ रहे हैं. एक अख़बार ने शीर्षक लगाया, असीमानंद के अपराध स्वीकारने से इस्लाम और मुसलमानों को बदनाम करने वालों का मुंह काला.

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कल चमन था आज वीरान हुआ चंबलः ये डकैत थे या बागी

चंबल जो कि खूंखार डकैतों के शरण स्थली के रुप में जाना जाता था, आजकल वीरान सा है. उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के ज़्यादातर दस्यु गिरोहों के खात्मे के चलते दस्युओं का खौफ जो ग्रामीणों के सिर चढ़कर बोलता था अब नज़र नहीं आता, चंबल के निकट बसे ग्रामीण अधिकतर डकैतों को डकैत नहीं बल्कि बाग़ी कहना ज़्यादा पसंद करते हैं.

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अपराध की भेंट चढ़ता देश का बचपन

नेशनल क्राइम रिकॉड्‌र्स ब्यूरो के नवीनतम आंकड़े देश के भविष्य की ख़ौ़फनाक तस्वीर पेश करते हैं. उनके मुताबिक़ पूरे देश में अपराधों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इससे भी ज़्यादा चिंता की बात यह है कि बाल अपराधों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हो रही है.

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पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल – 38

आनंद भारती और मुन्नी के बीच अच्छी-खासी बातें होने लगी थीं. वह अपने दुखद दिनों की बातें भी उन्हें बता देती थी. वह उसके लिए परिवार के उस बड़े सदस्य की तरह हो गए थे, जिससे उसने ज़िंदगी की नई परिभाषा सीखी थी. मुन्नी का जलवा साहिबाबाद से लेकर वसुंधरा तक दिखने लगा था.

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अपराधियों की बल्‍ले-बल्‍ले

बिहार में विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने शेष हैं. बम और हथियार बनाने के साथ-साथ चुनावी अपराध करने वाले तत्व अपने-अपने तौर-तरीके दुरुस्त करने में लग गए हैं. ऐसा हो भी क्यों नहीं, सभी के अपने-अपने रेट हैं और अपराध करने का तरीका भी अलग-अलग है.

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कब और कैसे हुई नटवर लाल की मौत, रहस्य बरक़रार

सीवान ज़िला मुख्यालय से लगभग 15 किमी पश्चिम में स्थित रूईया बंगरा जीरादेई प्रखंड का एक गांव है, जो कई टोलों में बसा है. देशरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद के पैतृक गांव से तीन किमी दक्षिण में बसा है नटवर लाल का गांव बंगरा, जिसके पश्चिम में है रूईया टोला.

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नेपाल से चल रहा अपराध का धंधा

बिहार सरकार अपराधियों को पकड़ने और खत्म करने का दावा अपने सुशासन में चाहे जितना कर ले, लेकिन हक़ीक़त कुछ और ही बयां करती है. वास्तविकता यह है कि शातिर अपराधी आज भी अपने ठिकानों को सुरक्षित रखते हुए मौक़ा पाते ही घटना को अंजाम देने से बाज नहीं आते.

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साइबर अपराध और कानून

सूचना तकनीक क़ानून के अंतर्गत मामलों के निष्पादन के लिए इसमें धारा 46 का प्रावधान किया गया है. मामलों के निष्पादन का अधिकार सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी को दिया गया है, जो इस क़ानून की धारा 46 और 47 के अंतर्गत मुआवज़े या क्षतिपूर्ति की राशि का निर्धारण करेगा.

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आतंक के साए में जी रहा है कटनी

कटनी ज़िला इन दिनों विभिन्न आपराधिक वारदातों का केंद्र बनता जा रहा है. इस क्षेत्र में जुए, सट्टे और नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों का खूब बोलबाला है. पुलिस की निष्क्रियता के वज़ह से यहां अवैध शस्त्रों का आवागमन और व्यापार भी आम है. पिछले दिनों राज्य के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता के प्रवास के दौरान भी इन समस्याओं से निपटने की दिशा में कोई विशेष कदम नहीं उठाया गया.

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साइबर आतंकवाद का बढ़ता खतरा

साइबर आतंकवाद को परिभाषित करते हुए कई लोग इसकी बड़ी संकीर्ण व्याख्या करते हैं. अक्सर इसे आतंकी संगठनों की ऐसी कार्रवाइयों के साथ जोड़ा जाता है, जिनमें ख़तरा और दहशत पैदा करने के इरादे से सूचना तंत्र को दुष्प्रभावित करने की कोशिश की जाती है.

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