अपराध की दुनिया में फंसता बचपन : मासूम या मुजरिम

बदलते परिवेश में बच्चे वक्त से पहले ही ब़डे हो रहे हैं. एक तऱफ वे कम उम्र में तमाम तरह

Read more

सुशासन का सच या फरेब

बिहार के चौक-चौराहों पर लगे सरकारी होर्डिंग में जिस तरह सुशासन का प्रचार किया जाता है, वह एनडीए सरकार की शाइनिंग इंडिया की याद दिलाता है. बिहार से निकलने वाले अ़खबार जिस तरह सुशासन की खबरों से पटे रहते हैं, उसे देखकर आज अगर गोएबल्स (हिटलर के एक मंत्री, जो प्रचार का काम संभालते थे) भी ज़िंदा होते तो एकबारगी शरमा जाते. ऐसा लिखने के पीछे तर्क है.

Read more

अराजकतावादी नक्सलवाद : पुनर्विचार की ज़रूरत

नक्सलवादियों की हाल-फिलहाल की गतिविधियों से ऐसा लगता है कि वे अपने उद्देश्यों से भटकते जा रहे हैं. कुछ समय पहले मलकानगिरी के ज़िलाधिकारी का अपहरण कर लिया गया, उड़ीसा में एक विधायक और इटली के दो नागरिकों का अपहरण कर लिया गया.

Read more

महिलाओं के अधिकार और क़ानून

हर व्यक्ति जन्म से ही कुछ अधिकार लेकर आता है, चाहे वह जीने का अधिकार हो या विकास के लिए अवसर प्राप्त करने का. मगर इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ लैंगिक आधार पर किए जा रहे भेदभाव की वजह से महिलाएं इन अधिकारों से वंचित रह जाती हैं.

Read more

नीतीश जी सुशासन कहां है

बिहार को आगे बढ़ाने और संवारने का सपना न केवल नीतीश सरकार ने देखा है, बल्कि यह सपना हर एक बिहारी के दिल में पिछले छह सालों से पल रहा है. न्याय की पटरी पर तेजी से विकास की दौड़ती गाड़ी देखना एक ऐसा ख्वाब है, जिसे हर बिहारी संजोए हुए है और चाहता है कि यह जितनी जल्दी हो, हक़ीक़त का लबादा पहन आम लोगों को दिखने लगे.

Read more

विद्रोह की क़ीमत

क्‍या सरकार और माओवादियों के बीच चूहे-बिल्ली की तरह चल रहे खूनी संघर्ष में बाबुओं की हालत एक बंधक की तरह हो गई है? मलकानगिरी के जिलाधिकारी आर विनील कृष्णा एवं जूनियर इंजीनियर पी एम मांझी के अपहरण और बाद में उनकी रिहाई से यह सवाल उठ रहा है.

Read more

विकास का वादा बनाम विनाश का भय

बलूचिस्तान ऑपरेशन की शुरुआत तो ग्वाडोर परियोजना की घोषणा के साथ हुई थी, लेकिन इसकी बुनियाद रखी गई हत्या, अपहरण और दिल को दहला देने जैसी वारदातों के साथ. ग्वाडोर बंदरगाह की बात तो की गई, लेकिन वादा केवल वादा ही बनकर रह गया.

Read more

खून बहाने का जुनून

नक्सलियों के सिर पर रोज खून बहाने का जुनून सवार होता है, तो पुलिस के जवानों पर नक्सलवाद के नासूर को खत्म करने का. इसी चक्कर में शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो, जब निरीह जनता के खून से यहां की धरती लाल न होती हो. कहीं नक्सली मारे जा रहे हैं तो कहीं सुरक्षाबल के जवान शहीद हो रहे हैं. हालात यह हैं कि कुछ इलाक़ों में नक्सलियों को लेवी देने के बाद ही विकास के काम का पहला पत्थर लग पाता है. दोनों राज्यों के कई इलाक़ों में रेलगाड़ियों का परिचालन नक्सलियों की मर्ज़ी पर निर्भर है

Read more

मृत्यु दंड : अमानवीय या ज़रूरत

कैपिटल पनिशमेंट, जिसे मृत्यु दंड या फांसी के नाम से भी जाना जाता है, का मुद्दा उसके समर्थकों और विरोधियों के बीच अक्सर गर्मागर्म बहस का कारण बनता रहा है. मृत्यु दंड के ख़िला़फ तर्क देते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल का मानना है, मृत्यु दंड मानवाधिकारों के उल्लंघन की पराकाष्ठा है. वास्तव में यह न्याय के नाम पर व्यवस्था द्वारा किसी इंसान की सुनियोजित हत्या का एक तरीक़ा है.

Read more

मोसाद का मिशन या युगांडा पर हमला

पिछले अंक में आपने पढ़ा कि किस तरह एयर फ्रांस के विमान का अपहरण किया गया और इस वारदात में कैसे एक राष्ट्रपति ने अपनी भूमिका निभाई. एक समय तो इज़रायली सरकार इन अपहरणकर्ताओं के सामने घुटने टेक चुकी थी, लेकिन मोसाद ने अपनी चालाकी से इज़रायल को न स़िर्फ मुसीबत से बाहर निकाला, बल्कि दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब भी दिया. आख़िर मोसाद ने कैसे इस मिशन को अंजाम दिया, आइए जानते हैं इस अंक में…

Read more