कैसे बचेगी गंगा-जमुनी तहजीब

गंगा की निर्मलता तभी संभव है, जब गंगा को अविरल बहने दिया जाए. यह एक ऐसा तथ्य है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है, लेकिन गंगा की स़फाई के नाम पर पिछले 20 सालों में हज़ारों करोड़ रुपये बहा दिए गए और नतीजे के नाम पर कुछ नहीं मिला. एक ओर स़फाई के नाम पर पैसों की लूटखसोट चलती रही और दूसरी ओर गंगा पर बांध बना-बनाकर उसके प्रवाह को थामने की साजिश होती रही.

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश : दुधारू पशुओं की क़त्लगाह

दोआब स्थित मेरठ और उसके आसपास के क्षेत्रों में कभी दूध-दही की नदियां बहती थीं. बुलंदशहर, बाग़पत एवं मुज़फ्फरनगर में डेयरी उद्योग चरम पर था. पशुपालन और दुग्धोपार्जन को गांवों का कुटीर उद्योग माना जाता था, लेकिन जबसे यहां अवैध पशु वधशालाएं बढ़ीं, तबसे दूध-दही की नदियों वाले इस क्षेत्र में मांस और शराब का बोलबाला हो गया.

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मत भूलिए, आप सरकार के चेहरे हैं

बीते 5 जून को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बीडीसी की बैठक के दौरान ब्लॉक प्रमुख राजेश यादव से कहासुनी हो जाने पर समाजवादी पार्टी के विधायक हाजी इऱफान के भाई हाजी उस्मान एवं उनके समर्थकों ने गोलीबारी कर दी, जिससे कई लोग जख्मी हो गए.

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मध्य प्रदेश : अवैध खनन का काला कारोबार

कटनी और जबलपुर देश के उस केंद्रीय भू-भाग में स्थित हैं, जिसे राष्ट्र की हृदयस्थली कहा जाता है. इस इलाक़े को आज रौंदा, नोचा, खसोटा और लूटा जा रहा है. करोड़ों-अरबों की प्राकृतिक संपदा का मुना़फा मुट्ठी भर हाथों में क़ैद हो रहा है. कंपनियां, सरकार, प्रशासन एवं दलाल इस सीमा तक सक्रिय हैं कि शासकीय नियम-क़ानून तो दूर, मानवीय मूल्यों का भी मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है.

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मिर्जापुर : अवैध नियुक्तियों के जरिये करोड़ों की चपत

उत्तर प्रदेश में दो मुख्य चिकित्साधिकारियों की हत्या ने पूरे देश का ध्यान स्वास्थ्य विभाग में हो रही लूट की ओर खींचा है. इस विभाग में घोटालों की संस्कृति इतनी व्यापक है कि अन्य विभागों के प्रभावशाली लोगों ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए.

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उत्तराखंडः पूर्णानंद दिलाएंगे निगमानंद के हत्यारों को सजा

धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा और पर्यावरण की रक्षा की मांग को लेकर शहादत देने वाले युवा संत निगमानंद की समाधि की मिट्टी अभी सूखी भी नहीं थी कि मातृ सदन के दूसरे युवा संत स्वामी पूर्णानंद सरस्वती ने अपने गुरुभाई की मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाने और गंगा रक्षा के संकल्प के साथ सत्याग्रह शुरू कर दिया. गंगा की रक्षा के लिए मातृ सदन अब तक दो शहादत दे चुका है.

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हिमालय को बचाने की अंतरराष्ट्रीय पहल

जलवायु परिवर्तन और प्रकृति के साथ बढ़ती छेड़छाड़ का जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ा है. इंसान अपने फायदे के लिए एक तऱफ जहां जंगलों का सफाया कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ उसने प्राकृतिक संपदा की लूटखसोट मचा रखी है, बग़ैर इस बात का ख्याल किए हुए कि इस पर अन्य जीवों का भी समान अधिकार है. बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप ने पर्वतीय क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को भी गड़बड़ कर दिया है, जिससे यहां पाए जाने वाले कई जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की प्रजातियां विलुप्त हो गई हैं या होने के कगार पर हैं.

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आवासीय ईलाकों में गैरकानूनी व्यवसायिक गतिविधियां

यह समस्या लगभग हर छोटे-बड़े शहर की है. आवासीय-रिहायशी इलाक़ों में लालची और स्वार्थी क़िस्म के लोग ऐसे-ऐसे व्यवसाय शुरू कर देते हैं, जिनकी वजह से उस इलाक़े में रहने वाले लोगों के लिए कई सारी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं. मसलन, जहां अवैध गोदाम, पार्किंग, मोटर वर्कशॉप चल रहे हैं, जिनकी वजह से वहां प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है, साथ ही वहां रहने वाले लोग भी परेशान रहते हैं.

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अफीम से महकते खेत

अफग़ानिस्तान की वादियां ही अ़फीम के फूलों से नहीं महकतीं, अब तो भारत में भी ब़डे पैमाने पर अ़फीम की खेती हो रही है. केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) के मुताबिक़, देश में क़रीब दस लाख लोग अ़फीम की खेती से ज़ुडे हुए हैं. देश के विभिन्न राज्यों के 6900 गांवों के एक लाख 70 हज़ार परिवार अ़फीम की खेती कर रहे हैं. इन सभी को सरकार ने लाइसेंस दे रखा है.

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अतिक्रमण की आग और झारखंड

अतिक्रमण हटाओ अभियान ने राज्य में खासी उथल-पुथल मचा दी है. राजधानी रांची हो या औद्योगिक नगरी जमशेदपुर, बोकारो हो या देवघर, हर तऱफ इस अभियान ने अमन-चैन को ख़तरा पैदा कर दिया है. इस मामले में सियासी रोटियां भी जमकर सेंकी जा रही हैं. बीते 27 अप्रैल को धनबाद भी अचानक दहक उठा.

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योजना और स्‍वास्‍थ्‍य दोनों से खिलवाड़

उत्तर प्रदेश में पांच वर्ष पूर्व लागू राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना में कार्ड बनवाने से लेकर इलाज कराने तक की राह में रोड़े ही रोड़े नज़र आ रहे हैं. ग्राम्य विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावे धराशाई होते नज़र आ रहे हैं, क्योंकि इस योजना का उद्देश्य था अनौपाचारिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाली प्रणाली को सुनिश्चित करना लेकिन इतने वर्षों के बाद भी यह योजना जनमानस को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में नाक़ाम रही है.

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उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

फलों के उत्पादन में ज़िले को अग्रणी बनाने के लिए मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के प्रति विभाग पूरी तरह चौकस है. विभाग का प्रयास है कि आम, लीची, केला आदि के उत्पादन के मामले में ज़िला स्वालंबी बने.

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दिल्‍ली का बाबूः बाबू अपनी संपत्ति की घोषणा करें

वर्ष 2010 में अवैध रूप से 280 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा करने के मामले में एक आईएएस अधिकारी का नाम आने के बाद अब लगता है कि 2011 में बाबुओं को अपनी संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा करने के लिए कहा जा सकता है. नीतीश कुमार बिहार में यह अभियान शुरू भी कर चुके हैं और सफल होते दिख रहे हैं.

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काले हीरे का काला बाजार

झारखंड की सत्ता संस्कृति कमोबेश कोयले और लोहे के अवैध धंधे से ही ऊर्जा प्राप्त करती है. यह धंधा राज्य के ताक़तवर नेताओं और आला अधिकारियों के संरक्षण में बड़े ही संगठित रूप से संचालित होता है.

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लॉटरी से कंगाल हो रहे

सुबह होते ही पूर्णिया एवं कोसी इलाक़े में अवैध लॉटरी टिकट की बिक्री शुरू हो जाती है. दलालों के माध्यम से इन टिकटों को सुदूर ग्रामीण इलाक़ों में भी पहुंचा दिया जाता है और इन टिकटों के मोहजाल में फंसकर भोले-भाले ग्रामीण अपना सब कुछ बर्बाद कर रहे हैं.

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सरकारी अमला कर रहा है बाघों का शिकार

भारत में टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त मध्य प्रदेश में बाघों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा हैं. खुले वनों में मौजूद बाघों का अवैध शिकार इस बुरी तरह हो रहा है कि अब कई वनक्षेत्र पूरी तरह से बाघ रहित हो चुके हैं, लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि सरकार द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यप्राणी अभ्यारण्यों में भी बाघों की मौत आये दिन हो रही है.

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मुंगेर की अर्थव्यवस्था का आधार-अवैध हथियार

चाहे दक्षिण के तमिलनाडु या कर्नाटक में हथियारों का जखीरा पकड़ा जाए अथवा मुंबई, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल में हथियारों की बरामदगी हो, मुंगेर का नाम ज़रूर आता है. देसी कट्टे, बंदूक एवं राइफल से लेकर अत्याधुनिक पिस्टल, कारबाइन और एके-47 तक मुंगेर में बनाई जा रही हैं.

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सार-संक्षेप : रीवा में फिर बसेगा स़फेद बाघ

दुनिया में स़फेद बाघ, रीवा की ही देन है, लेकिन मध्य प्रदेश के वन्यप्राणी संरक्षण और वन प्रबंधन कार्यक्रमों की खामियों के कारण अब सफेद बाघ अपनी जन्मभूमि में ही अस्तित्वहीन हो चुका हैं, लेकिन चार दशक बाद अब एक बार फिर सफेद बाघ को रीवा में बसाने के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार तैयारी कर रही हैं.

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अवैध खनन के लिए नक्‍सली डर पैदा करने की कोशिश

कटनी ज़िले में नक्सलियों की उपस्थिति का दावा नहीं किया जा सकता है, यह भी नहीं कहा जा सकता है कि भविष्य में इस ज़िले में नक्सली अपनी धमक दे सकते हैं. हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा किए गए दावों पर भरोसा किया जाए तो कटनी नक्सलियों के लिए राज्य में पहली पसंदीदा जगह है.

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अपनी ही खनिज संपदा से बेखबर है सरकार

देश सरकार अपनी अमूल्य खनिज संपदा से इतनी बे़खबर है कि उसके पास जानकारी ही नहीं है कि राज्य के किस क्षेत्र में कहां और कितना खनिज भूगर्भ में मौजूद है, लेकिन राज्य का खनिज माफिया सरकार से ज़्यादा बा़खबर और जागरूक है. इसीलिए उसे मालूम है कि किस क्षेत्र से किस खनिज की कितनी चोरी आसानी से की जा सकती है.

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सरकारी संरक्षण में चल रहा है अवैध खनन

मध्य प्रदेश की खनिज सम्पदा पर लगातार डकैती डालने का सिलसिला जारी है. देश भर के खनिज मा़फिया से संबंधित व्यक्ति इन दिनों कटनी व जबलपुर क्षेत्र के खदान क्षेत्रों में सक्रिय हैं. यहा कायम किए गए एक आपराधिक तंत्र के भरोसे बिना रॉयल्टी चुकाये अवैध रूप से उत्खनन का सिलसिला जारी है

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महेश्‍वर नर्मदा जल परियोजनाः केंद्र और राज्‍य आमने-सामने

महेश्वर नर्मदा जल परियोजना को लेकर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार में तनातनी चल रही है. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर इस पर आगे काम बंद करने के निर्देश दिए तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भड़क उठे. उन्होंने प्रधानमंत्री को मध्य प्रदेश के विकास के प्रति अनुदार और संवेदनहीन बताया. लेकिन, सच्चाई मुख्यमंत्री को भी मालूम है.

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सार–संक्षेपः सुंदरी, ब्लैकमेलिंग और अ़फसरशाह

प्रदेश के नौकरशाह तमाम प्रकार के भ्रष्टाचार में तो लिप्त हैं ही, पर अ़फसरों का एक वर्ग सुरासुंदरी के मोह में भी फंसा हुआ है. एक मामला हाल ही में उजागर हुआ है. राजधानी भोपाल के समीप औबेदुल्लागंज में पुलिस के आतंकवादी निरोधक दस्ते ने जबलपुर के एक ऐसे गिरोह को पकड़ने में सफलता पाई है, यह गिरोह सुंदर लड़कियों को अ़फसरों के पास भेजकर उनके अंतरंग संबंधों को खुफिया कैमरे में क़ैद कर अश्लील फिल्में बनाता था.

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सांस्‍कृतिक धरोहरों पर हमला

मध्य प्रदेश में भू-माफिया और खदान माफिया स्वार्थवश भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहरों को किस तरह से बर्बाद कर रहे हैं, इसका एक उदाहरण विदिशा ज़िले में देखने को मिला है. अब पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित कई शैलचित्र भू-माफियाओं की अवैध खुदाई के चलते नष्ट हो रहे हैं. विदिशा ज़िला प्राचीन भारतीय संस्कृति के वैभवशाली युग का साक्षी रहा है.

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सार-संक्षेप: मध्य प्रदेश-अंधेर नगरी, चौपट राजा

मध्य प्रदेश सरकार में कुछ भी अजूबा नहीं है. हाल ही में खंडवा के विकास आयुक्त कार्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के स्टेनों ने 32 कर्मचारियों की अवैध रूप से नियुक्ति कर उनसे लाखों रुपयों की अवैध कमाई कर ली, लेकिन मामला प्रकाश में आते ही इसे दबा दिया गया. खंडवा से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले 14 नवंबर 2008 को विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल से संयुक्त आयुक्त के नाम से एक आदेश जारी हुआ,

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आतंक के साए में जी रहा है कटनी

कटनी ज़िला इन दिनों विभिन्न आपराधिक वारदातों का केंद्र बनता जा रहा है. इस क्षेत्र में जुए, सट्टे और नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों का खूब बोलबाला है. पुलिस की निष्क्रियता के वज़ह से यहां अवैध शस्त्रों का आवागमन और व्यापार भी आम है. पिछले दिनों राज्य के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता के प्रवास के दौरान भी इन समस्याओं से निपटने की दिशा में कोई विशेष कदम नहीं उठाया गया.

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ज़मीन पर अवैध क़ब्ज़ा करने वाले नौकरशाह

चंडीगढ के पास मोहाली में अवैध ज़मीन अधिग्रहण के मामले की जांच कर रहे पंजाब पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने उच्च न्यायालय को पेश रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि मोहाली के डिप्टी कमिश्नर द्वारा पांच सौ एकड़ ज़मीन का हस्तांतरण अवैध है. डिप्टी कमिश्नर ने यह ज़मीन नेताओं और नौकरशाहों के नाम हस्तांतरित की थी.

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पश्चिम बंगाल बना दुल्‍हनों का बाजार

बंगाल के सीमावर्ती ज़िलों में ओ पार यानी बांग्लादेश से लाई जाने वाली लड़कियां कटी पतंग की तरह होती हैं, जिन्हें लूटने के लिए कई हाथ एक साथ उठते हैं. इनमें होते हैं दलाल, पुलिस, स्थानीय नेता और पंचायत प्रतिनिधि. अवैध रूप से सीमा पार से आने वाली इन लड़कियों की मानसिक हालत बलि के लिए ले जाई जा रही गाय की तरह होती है.

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कोड़ा प्रकरणः विनोद सिन्‍हा को बचाने की रणनीति तैयार

खानों के आवंटन में दलाली के रूप में अर्जित की गई अकूत संपत्ति के मुख्य आरोपियों को बचाने की रणनीति तैयार की जा रही है. तक़रीबन चार हज़ार करोड़ रुपए की माइंस दलाली के आरोपी मधु कोड़ा एंड कंपनी के मामले की जांच सीबीआई के हवाले करने से राज्य सरकार के इंकार का रहस्य अब परत-दर- परत खुलने लगा है.

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सार –संक्षेप : महिलाएं पुलिस में झूठी रिपोर्ट लिखवाती हैं

महिलाओं के हितों की सुरक्षा के लिए बनाए गए दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा जैसे विशेष क़ानून का महिलाएं ही नाजायज़ फायदा उठा रही हैं. महिला थाना पुलिस के पास 50 फीसदी ऐसे मामले आ रहे हैं जिनमें पति या ससुराल पक्ष के खिला़फ झूठी शिकायत कर प्रकरण दर्ज़ कराने के प्रयास किए जाते हैं.

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