जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का दंशा

महान दार्शनिक उदयनाचार्य की जन्मस्थली करियन को आज पंचायत का दर्जा मिल चुका है, लेकिन पंचायतीराज के दस वर्षों के कार्यकाल में उदयनाचार्य जैसे विश्व प्रसिद्ध चिंतक एवं दार्शनिक के लिए कोई विशेष कार्य नहीं किया गया. स्थानीय जनप्रतिनिधि की तो और बात है बिहार के चार मुख्यमंत्रियों ने उदयनाचार्य की जन्मस्थली को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने की घोषणा की थी जो आज तक वास्तविकता में नहीं बदल सकी. पंचायत में ग्रामीण सड़कें, बिजली, नलकूप, स्वास्थ्य एवं शिक्षा की बदहाली पंचायतवासियों को मुंह चिढ़ाती है.

Read more