जानिए यूपी को अपने चंगुल में कैसे फंसा रहा है आईएसआई

उत्तर प्रदेश के तीन दर्जन से अधिक जिलों में आईएसआई का नेटवर्क फैला हुआ है. बसपा के शासनकाल में विधानसभा

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यूपी: एडीएम दफ्तर का स्टेनो ही निकला आईएसआई का जासूस

चौथी दुनिया ब्यूरो : उत्तर प्रदेश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का नेटवर्क काफी तेजी से फैल रहा है. यही नेटवर्क

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सर्जिकल स्ट्राइक की धमकी से पाकिस्तान परेशान, अभी तो मोदी का ब्रह्मास्त्र है बाकी

  नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल) : भारत के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान को अपने बर्ताव के वजह से

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उबल रहा है भारतीय जनमत : पाकिस्तान को मुंहतो़ड जवाब आखिर कब

सितम्बर महीने में संयुक्त राष्ट्र की आम बैठक होने वाली है. इस बैठक में भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह

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पाकिस्तान में नवाज शरीफ का राज: बहेगी अमन की बयार !

पाकिस्तान में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब कोई व्यक्ति, यानी नवाज शरीफ तीसरी बार प्रधानमंत्री बन रहे हों.

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ईमानदार पत्रकार, दलाल पत्रकार

पत्रकारिता प्रतिस्पर्धा का पेशा है. प्रतिस्पर्धा रिपोर्ट, स्टोरी और स्कूप के क्षेत्र में होती है. प्रतिस्पर्धा निर्भीकता में होती है,

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किसकी मिलीभगत से चल रहा है नकली नोट का खेल

आरबीआई के मुताबिक़, पिछले 6 सालों में ही क़रीब 76 करोड़ रुपये मूल्य के नक़ली नोट ज़ब्त किए गए हैं. ध्यान दीजिए, स़िर्फ ज़ब्त किए गए हैं. दूसरी ओर संसद की एक समिति की रिपोर्ट कहती है कि देश में क़रीब एक लाख 69 हज़ार करोड़ रुपये के नक़ली नोट बाज़ार में हैं. अब वास्तव में कितनी मात्रा में यह नक़ली नोट बाज़ार में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, इसका कोई सही-सही आंकड़ा शायद ही किसी को पता हो.

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पाकिस्तान : सरकार और सेना आमने-सामने

पाकिस्तान में सरकार और सेना के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. हालांकि सरकार भी यह कोशिश कर रही है कि इस विवाद का ख़ुलासा न हो, इसलिए जैसे ही मीडिया में ख़बर आई कि सरकार सेना प्रमुख एवं आईएसआई प्रमुख को हटाना चाहती है तो प्रधानमंत्री गिलानी ने विरोध में अपना बयान जारी किया कि ऐसी अफवाह सरकार को अस्थिर करने के लिए फैलाई जा रही है.

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यह पाकिस्तान की संप्रभुता पर हमला है

अमेरिका और पाकिस्तान के बीच फिर से तनाव पैदा हो गया है. हक्कानी नेटवर्क के साथ आईएसआई के रिश्तों को लेकर बनी खाई पूरी तरह पाटी भी नहीं जा सकी थी कि एक अन्य मुद्दे ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा दिया.

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अमेरिका में आईएसआई का नेटवर्क : सेमिनार के ज़रिये कूटनीतिक युद्ध

कश्मीर प्रचारक ग़ुलाम नबी फाई की अमेरिका में गिरफ्तारी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. फाई को अमेरिका ने इसलिए पकड़ा है, क्योंकि वह तथाकथित रूप से यह बताने में विफल रहा कि वह पाकिस्तन सरकार और उसकी खु़फ़िया एजेंसी आईएसआई के लिए काम कर रहा था. सवाल यह भी है कि भारतीय उदारवादी जानबूझकर या अनजाने में कहीं आईएसआई की यूजफुल इडियट्स यानी कठपुतली तो साबित नहीं हो रहे.

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संभालिए, अभी कुछ बिगडा़ नहीं है

बहुत सारी चीजें अमेरिका में बनती हैं, अमेरिका में खुलती हैं, तब हमें पता चलता है कि हम किस तरह के जाल में कभी फंस चुके थे, इन दिनों फंस रहे हैं या आगे फंसने वाले हैं. हमारे देश की धुरंधर हस्तियां, जो लोगों की राय बनाती हैं, जिनमें जस्टिस राजेंद्र सच्चर, दिलीप पडगांवकर, उम्र के आखिरी पड़ाव पर खड़े प्रसिद्ध संपादक, लेखक एवं सोशल एक्टिविस्ट कुलदीप नैय्यर साहब और गौतम नवलखा शामिल हैं, जिन्होंने रूरल जर्नलिज्म और वैचारिक पत्रकारिता में नाम कमाया तथा इनके साथ बहुत सारे लोग एक साजिश में फंसे नजर आ रहे हैं, जिसका खुलासा अमेरिका में हुआ.

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आईएसआई का उदारवादी नेटवर्क

कश्मीर के बारे में दुनिया के किसी भी व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है, चाहे वह किसी भी देश का रहने वाला हो, लेकिन जब वह व्यक्ति अपनी राय रखने के लिए पैसे लेता है तो इस पर अ़फसोस होता है. दिलीप पडगांवकर, कुलदीप नैयर, जस्टिस राजेंद्र सच्चर और गौतम नौलखा भारत के वे लोग हैं, जिनका हर कोई न केवल सम्मान करता है, बल्कि उन्हें ओपेनियन मेकर भी कहा जाता है.

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सरकार चुप क्यों है

26 नवंबर, 2008 की त्रासदी को मुंबई के लोग अभी भूल भी नहीं पाए थे कि 13 जुलाई, 2011 को फिर से दिल दहला देने वाली घटना घट गई. महाराष्ट्र में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए कौन वहां की क़ानून व्यवस्था की स्थिति की आलोचना कर सकता है. बिना किसी सरकारी सहायता के मुंबई वालों को इस विपत्ति से उबरने में अपनी चिरपरिचित योग्यता का परिचय देना पड़ेगा.

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चीन की छत्रछाया के निहितार्थ

दुनिया जानती है कि हर दृष्टिकोण से सर्वाधिक ताक़तवर स़िर्फ अमेरिका है, लेकिन बीच-बीच में चीन के उछलने से कई सवाल खड़े होते रहते हैं. ख़ासकर तब, जब वह पाकिस्तान जैसे देश के संरक्षण के लिए लाठी लेकर खड़ा दिखता है. हालांकि चीन को यह पता है कि पाकिस्तान यदि अमेरिका या भारत के विरुद्ध कुछ करना तो दूर की बात, कूटनीतिक रूप से ऐसा सोच भी ले तो ये दोनों देश उसकी ईंट से ईंट बजा देने की क्षमता रखते हैं.

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विकीलीक्स ने पाकिस्तान की पोल खोली

भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान उसके खिला़फ जंग के लिए किसी भी व़क्त तैयार है. वह भारत विरोधी आतंकी संगठनों को बढ़ावा देता है, देश में अशांति फैलाने के लिए हर तरह की मदद उपलब्ध कराता है. यह बात तो हर भारतीय जानता है तो फिर इसमें नया क्या है. संवेदनशील दस्तावेजों को प्रकाशित करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स द्वारा लीक किए गए दस्तावेजों में यदि कुछ नया है तो वह यह कि यह बात अमेरिका भी अच्छी तरह जानता है. हालांकि अमेरिका अब तक इसे सार्वजनिक तौर पर स्वीकार करने से बचता रहा है, लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग के जो दस्तावेज विकीलीक्स ने लीक किए हैं, उससे यह बात स्पष्ट हो जाती है. साथ ही यह बात भी खुलकर सामने आती है कि आतंकवाद पाकिस्तान की विदेश नीति का एक अहम अंग है, जिसके ज़रिये वह अमेरिका और भारत को ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है.

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डेविड हेडली : भारत बनाम अमेरिका-पाकिस्तान

पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक डेविड हेडली के बारे में परत दर परत जो खुलासे हो रहे हैं, वह निश्चित रूप से चौंकाने वाले हैं. उक्त खुलासे खासकर भारत को सचेत करते हैं कि जिस तरह वह पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकता, उसी तरह उसे अमेरिका को भी संदिग्ध निगाहों से देखना चाहिए.

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यह पाकिस्तान की मजबूरी है

एक महीने पहले जब मैंने यह लिखा था कि पाकिस्तान में सेना दस्तक दे रही है तो कई लोगों ने आश्चर्य जताया. दरअसल सारे संकेत इस ओर इशारा कर रहे थे कि सितंबर महीने तक सेना सत्ता पर क़ाबिज़ हो जाएगी.

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जासूस, जिसने भारत को डरा दिया

माता हारी होने के लिए ख़ूबसूरत होना पहली शर्त नहीं है, आपको बस उपलब्ध होना चाहिए. नीदरलैंड में पैदा हुई और पेरिस में पली-बढ़ी मार्गरेट जेले पहले विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी की एक एजेंट थी, जिसने जासूसी को जिस्मानी रिश्तों के परिप्रेक्ष्य में नई पहचान दी. लेकिन जेले वास्तव में बेडौल शरीर की मलिका थी, जिसे ख़ूबसूरत न होने के कारण एक डांसिंग ग्रुप में जगह नहीं मिली थी और मजबूरी में उसे एक सर्कस में काम करना पड़ा था.

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प्‍यार, पैसा और गद्दारी

पैसे का लोभ, ऊंचा उड़ने की हसरत और वासना की आग इंसान को क्या से क्या बना देती है. महत्वाकांक्षाओं के पीछे भागता इंसान ग़लत-सही के बीच का फर्क़ भूल जाता है और अक्सर कुछ ऐसा कर बैठता है, जिसे हम गद्दारी कहते हैं. माधुरी गुप्ता का गुनाह यही है. 53 साल की अधेड़ उम्र में शारीरिक और भौतिक सुखों की चाहत ने उसे इतना पागल कर दिया कि वह दुश्मनों के इशारों पर नाचने लगी.

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बेंत तस्करी से अधिकारी अंजान

बेंत का सोफा हो या कुर्सी, डायनिंग टेबल हो या टोकरी, अगर आपको ये सारी चीज़ें खरीदनी हैं तो इसके लिए महज़ छह से सात हज़ार रुपये खर्च करने होंगे और संपर्क करना होगा नेपाल के किसी कारीगर से. वजह, नेपाल के रानीगंज, रत्नगंज एवं त्रिवेणी आदि इलाक़ों में बेंत तो नहीं उपजता है, लेकिन बड़े पैमाने पर इसका कारखाना ज़रूर चलता है.

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भारत-बांग्‍लादेश संबंध और पूर्वोत्‍तर का मुद्दा

काफी उम्मीदों और ढेर सारी संभावनाओं के बावजूद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में अपेक्षित सुधार नहीं आ सका है. भौगोलिक, भाषाई, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से दोनों देश एक-दूसरे के का़फी नज़दीक रहे हैं. इसके बावजूद अविश्वास और संदेह की खाई दोनों देशों के बीच हमेशा मौजूद रही. शेख हसीना वाजिद पहले भी सत्ता में थीं. तब भी उन्हें और उनकी पार्टी को लगातार पाकिस्तान समर्थित धार्मिक कट्टरपंथी ताक़तों से जूझना पड़ा था. उन ताक़तों से, जो भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को बिगाड़ने की कोशिश करती रही हैं.

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क्‍या तालिबान आतंकवाद को बेच देगा?

तालिबान को खदेड़ने के लिए अमेरिका ने आठ साल पहले अ़फग़ानिस्तान में क़दम रखा. एक हफ़्ते पहले लंदन में तालिबानियों का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया कि वे आगे आकर सत्ता में भागीदारी करें. इससे भी अहम बात यह है कि तालिबानियों को ऐसा करने के लिए 1.5 बिलियन डॉलर की पेशकश की गई.

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ज़रदारी की पकड़ से बाहर हुए परमाणु हथियार

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जैसे ही अ़फग़ानिस्तान में आतंकवाद के ख़िला़फ अपनी नई नीति की घोषणा की, वैसे ही दुनिया के सबसे ख़तरनाक देश पाकिस्तान में हालात और भी ख़राब हो गए. पाकिस्तानी सेना व विपक्ष के दबाव में आकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आस़िफ अली ज़रदारी को देश की परमाणु कमान प्रधानमंत्री यूसु़फ रज़ा गिलानी को सौंपनी पड़ी. यह महज़ एक शुरुआत है. ज़रदारी ने यह क़दम भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते संभवत: महाभियोग से बचने के लिए उठाया है. इस क़दम से उन्होंने सेना को संतुष्ट करने की कोशिश की है, जो उन्हें कमज़ोर करने के लिए तैयार बैठी है.

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हाफिज सईद और पाकिस्तान की मजबूरी

क्या भारत की सरकार हा़फिज़ सईद के लिए अपने पड़ोसी से हमेशा के लिए बातचीत बंद कर देगी या फिर भारत का यह रुख़ स़िर्फ महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाले चुनाव तक के लिए सीमित है? मुंबई के आंतकियों के मामले में क्या दोनों देशों की सरकारें अपनी-अपनी जनता को गुमराह कर रही हैं?

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