भाजपा सांसद श्यामाचरण गुप्ता का बयान नोटबंदी से बेरोज़गारी बढ़ी है

नोटबंदी के एक वर्ष पूरे होने पर केन्द्र में सत्ताधारी भाजपा और केन्द्रीय मंत्री कालाधन से निपटने के लिए नोटबंदी

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ज़िंदगी से प्यार करती हूँ-जीना चाहती हूँ

अगर आप आयरन लेडी इरोम शर्मिला को देखकर नहीं पिघलते और आपको शर्म नहीं आती, तो फिर आपको आत्म-निरीक्षण की

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रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश के अलग-अलग राज्यों से आए किसान जब संसद के बाहर आंदोलन कर रहे थे, उसी दिन संसद के भीतर माननीय सदस्य एफडीआई के मुद्दे पर बहस कर रहे थे.

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मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने में जुटी हैं. बात चाहे कांग्रेस शासित महाराष्ट्र की हो या फिर भाजपा शासित मध्य प्रदेश की, हालात कमोबेश एक जैसी ही हैं.

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रॉबर्ट वाड्रा को आरोपों का सामना करना चाहिए

रॉबर्ट वाड्रा ने जो किया, वह अनोखा नहीं है. जो भी बिजनेस में होते हैं, उनमें ज़्यादातर लोग ऐसे ही तरीक़े अपनाते हैं और अपनी संपत्ति बढ़ाते हैं. फर्क़ स़िर्फ इतना है कि उनका जुड़ाव सत्ता से नहीं होता, जबकि रॉबर्ट वाड्रा का रिश्ता सीधे सत्ता से है और सत्ता से भी इतना नज़दीक का कि वह वर्तमान सरकार को नियंत्रित करने वाली सर्वशक्तिमान महिला श्रीमती सोनिया गांधी के दामाद हैं और भारत के भावी प्रधानमंत्री, यदि बने तो, राहुल गांधी के बहनोई हैं.

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शेखावटी- जैविक खेती : …और कारवां बनता जा रहा है

पंजाब में नहरों का जाल है. गुजरात और महाराष्ट्र विकसित राज्य की श्रेणी में हैं. बावजूद इसके यहां के किसानों को आत्महत्या करनी प़डती है. इसके मुक़ाबले राजस्थान का शेखावाटी एक कम विकसित क्षेत्र है. पानी की कमी और रेतीली ज़मीन होने के बाद भी यहां के किसानों को देखकर एक आम आदमी के मन में भी खेती का पेशा अपनाने की इच्छा जागृत होती है, तो इसके पीछे ज़रूर कोई न कोई ठोस वजह होगी. आखिर क्या है वह वजह, जानिए इस रिपोर्ट में:

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कर्ज का कुचक्र और किसान

बीते 22 जुलाई को उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जनपद की तहसील रुदौली के सिठौली गांव में ज़मीन नीलाम होने के डर के चलते किसान ठाकुर प्रसाद की मौत हो गई. ठाकुर प्रसाद का बेटा अशोक गांव के एक स्वयं सहायता समूह का सदस्य था. उसने समूह से कोई क़र्ज़ नहीं लिया था. समूह के जिन अन्य सदस्यों ने क़र्ज़ लिया था, उन्होंने अदायगी के बाद नो ड्यूज प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया था.

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आत्‍महत्‍या की कीमत हम सब चुकाते हैं

वर्ष 2006 में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री नवीन जिंदल ने संसद में एक मुद्दा उठाया कि भारतीय छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं की वजह क्या है और सरकार किस तरह आत्महत्या के आंकड़े बढ़ने से रोक सकती है. इसके बाद संसद की तऱफ से कुछ विशेष क़ानून बनाए गए. सबसे पहले तो परीक्षाओं से जुड़ी हेल्पलाइन शुरू की गई, जो परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को फोन पर साइकोलॉजिकल एडवाइस देती है.

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जनता के धैर्य की परीक्षा मत लीजिए

सरकार ने एक झटके में पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए. डीजल और रसोई गैस के दाम वैसे ही ज़्यादा हैं, लेकिन अभी और बढ़ सकते हैं. सरकार को मालूम था कि देश में इसका विरोध होगा, गुस्सा पैदा होगा, कुछ विपक्षी पार्टियां लकीर पीटने के लिए आंदोलन की घोषणा करेंगी और सिंबोलिक आंदोलन भी होंगे, इसके बावजूद उसने पेट्रोल के दाम 12 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ा दिए.

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बिल्ली बनी मौत की वजह

जब किसी का कोई प्रिय शख्स मर जाता है तो मारे दु:ख के वह पागल सा हो जाता है, कभी-कभी उसकी मौत तक हो जाती है. इसी तरह कई लोग पालतू जानवरों से इतना प्यार करते हैं कि उनकी मौत के सदमे को सहन नहीं कर पाते. पिछले दिनों ब्रिटेन में अपनी पालतू बिल्ली की मौत से दु:खी एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली.

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पूर्वांचल के बुनकरों का दर्दः रिश्‍ता वोट से, विकास से नहीं

केंद्र की यूपीए सरकार से पूर्वांचल के लगभग ढ़ाई लाख बुनकरों को का़फी उम्मीदें थीं. बुनकरों के लिए करोड़ों रुपये के बजट का ऐलान सुनते ही बुनकरों को यक़ीन हो गया कि उनकी हालत अब सुधरने वाली है, लेकिन जब हक़ीक़त सामने आई तो वे खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगे.

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क्यों नहीं बनते ये चुनावी मुद्दे

चुनाव आते ही सियासी दलों में इस बात की हलचल मच जाती है कि इस बार वे जनता के मुद्दों को ज़रूर देखेंगे, लेकिन चुनाव के परवान चढ़ते ही जनता के विकास के मुद्दे कहीं गुम हो जाते हैं. स़िर्फ जाति धर्म, पैसा, पावर का बोलबाला रह जाता है, लेकिन यूपी की जनता के असल मुद्दे इस बार भी चुनावी मुद्दे नहीं बन पाए. यूपी के तराई इलाक़ों और पूर्वांचल में हर साल बारिश तबाही लेकर आती है.

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दो खुदकुशी और एक क़त्ल

नए साल की समाप्ति का रास्ता क्या है. हम शुरू करते हैं अन्ना हजारे के अनशन और जेल भरो आंदोलन की धमकी से, जिसके बारे में 27 दिसंबर की दोपहर के बाद पता चल गया था कि उनका यह आंदोलन मुंबई में असफल रहा. दिल्ली की बात कुछ और है. यह ऐसा शहर है, जहां राजनीति का प्रभाव है, शक्ति का केंद्र है, लेकिन मुंबई में ऐसा नहीं है.

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जम्‍मू-कश्‍मीरः आत्‍महत्‍या की बढ़ती प्रवृत्ति

धरती का स्वर्ग कहलाने वाले कश्मीर को न जाने किसकी नज़र लग गई है. कुदरत के अनमोल उपहारों से सजी इस धरती की संस्कृति पर इतिहास को हमेशा गर्व रहा है. आधुनिक परिवेश में शिक्षा हासिल करने के बावजूद यहां के नौजवान कभी भी बड़े-बुजुर्गों के प्रति आदर और सम्मान के पाठ को नहीं भूले. यही कारण है कि उनकी छत्रछाया में जीवन की कठिन से कठिन डगर को भी वे आसानी से पार कर पाने में सक्षम रहे.

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महाराष्‍ट्रः राजनाथ का विदर्भ दौरा सवालों के घेरे में

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह की विदर्भ यात्रा पर अब सवाल उठाए जा रहे हैं. उनकी इस यात्रा को कुछ संगठन व्यक्तिगत यात्रा तक क़रार दे रहे हैं और पार्टी की नीति पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं. भाजपा नेताओं की औद्योगिक इकाइयों द्वारा भी किसानों की ज़मीन हड़पने का आरोप लगाया जा रहा है. इससे राजनाथ की विदर्भ यात्रा विफल होती लग रही है.

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आपका और आपकी मुस्कराहट का शुक्रिया

अपने साथियों पर लिखना या टिप्पणी करना बहुत दु:खदायी होता है, क्योंकि हम इससे एक ऐसी परंपरा को जन्म देते हैं कि लोग आपके ऊपर भी लिखें. आप उन्हें आमंत्रित करते हैं. मैं यही करने जा रहा हूं. मैं अपने साथियों को आमंत्रित करने जा रहा हूं कि हमारे ऊपर जहां उन्हें कुछ ग़लत दिखाई दे, वे लिखें.

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वादों का मारा बुंदेलखंड

बुंदेलखंड में चित्रकूट के घाट पर न तो संतों की भीड़ है और न चंदन घिसने के लिए तुलसीदास जी हैं. हां, बुंदेलखंड की व्यथा सुनने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ज़रूर बांदा आए. उन्होंने पानी की सुविधा के लिए दो सौ करोड़ रुपये देने का वादा करके आंसू पोंछने की कोशिश की है, लेकिन यहां की जनता के दु:ख-दर्द दूर होते नज़र नहीं आ रहे हैं.

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विदर्भ के किसान परिवारों का मनोविज्ञान

विदर्भ के आत्महत्याग्रस्त परिवारों में परस्पर संबंध और रचनात्मक व्यवहार के स्तर पर का़फी गिरावट दर्ज की गई है. परिवार के सदस्यों के बीच पुराने मधुर संबंधों के तार उनके अवसादों की भेंट चढ़ चुके हैं.

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महाराष्‍ट्र सरकार का कारनामाः अब प्यासे मरेंगे अमरावती के किसान

नागपुर से 150 किलोमीटर दूर अमरावती ज़िले का माजरी गांव बंजर है. राजस्थान के खेतों में यहां से ज़्यादा हरियाली है. गांव वाले बताते हैं कि यहां की खेती भगवान भरोसे है. वैसे अमरावती ज़िले के इस इलाक़े में अपर वर्धा डैम का पानी पहुंचता है, लेकिन माजरी जैसे कई गांव हैं, जहां नहर का पानी नहीं पहुंचता.

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सरकार जीने का हक़ दे या फिर मौत

अरुणा शानबाग के बहाने देश में इच्छा मृत्यु के मुद्दे को लेकर बहस शुरू हो गई है, मगर क्या कभी सरकार ने यह सोचा है कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कोताही के कारण कितने लोग नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हैं. ये लोग किससे इच्छा मृत्यु की फरियाद करें.

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आत्‍महत्‍या करने को मजबूर हो रहे किसान

कृषि ॠण माफी पैकेज-2008 के तहत किसानों को केंद्र की कांग्रेस सरकार द्वारा 60 हज़ार करोड़ रुपए पैकेज के उपयोग से संबंधित क्रियान्वयन के नीतियों का निर्धारण भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा न होकर जब नाबार्ड द्वारा किया गया तो हर किसान चौंक गया.

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मंत्री जी, किसान पागल नहीं हैं

देश की किसी भी संवेदनशील राज्य सरकार के लिए यह कितनी शर्मनाक और हक़ीक़त से मुंह चुराने वाली स्थिति है कि वह प्रदेश में एक के बाद एक मरने वाले किसानों को पागल क़रार देने की हठधर्मिता पर उतर आए और किसानों की आत्महत्याओं को पापों का प्रतिफल बताए.

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अनुसूचित जाति आयोग के निशाने पर राखी

राखी सावंत के रियलिटी शो राखी का इंसा़फ में न्याय की उम्मीद में आए एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी, उसके बाद से राखी पर मुसीबतों का दौर खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा. प्रोग्राम के प्रसारण के दौरान राखी की टिप्पणी से व्यथित झांसी के एक युवक लक्ष्मण प्रसाद ने आत्महत्या कर ली थी.

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टूट कर बिखर जाएगा पाकिस्‍तान

कुछ दिन पहले की बात है. ओकारा शहर के एक पुलिस थाने के सामने लोगों का हुजूम जमा हुआ. हुजूम में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं. थोड़ी देर बाद यह हुजूम थाने के अंदर पहुंचा और दो पुलिस वालों के ऊपर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी. थाने में मौजूद अन्य पुलिस वालों ने उन्हें मरने से तो बचा लिया, लेकिन पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

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किसानों की आत्‍महत्‍या जारी

मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार भले ही किसान को खुशहाल बनाने और खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाने का प्रचार कर रही है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि राज्य के किसानों की हालत का़फी ख़राब है. हालात ये है कि ग़रीबी तथा ऋण से परेशान होकर किसान आत्महत्या भी कर रहे हैं.

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बनारसी साड़ी उद्योगः बुनकरों की हालत बदतर, सरकार उदासीन

कवि अग्निवेद को इस कविता की राह पर चलते हुए बीते वर्ष वाराणसी के गौरगांव निवासी बुनकर सुरेश राजभर पत्नी हीरामनी एवं सात वर्षीय पुत्र छोटू की हत्या करके स्वयं फांसी पर झूल गया. क़र्ज़ के बोझ तले दबे सुरेश के सामने जीने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा था.

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पहले बसाओ फिर उजाड़ो

समस्तीपुर ज़िले के शिवाजी नगर प्रखंड में मुसहर समुदाय के लोग बसने को ज़मीन नहीं, रहने को घर नहीं, पर सारा जहां हमारा है, के तर्ज़ पर ज़िंदगी गुजार रहे हैं. वे तीन एकड़ जमीन पर किसी तरह झुग्गी-झोपड़ी में रहकर ज़िंदगी की गाड़ी आगे ब़ढा रहे हैं, लेकिन विडंबना देखिए कि इन मुसहर परिवारों की शासन-प्रशासन ने अब तक कोई खबर नहीं ली है.

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नक्‍सल क्रांति का एक जनक हताशा से हार गया

हताशा ने न जाने कितनी जानें ली हैं, पर अभी हाल में इसने एक ऐसे नेता को अपना शिकार बनाया है, जिसने आज से 43 साल पहले हथियारों के बल पर उस व्यवस्था को बदलने का सपना देखा था, जो किसानों व मज़दूरों का शोषण करती है, उनका हक़ मारती है. इस हताशा के ताजा शिकार हैं, कानू सान्याल.

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रंगनाथ मिश्रा रिपोर्ट एक लड़ाई संसद से सड़क तक

भारतीय राजनीति में अब ऐसे मुद्दे कम ही देखने-सुनने को मिलते हैं, जिन पर संसद से लेकर सड़क तक हंगामा बरपे. लेकिन, जब चौथी दुनिया में रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट छपी तो सबसे पहले संसद में इस मुद्दे पर आवाज उठी. हंगामा हुआ. संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई. चौथी दुनिया ने अपने पत्रकारीय धर्म का निर्वाह किया तो बदले में राज्य सभा ने चौथी दुनिया के संपादक को विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेज दिया.

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