अगर आप आयरन लेडी इरोम शर्मिला को देखकर नहीं पिघलते और आपको शर्म नहीं आती, तो फिर आपको आत्म-निरीक्षण की ज़रूरत है, क्योंकि पिछले १२ वर्षों से अनशन कर रहीं शर्मिला अपने लिए नहीं, बल्कि आपके लिए लड़ रही हैं. आपके लिए, यानी उस समूची मानव जाति की गरिमा बचाने के लिए, जो आज हर [...]
Tags: अदालत, अनशन, आत्महत्या, आमरण अनशन, आर्म्ड फोर्सेस, इंसान, इरोम शर्मिला, जंतर-मंतर, ज़िंदगी से प्यार आयरन लेडी, जेल, दिल्ली, पटियाला हाउस, भारतीय दंड, भारतीय सेना, मणिपुर, महात्मा गांधी, मानव, मानव जाति, राजनीतिक नेताओं, राष्ट्रपिता, लोकतांत्रिक देश, विशेषाधिकार, शर्म, समाज, सरकार, सैन्य बल Posted in Crousel2, राजनीति, राज्य, स्टोरी-6 by Author: एस बिजेन सिंह | No Comments » | Read More... |
भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने में जुटी हैं. बात चाहे कांग्रेस शासित महाराष्ट्र की हो या फिर भाजपा शासित मध्य प्रदेश की, हालात कमोबेश एक जैसी ही हैं.
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रॉबर्ट वाड्रा ने जो किया, वह अनोखा नहीं है. जो भी बिजनेस में होते हैं, उनमें ज़्यादातर लोग ऐसे ही तरीक़े अपनाते हैं और अपनी संपत्ति बढ़ाते हैं. फर्क़ स़िर्फ इतना है कि उनका जुड़ाव सत्ता से नहीं होता, जबकि रॉबर्ट वाड्रा का रिश्ता सीधे सत्ता से है और सत्ता से भी इतना नज़दीक का कि वह वर्तमान सरकार को नियंत्रित करने वाली सर्वशक्तिमान महिला श्रीमती सोनिया गांधी के दामाद हैं और भारत के भावी प्रधानमंत्री, यदि बने तो, राहुल गांधी के बहनोई हैं.
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पंजाब में नहरों का जाल है. गुजरात और महाराष्ट्र विकसित राज्य की श्रेणी में हैं. बावजूद इसके यहां के किसानों को आत्महत्या करनी प़डती है. इसके मुक़ाबले राजस्थान का शेखावाटी एक कम विकसित क्षेत्र है. पानी की कमी और रेतीली ज़मीन होने के बाद भी यहां के किसानों को देखकर एक आम आदमी के मन में भी खेती का पेशा अपनाने की इच्छा जागृत होती है, तो इसके पीछे ज़रूर कोई न कोई ठोस वजह होगी. आखिर क्या है वह वजह, जानिए इस रिपोर्ट में:
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बीते 22 जुलाई को उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जनपद की तहसील रुदौली के सिठौली गांव में ज़मीन नीलाम होने के डर के चलते किसान ठाकुर प्रसाद की मौत हो गई. ठाकुर प्रसाद का बेटा अशोक गांव के एक स्वयं सहायता समूह का सदस्य था. उसने समूह से कोई क़र्ज़ नहीं लिया था. समूह के जिन अन्य सदस्यों ने क़र्ज़ लिया था, उन्होंने अदायगी के बाद नो ड्यूज प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया था.
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वर्ष 2006 में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री नवीन जिंदल ने संसद में एक मुद्दा उठाया कि भारतीय छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं की वजह क्या है और सरकार किस तरह आत्महत्या के आंकड़े बढ़ने से रोक सकती है. इसके बाद संसद की तऱफ से कुछ विशेष क़ानून बनाए गए. सबसे पहले तो परीक्षाओं से जुड़ी हेल्पलाइन शुरू की गई, जो परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को फोन पर साइकोलॉजिकल एडवाइस देती है.
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सरकार ने एक झटके में पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए. डीजल और रसोई गैस के दाम वैसे ही ज़्यादा हैं, लेकिन अभी और बढ़ सकते हैं. सरकार को मालूम था कि देश में इसका विरोध होगा, गुस्सा पैदा होगा, कुछ विपक्षी पार्टियां लकीर पीटने के लिए आंदोलन की घोषणा करेंगी और सिंबोलिक आंदोलन भी होंगे, इसके बावजूद उसने पेट्रोल के दाम 12 प्रतिशत से ज़्यादा बढ़ा दिए.
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जब किसी का कोई प्रिय शख्स मर जाता है तो मारे दु:ख के वह पागल सा हो जाता है, कभी-कभी उसकी मौत तक हो जाती है. इसी तरह कई लोग पालतू जानवरों से इतना प्यार करते हैं कि उनकी मौत के सदमे को सहन नहीं कर पाते. पिछले दिनों ब्रिटेन में अपनी पालतू बिल्ली की मौत से दु:खी एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली.
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केंद्र की यूपीए सरकार से पूर्वांचल के लगभग ढ़ाई लाख बुनकरों को का़फी उम्मीदें थीं. बुनकरों के लिए करोड़ों रुपये के बजट का ऐलान सुनते ही बुनकरों को यक़ीन हो गया कि उनकी हालत अब सुधरने वाली है, लेकिन जब हक़ीक़त सामने आई तो वे खुद को ठगा हुआ महसूस करने लगे.
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चुनाव आते ही सियासी दलों में इस बात की हलचल मच जाती है कि इस बार वे जनता के मुद्दों को ज़रूर देखेंगे, लेकिन चुनाव के परवान चढ़ते ही जनता के विकास के मुद्दे कहीं गुम हो जाते हैं. स़िर्फ जाति धर्म, पैसा, पावर का बोलबाला रह जाता है, लेकिन यूपी की जनता के असल मुद्दे इस बार भी चुनावी मुद्दे नहीं बन पाए. यूपी के तराई इलाक़ों और पूर्वांचल में हर साल बारिश तबाही लेकर आती है.
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नए साल की समाप्ति का रास्ता क्या है. हम शुरू करते हैं अन्ना हजारे के अनशन और जेल भरो आंदोलन की धमकी से, जिसके बारे में 27 दिसंबर की दोपहर के बाद पता चल गया था कि उनका यह आंदोलन मुंबई में असफल रहा. दिल्ली की बात कुछ और है. यह ऐसा शहर है, जहां राजनीति का प्रभाव है, शक्ति का केंद्र है, लेकिन मुंबई में ऐसा नहीं है.
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व्यवस्था संविधान को धोखा देकर बनी है |
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