आंखों का रखें ध्‍यान

आयुर्वेदिक दवाइयों के प्रति पूरी दुनिया में बढ़ते विश्वास को देखते हुए लॉस एंजेल्स स्थित कंपनी डोहेनी रेटिना इंस्टीट्यूट ने भारत के इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद और इंटीग्रेटिव मेडिसिन (आईएआईएम) के साथ गठजोड़ किया है.

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विंध्‍य हर्बल सफल सहकारी संस्‍था

सरकारी प्रयासों से जनकल्याण के काम बिना रुकावट पूरे होते रहें, यह लगभग असंभव बात मानी जाती है. पर जब आप मध्य प्रदेश लघु वनोपज संघ के द्वारा बनाई गई विंध्य हर्बल संस्था के कामकाज को देखेंगे तो मानेंगे कि जनकल्याण के लिए सरकारी प्रयासों की कमी नहीं है. विंध्य हर्बल संस्था प्रदेश स्तर पर ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी आयुर्वेदिक औषधियों से संबंधित संग्रहण, उत्पादन, शोधन, दवा निर्माण एवं उसकी बिक्री का काम करती है.

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आयुर्वेदिक कंपनियों की दवाओं में स्टेरॉयड

स्टेरॉयड के साइड इफेक्ट
आमतौर पर कसरती बदन की चाह रखने वाले लोग जानते-बूझते हुए भी स्टेरॉयड का सेवन करते हैं और कुछ समय बाद उसके दुष्परिणाम भी भुगतते हैं. लेकिन उन लोगों का क्या दोष है, जिन्हें दवा कंपनियां अनजाने में स्टेरॉयड के रूप में ज़हर पिला रही हैं. यदि कोई इंसान डॉक्टरी सलाह के बिना स्टेरॉयड युक्त दवा का सेवन करता है तो इसके कई घातक परिणाम देखने को मिल सकते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक़, इससे कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं.

स्टेरॉयड आपके लिए दिल की बीमारी और गुर्दे की तक़ली़फ का कारण बन सकता है. यह बच्चों को मानसिक रोगी बना सकता है. स्टेरॉयड लीवर, ब्लड प्रेशर, चर्म रोग, बाल झड़ना, गर्दन का मोटापन, हार्मोन में गड़बड़ी जैसे खतरनाक रोगों को निमंत्रण देता है. यह पुरुषों में शुक्राणुओं का क्षय करने के साथ ही महिलाओं की सेहत के लिए भी समान रूप से खतरनाक है. सबसे अधिक तो यह कम उम्र के बच्चों के लिए घातक है. दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अनिल बंसल कहते हैं कि अगर कोई इंसान पहले से स्टेरॉयड ले रहा है और कुछ समय बाद वह अचानक इसका सेवन बंद कर देता है तो ऐसा करना जानलेवा साबित हो सकता है. डॉ. बंसल की राय में स्टेरॉयड का सेवन धीरे-धीरे बंद करना चाहिए. ज़ाहिर है, कोई जानबूझ कर ऐसा ज़हर क्यों पिएगा? लेकिन जब दवा में ही यह जहर मिला हो तो भला कोई क्या कर सकता है?

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