राहुल का गडकरी पर तंज, कहा- देश पूछ रहा है,’कहां है नौकरी?’

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर रोजगार को लेकर निशाना साधा. उन्होंने

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गुजरात चुनाव मुसलमान और कांग्रेस

अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है. कांग्रेस पार्टी ने अगले चुनाव की कमान राहुल गांधी को सौंप दी है. राहुल गांधी को 2014 के लोकसभा चुनाव की समन्वय समिति का प्रमुख बनाया गया है. राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे, यह बात पहले से ही तय है. इसमें कोई नई बात नहीं है. इस समिति में वही पुराने चेहरे हैं, जो अब तक कांग्रेस की रणनीति बनाते आए हैं. इसलिए कुछ नया होगा, इसकी उम्मीद नहीं है. लेकिन सवाल यह है कि मुसलमानों के लिए इसमें नया क्या है? सवाल यह है कि जिस तरह उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने मुसलमानों को धोखा देकर वोट लेने की कोशिश की, क्या फिर से वही खेल खेला जाएगा?

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ममता के बंगाल में मुसलमान

पश्चिम बंगाल के मुसलमानों की बात करनी ज़रूरी इसलिए है, क्योंकि देश में जम्मू-कश्मीर और असम के बाद मुसलमानों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी पश्चिम बंगाल में रहती है. राज्य की लगभग साढ़े छह करोड़ की आबादी में मुसलमानों की संख्या दो करोड़ के आसपास है.

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सरकार नहीं चाहती मुस्लिमों को आरक्षण मिले

एक बार फिर मुस्लिम आरक्षण को लेकर पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय मुसलमानों को 4.5 फीसदी आरक्षण के रूप में जो लॉलीपॉप दिया था, उसकी सच्चाई उस समय सामने आ गई, जब आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने उसे यह कहकर ख़ारिज कर दिया कि यह धर्म की बुनियाद पर है और संविधान के अनुकूल नहीं है.

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ग्रामीण विकास और महिला जनप्रतिनिधि

एक बार फिर हमेशा की तरह महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण से जुड़ा बिल ठंडे बस्ते में रहा. सरकार भी आम सहमति बनाने के मूड में नज़र नहीं आई. सभी राजनीतिक दल एक सुर में महिला अधिकारों की बात करते हैं, परंतु बिल पारित कराने के विषय पर बंटे नज़र आते हैं. कुछ राजनीतिक दल आरक्षण में आरक्षण की मांग कर रहे हैं.

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मैं हूं कौन

जाने तू या जाने ना से एक्टिंग की शुरुआत करने वाले प्रतीक बब्बर ने आज फिल्मों में अपनी अलग जगह बना ली है. चॉकलेटी लुक में नज़र आने वाले प्रतीक बब्बर ने अपनी अदाकारी से लोगों का दिल जीता है. जैसे-जैसे उनकी फिल्में आ रही हैं, वैसे-वैसे उनकी अदाकारी में भी निखार आता जा रहा है. अब तक वह छह फिल्मों में काम कर चुके हैं, जो बड़े बैनर से ताल्लुक़ रखती हैं.

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कांग्रेस-भाजपा का कम्युनल कार्ड

उमा भारती कहती हैं कि मुस्लिम आरक्षण इस देश के बंटवारे का रास्ता तय करेगा. मुस्लिम आरक्षण की बात करके कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति कर रही है. ऐसा करके कांग्रेस ने संविधान, क़ानून एवं मर्यादा का उल्लंघन किया है. मुस्लिम आरक्षण इस्लाम के बुनियादी उसूलों के ख़िलाफ़ है, क्योंकि मुस्लिम समाज में जाति प्रथा नहीं है.

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आरक्षण के नाम पर मुसलमानों से धोखा

देश के संविधान में कुछ वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई थी, ताकि सामाजिक तौर पर पिछड़े लोगों को बराबरी के अधिकार दिए जा सकें, उन्हें भी अन्य नागरिकों की तरह तरक्की के अवसर मिल सकें, क्योंकि इतिहास गवाह है कि हमारे यहां जाति और धर्म के नाम पर विभिन्न वर्गों और धर्मों के लोगों के साथ अन्याय होता रहा है.

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मुसलमानों को आरक्षणः यह चुनावी स्‍टंट है

राजनीति का खेल भी बड़ा अजीब है. इस खेल में हर खिलाड़ी सोचता कुछ है, बोलता कुछ है और करता कुछ और ही है. क्या कांग्रेस पार्टी सचमुच मुसलमानों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देना चाहती है या फिर यह स़िर्फ एक चुनावी स्टंट है. यह एक ऐसा सवाल है, जो हर व्यक्ति के मन में उठ रहा है. कांग्रेस अगर मुसलमानों के विकास के लिए वाकई कुछ करना चाहती है तो सालों से धूल फांक रही सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र कमीशन की रिपोर्ट पर उसने कार्रवाई क्यों नहीं की.

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क्या मुसलमानों को आरक्षण की ज़रूरत है

हिंदुस्तान में 160 मिलियन मुसलमान हैं, जो इंडोनेशिया के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ब़डी मुस्लिम आबादी वाला देश है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, यहां मुसलमानों की जनसंख्या 13.4 फीसदी है, लेकिन कई लोग यह मानते हैं कि मुसलमानों की संख्या 15 से 18 फीसदी के बीच है.

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मुस्लिम आरक्षण और राजनीति : रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट कहां है

यह चुनावी चिंता का ही असर था. वरना कोई कारण नहीं था कि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री केंद्र सरकार को मुस्लिम आरक्षण लागू करने के लिए पत्र लिखतीं और न सलमान खुर्शीद एक बार फिर पिछड़े मुसलमानों को ओबीसी कोटे में से आरक्षण देने जैसे मुद्दे को अपने बयानों से गरमाते.

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आरक्षण

हमेशा मुद्दों पर आधारित फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर प्रकाश झा ने इस बार आरक्षण का मुद्दा उठाया है. यह आज की परिस्थितियों पर बनी फिल्म है और शिक्षा के व्यवसायीकरण के कारण नौजवानों और उनके परिवार को होने वाली परेशानियों व समस्याओं को सामने लाने का प्रयास है.

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आरक्षण में दीपिका

प्रकाश झा की फिल्म आरक्षण दीपिका पादुकोण के करियर के लिए टर्निग प्वाइंट साबित हो सकती है, ऐसा माना जा रहा है. इस फिल्म को लेकर दीपिका खुद भी बहुत उत्साहित हैं. उनके शब्दों में, आरक्षण अपने आप में बहस का एक विषय है और वह पहली बार ऐसी फिल्म में काम कर रही हैं और पूर्वी आनंद जैसा किरदार निभा रही हैं.

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इनके लिए अनशन कौन करेगा

यह ज़रूरी नहीं है कि सभी अनशन प्रभावकारी साबित हों या वे नैतिक दृष्टि से सही माने जाएं. जब ब्रिटिशों ने अछूतों (जैसा कि उन्हें उस व़क्त कहा जाता था) के लिए अलग निर्वाचक मंडल की घोषणा की, तब गांधी जी ने अनशन किया था.

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जनगणना के साथ नज़रिया बदलने की जरुरत

पच्चीस फीट ऊंची रस्सी पर चलता एक इंसान, सड़क के किनारे करतब दिखाता एक बच्चा. शहर के किनारे तंबू डाले कुछ परिवार. आज यहां, कल कहीं और. बिस्तर के नाम पर ज़मीन, छत आसमान. महीने-दो महीने पर शहर बदल जाता है और शायद ज़िंदगी के रंग भी, लेकिन यह कहानी सैकड़ों सालों से बदस्तूर जारी है. यह कहानी है भारत के उन 6 करोड़ घुमंतू और विमुक्त जनजातियों की, जिन्हें आम बोलचाल की भाषा में यायावर कहते हैं.

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वामपंथियों का लोकतांत्रिक स्टालिनवाद

इस बात पर कोई बाजी नहीं लगाई गई कि पश्चिम बंगाल में मिली बुरी हार के बाद सीपीएम के कितने नेता इसकी ज़िम्मेदारी लेंगे और इस्ती़फा देंगे. ज़ाहिर है, कम्युनिस्ट पार्टी इस तरीक़े से काम भी नहीं करती. भारत में कम्युनिस्ट पार्टी का अस्तित्व थोड़ा दूसरे ढंग का है. यहां के कम्युनिस्टों ने लोकतांत्रिक पद्धति को स्वीकारा, जबकि दुनिया में कहीं भी कम्युनिस्टों ने इस प्रक्रिया को नहीं स्वीकारा, लेकिन जब बात पार्टी के आंतरिक संगठन की आती है तो वहां स्टालिनवाद का ही शासन दिखता है.

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अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन

उच्चतम न्यायालय की ग्यारह सदस्य खंडपीठ ने टी एम ए पाई एवं पी ए ईनामदार की याचिकाओं पर संविधान की धारा 30 (1) के तहत निर्णय देते हुए अल्पसंख्यकों को पांच अधिकार दिए, जिसमें शिक्षण संस्थाओं में नियुक्ति, शुल्क निर्धारण, सोसाइटी का गठन, प्रवेश और अनुशासनहीन कर्मचारी के विरुद्ध कार्यवाही आदि अधिकार शामिल हैं.

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विधानसभा चुनावः एक बार फिर महिलाओं की उपेक्षा

देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में महिलाओं की अनदेखी किए जाने से यह साबित हो जाता है कि सियासी दलों की करनी और कथनी में कितना फर्क़ होता है. यह बात अलग है कि अगर इन चुनावों में महिला प्रधान सियासी दलों को कामयाबी मिल जाती है तो देश के दो राज्यों की मुख्यमंत्री महिलाएं हो सकती हैं यानी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और तमिलनाडु में जयललिता.

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रोटी की तलाश में भटकती जनजातियां

महाराष्ट्र में इन पिछड़ों को भटके विमुक्त के तौर पर पहचाना जाता है. महाराष्ट्र सरकार ने इन लोगों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण रखा है, लेकिन शिक्षा की कमी के कारण ये लोग इसका लाभ नहीं उठा पाए. इन जातियों के लोगों के पास ख़ुद के घर नहीं थे. ये लोग काम की तलाश में इस गांव से उस गांव भटकते थे. इन लोगों पर चोरी के भी आरोप लगते रहते थे. इसलिए अंग्ऱेजों ने 1871 में क़ानून बनाया. इस समुदाय को हमेशा बंदी बनाया जाता था.

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सवर्ण आयोगः विवादों का पिटारा

पिछली विधानसभा में विधायक अवनीश कुमार सिंह ने अंतिम संस्कार में आरक्षण के अनुपालन की मांग करते हुए कह डाला कि बांसघाट के शवदाह गृह में भी आरक्षण दिया जाना चाहिए. इस बात ने सबको हैरत में डाल दिया था. पूरा सदन सकते में था.

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राहुल की सक्रियता से बसपा परेशान

उत्तर प्रदेश का लक्ष्य भेदने के लिए 125 वर्ष पुरानी कांग्रेस पार्टी ने अपने युवराज राहुल गांधी को जंग के मैदान में सेनापति के रूप में उभारने का मन बना लिया है. कांग्रेस बड़ी ही सोची समझी रणनीति के तहत शतरंज की विसात सोच समझ कर बिछा रही है.

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मुसलमान अपनी लड़ाई भारतीय नागरिक बनकर लड़ें: मदनी

जमीअत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव एवं सांसद महमूद मदनी एक सुलझे हुए नेता हैं. वह स़िर्फ मुस्लिमों की बात नहीं करते, बल्कि पूरे देश के विकास और ख़ुशहाली की बात करते हैं. पिछले दिनों चौथी दुनिया उर्दू की संपादक वसीम राशिद ने विभिन्न मुद्दों पर उनसे एक लंबी बातचीत की.

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यह गूजर नहीं किसान आंदोलन है

भारतीय लोकतंत्र का यह अजीब चेहरा है. देश के किसानों को जब भी कोई बात सरकार तक पहुंचानी होती है, उन्हें आंदोलन करना पड़ता है. वहीं देश के बड़े-बड़े उद्योगपति सीधे मंत्रालय जाकर नियम-क़ानून बदल कर करोड़ों का फायदा उठा लेते हैं.

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सियासत के शहर में सन्नाटा

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर जंग-ए-आज़ादी में बिस्मिल अशफाक-रोशन की साझी शहादत, साझी विरासत वाला शहर शाहजहांपुर आज न जाने क्यों राजनीतिक शून्यता का शिकार हो गया है. आज़ादी के बाद भी सेठ विशन चंद्र सेठ, प्रेम किशन खन्ना, जितेंद्र प्रसाद व सत्यपाल सिंह यादव जैसे कद्दावर नेता देश और प्रदेश की राजनीति में छाये रहे. अब मौजूदा हालात कुछ इस तरह बन गये हैं कि आरक्षण के भंवर में फंसा यह ज़िला सियासी तौर पर रस्म अदायगी तक सिमट कर रह गया है, ना पहले जैसी चर्चायें होती हैं ना सियासी कोठियों की धमक सुनाई देती है और ना ही समर्थकों में कोई जोश-ख़रोश दिखाई पड़ता है. सियासत जैसे कोई ग़ैर ज़रूरी चीज़ हो चुकी हो.

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रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्टः सरकार, सुप्रीमकोर्ट और अल्‍पसंख्‍यक आरक्षण

सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट से यह सच सबूत के साथ सामने आया कि देश के अल्पसंख्यकों की सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक हालत क्या है. यह भी पता चला कि उनके इस बिगड़े हालात को कैसे सुधारा जा सकता है. लेकिन, इन रिपोर्टों पर सरकार के रु़ख से यह भी साबित हो गया कि अल्पसंख्यकों के लिए वर्तमान केंद्र सरकार कुछ ठोस करने के बजाए घड़ियाली आंसू ही बहाती रही है.

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संसदीय सत्रों का भी ऑडिट हो

आज भारत में ऐसा एक भी संस्थान नहीं है, जिसके कार्यकलापों का एक निश्चित अवधि में अंकेक्षण (ऑडिट) न किया जाता हो. अंकेक्षण समय की मांग और ज़रूरत दोनों है. यह वह हथियार है, जिसके माध्यम से हम किसी भी संस्थान की ख़ामियों का पता लगा सकते हैं और उनका निराकरण कर सकते हैं.

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मुस्लिम आरक्षण का मायाजाल

हाल ही में जमीयत उलमा-ए-हिंद के नेतृत्व में कई मुस्लिम संगठनों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिला. प्रतिनिधिमंडल ने दोनों को अपनी लंबी-चौड़ी मांगों का पुलिंदा सौंपा. प्रमुख मांग मुसलमानों को आरक्षण देने की है. साथ ही इसमें रंगनाथ मिश्र आयोग की स़िफारिशें लागू करने की मांग भी शामिल है.

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जाति, जनगणना और आरक्षण

जाति भारतीय समाज की जड़-ज़मीन से जुड़ी एक बड़ी हक़ीक़त है, पर अफ़सोस कि मौजूदा बौद्धिक वर्ग बहस में सबसे कम शामिल है. पढ़े-लिखे लोग यानी बुद्धिजीवी, जिनमें समाजशास्त्री एवं राजनीतिक विद्वान भी शामिल हैं, इस मसले पर बहस करने से कतराते नज़र आते हैं, मानों इससे उन्हें जातिवादी करार दिया जाएगा.

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आदिवासी एकता ही हलचल से परेशान कांग्रेस और भाजपा

बत्तीस फीसदी आरक्षण न होने की दशा में भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के आदिवासी नेता एकजुट होकर विधानसभा की 90 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और आदिवासी मुख्यमंत्री बनाएंगे. पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री अजीत जोगी के लिए भाजपा विधायक पदबत्तीस फीसदी आरक्षण न होने की दशा में भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के आदिवासी नेता एकजुट होकर विधानसभा की 90 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे और आदिवासी मुख्यमंत्री बनाएंगे. पूर्व कांग्रेसी मुख्यमंत्री अजीत जोगी के लिए भाजपा विधायक पद से त्यागपत्र देने वाले रामदयाल उईके ने यह घोषणा की है.

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