पीएम मोदी की पाठशाला: GST के विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हुई लाठीचार्ज

नई दिल्ली। एक देश एक टैक्स की तर्ज पर जीएसटी लागू होने के बाद पीएम मोदी के कार्यक्रम से पहले

Read more

आधी रात को घंटे की आवाज़ के साथ लागू हो जाएगा जीएसटी, पढ़िए खास बातें

नई दिल्ली:  जीएसटी 1 जुलाई 2017 को संसद के एतिहासिक भवन में लागू किया जाएगा। राष्ट्रपति की मौजूदगी में प्रधानमंत्री

Read more

1 जुलाई से क्या होगा सस्ता और क्या महंगा, जानिए यहां…

नई दिल्ली। जुलाई की पहली तारीख से जीएसटी लागू होने के बाद आपकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आ जाएगा। काफी

Read more

GST इंपैक्ट: जून में मिलेगी बंपर छूट, जुलाई से पहले दुकानदारों को खाली करना होगा स्टॉक !

नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया)। जीएसटी लागू होने से पहले एक बार फिर से बाजार की रौनक देखने को मिलेगी।

Read more

सद्गुरु भक्तों के अर्न्तमन को जानते हैं

गुरु-मुख होने की आवश्कता संसार में जो अनेक तरह के बंधन हैं, मनुष्य उनमें क्यों फंसता है? संसार के अनेक बंधनों

Read more

रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश के अलग-अलग राज्यों से आए किसान जब संसद के बाहर आंदोलन कर रहे थे, उसी दिन संसद के भीतर माननीय सदस्य एफडीआई के मुद्दे पर बहस कर रहे थे.

Read more

दवा कंपनियां, डॉक्‍टर और दुकानदार: आखिर इस मर्ज की दवा क्‍या है

दवा, डॉक्टर एवं दुकानदार के प्रति भोली-भाली जनता इतना विश्वास रखती है कि डॉक्टर साहब जितनी फीस मांगते हैं, दुकानदार जितने का बिल बनाता है, को वह बिना किसी लाग-लपेट के अपना घर गिरवी रखकर भी चुकाती है. क्या आप बता सकते हैं कि कोई घर ऐसा है, जहां कोई बीमार नहीं पड़ता, जहां दवाओं की ज़रूरत नहीं पड़ती? यानी दवा इस्तेमाल करने वालों की संख्या सबसे अधिक है. किसी न किसी रूप में लगभग सभी लोगों को दवा का इस्तेमाल करना पड़ता है, कभी बदन दर्द के नाम पर तो कभी सिर दर्द के नाम पर.

Read more

सरकार जवाब दे यह देश किसका है

हाल में देश में हुए बदलावों ने एक आधारभूत सवाल पूछने के लिए मजबूर कर दिया है. सवाल है कि आखिर यह देश किसका है? सरकार द्वारा देश के लिए बनाई गई आर्थिक नीतियां और राजनीतिक वातावरण समाज के किस वर्ग के लोगों के फायदे के लिए होनी चाहिए? लाजिमी जवाब होगा कि सरकार को हर वर्ग का ख्याल रखना चाहिए. आज भी देश के साठ प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं. मुख्य रूप से सरकारी और निजी क्षेत्र में काम कर रहा संगठित मज़दूर वर्ग भी महत्वपूर्ण है.

Read more

लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मत कीजिए

सरकार का संकट उसकी अपनी कार्यप्रणाली का नतीजा है. सरकार काम कर रही है, लेकिन पार्टी काम नहीं कर रही है और हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस पार्टी की कोई सोच भी नहीं है, वह सरकार का एजेंडा मानने के लिए मजबूर है. सरकार को लगता है कि उसे वे सारे काम अब आनन-फानन में कर लेने चाहिए, जिनका वायदा वह अमेरिकन फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस या अमेरिकी नीति निर्धारकों से कर चुकी है.

Read more

प्रधानमंत्री विदेशी पूंजी लाएंगे

विदेशी पूंजी निवेश के बारे में पिछली बार सरकार ने फैसला ले लिया था, लेकिन संसद के अंदर यूपीए के सहयोगियों ने ही ऐसा विरोध किया कि सरकार को पीछे हटना पड़ा. खुदरा बाज़ार में विदेशी निवेश का विरोध करने वालों में ममता बनर्जी सबसे आगे रहीं. सरकार ने कमाल कर दिया. भारत दौरे पर आई अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ममता से मिलने सीधे कोलकाता पहुंच गईं.

Read more

आत्‍महत्‍या की कीमत हम सब चुकाते हैं

वर्ष 2006 में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री नवीन जिंदल ने संसद में एक मुद्दा उठाया कि भारतीय छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं की वजह क्या है और सरकार किस तरह आत्महत्या के आंकड़े बढ़ने से रोक सकती है. इसके बाद संसद की तऱफ से कुछ विशेष क़ानून बनाए गए. सबसे पहले तो परीक्षाओं से जुड़ी हेल्पलाइन शुरू की गई, जो परीक्षा से पहले विद्यार्थियों को फोन पर साइकोलॉजिकल एडवाइस देती है.

Read more

ओमिता पॉल महान सलाहकार

प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं. ऐसे में उनके चार दशक पुराने राजनीतिक करियर की समीक्षा की जा रही है. देश की वर्तमान खराब आर्थिक हालत और उसमें प्रणब बाबू की भूमिका पर भी खूब चर्चा हो रही है, लेकिन इस सबके बीच एक और अहम मसला है, जिस पर ज़्यादा बात नहीं हो रही है. खासकर ऐसे समय में, जबकि बिगड़ी आर्थिक स्थिति को न सुधार पाने के लिए प्रणब मुखर्जी को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा हो. यह सवाल सीधे-सीधे वित्त मंत्री के सलाहकार से जुड़ा हुआ है.

Read more

इस बदहाली के लिए ज़िम्मेदार कौन है

आप जब इन लाइनों को पढ़ रहे होंगे तो मैं नहीं कह सकता कि रुपये की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में या डॉलर के मुक़ाबले क़ीमत क्या होगी. रुपया लगातार गिरता जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने न केवल बैंकों की, बल्कि सभी वित्तीय संस्थाओं की रेटिंग घटा दी है. कुछ एजेंसियों ने तो हमारे देश की ही रेटिंग घटा दी है.

Read more

मुद्रास्फीति और बैंकिंग

स्टेट बैंक से किसी भी शहर या क़स्बे में आर्थिक सहायता प्राप्त हो सकती है. हालांकि अभी तक स्टेट बैंक का संचालन पूर्ण रूप से राष्ट्रीयकरण की पद्धति पर हुआ नहीं है. अब भी सब ओहदेदार ऑफिसर वर्ग या कर्मचारीगण उसी पुराने साम्राज्य के प्यादे ही हैं, जो पूंजीपतियों के अधीन था. अतएव वर्षों से चली आ रही अपनी आदतों को वे सहसा छोड़ नहीं सकते.

Read more

मुद्रा की शक्ति और उसकी मान्यता

भारत को आज़ाद हुए 12 साल बीत गए. इन 12 वर्षों में 5 या 6 वित्त मंत्री बदल चुके हैं. हर मंत्री की मुद्रा नीति भिन्न-भिन्न थी.

Read more

शिरडी साईं बाबा संस्थान में घोटाला

एक मुहावरा है, जहां धन एकत्र होगा, वहां चोर की नज़र पड़ेगी ही. शिरडी के साईं बाबा तो फकीर थे और फकीरी में ही उन्होंने सारा जीवन गुजार दिया. हां, उन्होंने गरीब-लाचार लोगों की मदद करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी.

Read more

ओलांद के हाथों में फ्रांस की बागडोर

राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव संपन्न हो चुका है. सरकोज़ी चुनाव हार गए हैं और फ्रांस्वा ओलांद अब देश के नए राष्ट्रपति होंगे. सोशलिस्ट पार्टी के ओलांद ने फ्रांस की जनता से कुछ वायदे किए हैं. अब उन वायदों को पूरा करना उनकी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी होगी. सरकोज़ी की हार की सबसे बड़ी वजह यूरो ज़ोन का आर्थिक संकट और उससे निपटने में नाकामयाबी है. यूरोप के राष्ट्र आर्थिक संकट से बाहर आने के लिए मितव्ययता की नीति अपना रहे हैं.

Read more

शेयर बाज़ार का जुआ

अब मान लीजिए कि आप थोड़े-बहुत जुआरी भी हैं. आप जुए से अत्यंत नफरत करते हों तो भी वर्तमान आर्थिक व्यवस्था के ढांचे को समझने के लिए जुए की जानकारी भी आवश्यक है. शेयर बाज़ार में व्यापार के अलावा एक विशेष खेल खेला जाता है, जिसे सट्टा कहते हैं. इसमें खयाली शेयरों की खयाली क़ीमतें दी-ली जाती हैं.

Read more

बजट- 2012 देश पर गंभीर आर्थिक संकट

सोलह मार्च को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी बजट पेश करेंगे. पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद पेश किए जा रहे इस बजट की रूपरेखा पर हाल में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के घर पर एक मीटिंग हुई. दो घंटे के बाद मीडिया को स़िर्फ इतना बताया गया कि जनता के हितों को ध्यान में रखकर बजट तैयार किया जाएगा, लेकिन इस मीटिंग के बाद जितने भी नेता मुखर्जी के घर से बाहर निकल रहे थे, उनके चेहरे से पता चल रहा था कि आगे क्या होने वाला है.

Read more