प्रथम अपील कब और कैसे करें

आरटीआई आवेदन डालने के बाद आमतौर पर यह देखा जाता है कि लोक सूचना अधिकारियों द्वारा स्पष्ट एवं पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है. ऐसी स्थिति में अपील एवं शिकायत करने के अलावा और कोई चारा नहीं बचता.

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आरटीआई : कुछ सवाल और जवाब

यह ग़लत है. इसके विपरीत हर अधिकारी को अब यह पता होगा कि वह जो कुछ भी लिखता है, वह जन समीक्षा का विषय हो सकता है. यह उस पर जनहित में उत्तम लिखने का दबाव बनाएगा. कुछ ईमानदार नौकरशाहों ने अलग से स्वीकारा है कि आरटीआई ने उनके राजनीतिक एवं अन्य प्रभावों को दरकिनार करने में बहुत सहायता की है.

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समाजवादी पार्टी का विजय लक्ष्य 2014

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विजय पताका फहराने के बाद समाजवादी पार्टी 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव में दिल्ली फतह करने की तैयारी में जुट गई है. सपा की इस कार्ययोजना को विजय लक्ष्य 2014 नाम दिया गया है. इसके पोस्टर भी छपवा लिए गए हैं, जिन पर विजय 2012-लक्ष्य 2014 नारा लिखा हुआ है. इस कार्ययोजना का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाना है.

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मनरेगा का हिसाब-किताब कैसे लें

नरेगा अब मनरेगा ज़रूर हो गई, लेकिन भ्रष्टाचार अभी भी ख़त्म नहीं हुआ. इस योजना के तहत देश के करोड़ों लोगों को रोज़गार दिया जा रहा है. गांव के ग़रीबों-मजदूरों के लिए यह योजना एक तरह से संजीवनी का काम कर रही है. सरकार हर साल लगभग 40 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च कर रही है, लेकिन देश के कमोबेश सभी हिस्सों से यह ख़बर आती रहती है कि कहीं फर्जी मस्टर रोल बना दिया गया तो कहीं मृत आदमी के नाम पर सरपंच-ठेकेदारों ने पैसा उठा लिया.

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शादी करने के लिए बीमारी का बहाना

कुछ लोग अपने मक़सद को पूरा करने के लिए झूठ बोलने से क़तई गुरेज़ नहीं करते. ऐसा ही वाक़िया न्यूयॉर्क की एक युवती (25) का है, जिसने शादी करने के लिए फरेब का सहारा लिया. पिछले साल उसने एक समाचार प्रकाशित करवाया कि उसको ल्यूकेमिया कैंसर है और वह कुछ महीने बाद मरने वाली है.

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सूचना क़ानून: कुछ अहम सवाल

सूचना कौन देगा

सभी सरकारी विभागों के एक या एक से अधिक अधिकारियों को लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किया गया है. आपको अपना आवेदन उनके पास ही जमा कराना है. यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि वे आपके द्वारा मांगी गई सूचना विभाग की विभिन्न शाखाओं से इकट्ठा करके आप तक पहुंचाएं.

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आरटीआई का इस्तेमाल ऐसे करें

हमारे पास पाठकों के ऐसे कई पत्र आए, जिनमें बताया गया कि आरटीआई के इस्तेमाल के बाद किस तरह उन्हें परेशान किया गया या झूठे मुक़दमे में फंसाकर उनका मानसिक और आर्थिक शोषण किया गया. यह एक गंभीर मामला है और आरटीआई क़ानून के अस्तित्व में आने के तुरंत बाद से ही इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं.

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आरटीआई शुल्क के बारे में जानें

सूचना अधिकार क़ानून के तहत आवेदन शुल्क या अपील या फोटो कॉपी शुल्क कितना होगा, यह तय करने का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया है. मतलब यह कि राज्य सरकार अपनी मर्ज़ी से यह शुल्क तय कर सकती है. यही कारण है कि विभिन्न राज्यों में सूचना शुल्क/अपील शुल्क का प्रारूप अलग-अलग है. इस अंक में हम आपको आरटीआई शुल्क और सूचना के बदले लिए जाने वाले शुल्क के बारे में बता रहे हैं.

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सांसद निधि के पैसों का क्या हुआ

विकास कार्य के लिए आपके सांसद को हर साल करोड़ों रुपये मिलते हैं, जिसे सांसद स्थानीय विकास फंड कहा जाता है. इस फंड से आपके क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्य किए जाने की व्यवस्था होती है. क्या कभी आपने अपने लोकसभा क्षेत्र में सांसद निधि से हुए विकास कार्यों के बारे में जानने की कोशिश की? क्या आपने कभी यह सवाल पूछा कि आपके इलाक़े में सांसद फंड से कितना काम हुआ है?

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सौ समस्याओं का एक समाधान : आरटीआई आवेदन

रिश्वत देना जहां एक ओर आम आदमी की मजबूरी बन गया है, वहीं कुछ लोगों के लिए यह अपना काम जल्दी और ग़लत तरीक़े से निकलवाने का ज़रिया भी बन गया है, लेकिन इन दोनों स्थितियों में एक फर्क़ है. एक ओर 2-जी स्पेक्ट्रम के लिए रिश्वत दी जाती है, तो दूसरी ओर एक आम और बेबस आदमी को राशन कार्ड बनवाने सरकारी पेंशन, दवा एवं इंदिरा आवास पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है.

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आरटीआई ईमानदार अधिकारियों के लिए वरदान है

आरटीआई को लेकर एक आशंका ज़ाहिर की जाती है कि फाइल नोटिंग के सार्वजनिक होने की वजह से अधिकारी ईमानदार सलाह देने से डरेंगे, लेकिन यह आशंका ग़लत है. इसके विपरीत, हर अधिकारी को अब यह पता होगा कि वह जो कुछ भी लिखता है, वह जन समीक्षा का विषय हो सकता है. यह उस पर जनहित में लिखने का दबाव बनाएगा.

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सरकारी दस्तावेज़ या कार्य का निरीक्षण करें

आरटीआई क़ानून में कई प्रकार के निरीक्षण की व्यवस्था है. निरीक्षण का मतलब है कि आप किसी भी सरकारी विभाग की फाइल, किसी भी विभाग द्वारा कराए गए काम का निरीक्षण कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, यदि आपके क्षेत्र में कोई सड़क बनाई गई है और आप उसके निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री से संतुष्ट नहीं हैं या सड़क की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं तो आप निरीक्षण के लिए आवेदन कर सकते हैं.

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दिल्‍ली का बाबूः बाबुओं की कमी से जूझता सूचना आयोग

पिछले महीने केंद्रीय सूचना आयोग में सूचना आयुक्त के पद के लिए सरकार ने आवेदन मांगा है. इस विभाग में का़फी पद खाली पड़े हैं, जिन पर नियुक्ति नहीं की जा रही है. इस बार जो आवेदन आमंत्रित किए गए हैं

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नोएडाः झुग्गीवालों पर विस्थापन की तलवार

लोकतंत्र में चुनाव सबसे बड़ा पर्व होता है. चुनाव क़रीब आते ही धमाचौकड़ी और हुड़दंग का माहौल बन जाता है. दो तरह के दृश्य नज़र आने लगते हैं. राजनीतिज्ञों की बंद तिजोरियां खुलने लगती हैं, मतदाताओं को लुभाने के लिए उपहारों की बारिश होने लगती है.

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शेहला मसूद: सूचना का एक और सिपाही शहीद

भ्रष्टाचार की भंडाफोड़ कोशिशें जानलेवा साबित हो रही हैं. भोपाल की आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद की हत्या से पूरे देश में सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां लेने का जोख़िम उठा रहे कार्यकर्ता हैरान हैं.

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अपील व शिकायत के फर्क़ को समझें

आरटीआई क़ानून के तहत शिकायत का क्या अर्थ होता है. शिकायत कब, कहां और कैसे दा़खिल की जाती है. दरअसल, अपील और शिकायत में एक बुनियादी फर्क़ है. कई बार ऐसा होता है कि आपने अपने आरटीआई आवेदन में जो सवाल पूछा है

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सरकारी और निजी स्कूलों से हिसाब मांगे

सूचना का अधिकार क़ानून को लागू हुए क़रीब छह साल होने को हैं. इन छह सालों में इस क़ानून ने आम आदमी को पिछले साठ साल की मजबूरी से मुक्ति दिलाने का काम किया. इस क़ानून ने आम आदमी को सत्ता में बैठे ताक़तवर लोगों से सवाल पूछने की ताक़त दी. व्यवस्था में लगी दशकों पुरानी ज़ंग को छुड़ाने में मदद की.

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आपकी समस्याएं और सुझाव

आपके पत्र हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इस अंक में हम उन पाठकों के पत्र शामिल कर रहे हैं, जिन्होंने बताया है कि आरटीआई के इस्तेमाल में उन्हें किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और सूचना अधिकार क़ानून को लेकर उनके अनुभव क्या हैं. इसके अलावा इस अंक में मनरेगा योजना और जॉब कार्ड से संबंधित एक आवेदन भी प्रकाशित किया जा रहा है, ताकि आप इसका इस्तेमाल समाज के ग़रीब तबक़े के हित में करके भ्रष्ट व्यवस्था को सुधारने की एक कोशिश कर सकें.

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आवासीय ईलाकों में गैरकानूनी व्यवसायिक गतिविधियां

यह समस्या लगभग हर छोटे-बड़े शहर की है. आवासीय-रिहायशी इलाक़ों में लालची और स्वार्थी क़िस्म के लोग ऐसे-ऐसे व्यवसाय शुरू कर देते हैं, जिनकी वजह से उस इलाक़े में रहने वाले लोगों के लिए कई सारी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं. मसलन, जहां अवैध गोदाम, पार्किंग, मोटर वर्कशॉप चल रहे हैं, जिनकी वजह से वहां प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है, साथ ही वहां रहने वाले लोग भी परेशान रहते हैं.

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सांसद निधि: कहां और कितना खर्च हुआ

विकास कार्य के लिए आपके स्थानीय सांसद को हर साल करोड़ों रुपये मिलते हैं. इसे सांसद स्थानीय विकास फंड कहा जाता है. इस फंड से आपके क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्य किए जाने की व्यवस्था होती है. लेकिन क्या कभी आपने अपने लोकसभा क्षेत्र में सांसद निधि से हुए विकास कार्यों के बारे में जानने की कोशिश की?

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कैसे करें अपील और शिकायत

इस बार हम आपको बताते हैं कि आरटीआई क़ानून के तहत शिकायत व अपील कब और कैसे करते हैं. साथ ही इस अंक में हम अपील व शिकायत का एक प्रारूप भी प्रकाशित कर रहे हैं. दरअसल, अपील और शिकायत में एक बुनियादी फर्क़ है. कई बार ऐसा होता है कि आपने अपने आरटीआई आवेदन में जो सवाल पूछा है उसका जवाब आपको ग़लत दे दिया जाता है.

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समस्याएं अनेक समाधान एक

आज देश में एक धारणा बन गई है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं कराया जा सकता है. बहुत हद तक यह विचार सही भी है, क्योंकि भ्रष्टाचार उस सीमा तक पहुंच गया है, जहां एक ईमानदार आदमी का ईमानदार बने रह पाना मुश्किल हो गया है. लेकिन इस भ्रष्ट व्यवस्था में भी आप यदि चाहें तो अपना काम बिना रिश्वत दिए करा सकते हैं.

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प्रथम अपील क्या है

इस कॉलम की शुरुआत में हमने आपको प्रथम अपील, द्वितीय अपील एवं शिकायत के बारे में बताया था. एक बार फिर से हम आपको अपील एवं शिकायत के बारे में जानकारी दे रहे हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि आरटीआई आवेदन डालने के बाद आमतौर पर यह देखा जाता है कि लोक सूचना अधिकारियों द्वारा स्पष्ट एवं पूर्ण सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है.

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तीसरा पक्ष क्या है

कई बार जब आप किसी सरकारी विभाग में आरटीआई आवेदन देते हैं तो जवाब में आपको बताया जाता है कि अमुक सूचना तीसरे पक्ष से जुड़ी है, इसलिए आपको नहीं दी जा सकती या मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए सूचना का प्रकटीकरण नहीं किया जा सकता है या फिर अमुक सूचना को सार्वजनिक करना देशहित में नहीं है अथवा सूचना को सार्वजनिक करने से देश की आंतरिक सुरक्षा को ख़तरा हो सकता है.

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एक आवेदन से बन जायेगा काम

रिश्वत देना जहां एक ओर आम आदमी की मजबूरी बन चुका है, वहीं कुछ लोगों के लिए यह अपना काम जल्दी और ग़लत तरीक़े से निकलवाने का ज़रिया भी बन गया है, लेकिन इन दोनों स्थितियों में एक फर्क़ है.

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सूचना शुल्क क्या और कितना

सूचना का अधिकार क़ानून के तहत सूचना और आवेदन के बदले पैसा लिए जाने का प्रावधान है, लेकिन इसी प्रावधान का बेजा इस्तेमाल करके कई बार लोक सूचना अधिकारी आवेदकों को परेशान भी करते हैं. सूचना का अधिकार क़ानून के तहत जब आवेदक कोई सूचना मांगता है तो सूचना के बदले पैसा मांगा जाता है.

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आरटीआई : कुछ ज़रूरी जानकारियां

क्या मुझे सूचना मांगने की वजह बतानी होगी?

बिल्कुल नहीं. आपको अपना नाम, पता एवं फोन नंबर के अलावा कोई भी अतिरिक्त जानकारी नहीं देनी पड़ती है. क़ानून में यह स्पष्ट उल्लेख है कि आवेदक से संपर्क के लिए ज़रूरी जानकारी के अलावा और कोई भी जानकारी नहीं मांगी जानी चाहिए.

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आरटीआई: कुछ ख़ास बातें

लोक सूचना अधिकारी यदि आवेदन लेने से इंकार करता है, अथवा परेशान करता है तो उसकी शिकायत सीधे सूचना आयोग से की जा सकती है.

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राजा का एक और कारनामा

दूरसंचार मंत्रालय और घोटालों का मानो चोली-दामन का साथ है. टू जी स्पेक्ट्रम घोटाले की आंच से अभी दूरसंचार विभाग उबरा भी नहीं था कि एक और नया मामला सामने आ गया.

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