एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

साधारण पोशाक में किसी आम आदमी की तरह दुबला-पतला नज़र आने वाला शख्स, जो बगल से गुजर जाए तो शायद उस पर किसी की नज़र भी न पड़े, आज देश के करोड़ों लोगों की नज़रों में एक आशा बनकर उभरा है. तीखी बोली, तीखे तर्क और ज़िद्दी होने का एहसास दिलाने वाला शख्स अरविंद केजरीवाल आज घर-घर में एक चर्चा का विषय बन बैठा है. अरविंद केजरीवाल की कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं. उनकी अच्छाइयों और बुराइयों का विश्लेषण किया जा सकता है, लेकिन इस बात पर दो राय नहीं है कि देश में आज भ्रष्टाचार के खिला़फ जो माहौल बना है, उसमें अरविंद केजरीवाल का बड़ा योगदान है.

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यह जनता की जीत थी

संजय सिंह अन्ना के सहयोगी हैं और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के अहम कार्यकर्ता भी. 26 अगस्त को जब दिल्ली की सड़कों पर पुलिस से इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ताओं और आम जनता की भिड़ंत हुई, तब उसके कई दिनों बाद पुलिस ने अरविंद केजरीवाल समेत उनके कई सहयोगियों के खिला़फ मामले दर्ज किए. गंभीर आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है.

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टीम अन्ना-रामदेव : मतभेद भी है, मनभेद भी है

भारतीय परंपरा के अनुसार खुशी बांटने के लिए साल में एक बार सालगिरह मनाई जाती है, वहीं दु:ख बांटने के लिए बरसी मनाई जाती है. 3 जून, 2012 को जंतर-मंतर पर बाबा रामदेव का एक दिन का अनशन हुआ और ठीक एक साल पहले 4-5 जून की मध्यरात्रि में रामलीला मैदान में आमरण अनशन पर बैठे रामदेव और उनके हज़ारों समर्थकों पर पुलिसिया डंडा चला था.

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